87% चीनी, 74% हिंदुस्तानी देश की प्रगति से खुश, आधे से ज्यादा अमेरिकी, ब्रिटिश, फ्रांसीसी असंतुष्ट

मेरिका, ब्रिटेन, स्वीडन, फ्रांस, जर्मनी, जापान और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में 50 प्रतिशत से ज्यादा लोगों का मानना था कि उनका देश गलत दिशा में जा रहा है।

NPC Fu Ying, India Fu Ying China, India China Dispute, India China Relations, NSG India Chinaगुरुवार (23 जून, 2016) को शंघाई कोऑपरेशन ऑर्गनाइजेशन के शिखर सम्मेलन से इतर मुलाकात करते भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग। (PTI Photo)

छब्बीस देशों के नागरिकों के बीच किए गए एक सर्वे के अनुसार चीन, भारत और सऊदी अरब के लोग अपनी-अपनी राष्ट्र की गति से सबसे अधिक संतुष्ट हैं। अंतरराष्ट्रीय मार्केट रिसर्च संस्ता आईपीएसओएस द्वारा कराे जाने वाले मासिक सर्वे “व्हॉट वरीज द वर्ल्ड” (दुनिया की समस्या) से पता चला कि सर्वे में शामिल 26 देशों में से ज्यादातर को ये लगता है कि उनका देश गलत दिशा में जा रहा है। हालांकि अपने देश को सकारात्मक राय सबसे ज्यादा चीनियों में देखी गई जहां सर्वे में शामिल 87 प्रतिशत लोगों का मानना था कि उनका देश सही दिशा में आगे बढ़ रहा है। वहीं सर्वे में शामिल 74 प्रतिशत भारतीयों का मानना था कि देश सही राह पर आगे बढ़ रहा है। सर्वे में शामिल 71 प्रतिशत सऊदी अरब निवासियों की भी अपने देश को चीनियों और भारतीयों जैसी ही राय थी।

एशियाई देशों के उलट मेक्सिको के केवल आठ प्रतिशत लोगों का मानना था कि उनका देश सही दिशा में आगे बढ़ रहा है। दक्षिण अफ्रीका के नौ प्रतिशत, ब्राजिल के 12 प्रतिशत, इटली के 14 प्रतिशत और हंगरी के केवल 21 प्रतिशत लोगों को लगा कि उनका देश सही राह पर आगे बढ़ रहा है। अमेरिका, ब्रिटेन, स्वीडन, फ्रांस, जर्मनी, जापान और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में 50 प्रतिशत से ज्यादा लोगों का मानना था कि उनका देश गलत दिशा में जा रहा है।

सर्वे के अनुसार इस समय दुनिया भर में चिंता के तीन सबसे बड़े मुद्दे हैं- बेरोजगारी, वित्तीय-राजनीतिक भ्रष्टाचार और गरीबी-सामाजिक असमानता। वहीं भारतीयों की तीन सबसे बड़ी चिंताएं थीं- भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और अपराध। चीनियों को सबसे ज्यादा चिंता नैतिक पतन, पर्यावरण और बेरोजगारी की थी। सऊदी अरब के नागरिकों के लिए बेरोजगारी, आतंकवाद और टैक्स तीन सबसे बड़ी चिंताएं रहीं। इस सर्वे के नतीजे चौंकाने वाले हैं क्योंकि आर्थिक और सामाजिक रूप से विकसित माने जाने वाले देशों के नागरिक अपने देश की दशा-दिशा को लेकर ज्यादा परेशान थे, जबकि विकासशील देश भारत और चीन के नागरिक संतुष्ट थे।

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