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जनसत्ता संवाद: संरा सुरक्षा परिषद में चीन ने क्यों अटकाई कोरोना पर चर्चा

न्यूयार्क टाइम्स ने छह जनवरी को अपनी एक रिपोर्ट में बताया कि 59 लोग वुहान में न्यूमोनिया जैसी बीमारी से पीड़ित हैं। इसके बाद चीन ने प्रथम स्तर की यात्रा निगरानी और चेतावनी जारी की। आठ जनवरी को भी चीन के स्वास्थ्य अधिकारियों ने दावा किया कि यह वायरस इंसान से इंसान में फैल रहा है। 12 जनवरी को चर्चित डॉक्टर ली को अस्पताल में भर्ती कराया गया। एक मरीज के इलाज के दौरान उन्हें कोरोना का संक्रमण हो गया था। फिर चीन को मानना पड़ा कि यह विषाणु इंसान से फैल रहा है।

Author Published on: March 31, 2020 3:04 AM
संयुक्त राष्ट्र संघ में चीन का प्रतिनिधि।

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में कोरोना वायरस पर चर्चा के लिए एस्टोनिया के लाए गए प्रस्ताव को चीन ने किनारे कर दिया। चीन फिलहाल सुरक्षा परिषद की अध्यक्षता कर रहा है, जो मार्च के अंत में समाप्त हो जाएगी। दरअसल, जी20 और दक्षेस देशों की कोरोना से निपटने के तरीकों पर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बैठक के बाद से ही यह मांग तेज हो गई है कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भी इस पर चर्चा कराई जाए। लेकिन संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में इस संकट पर चर्चा को लेकर कोई बैठक निर्धारित नहीं की गई है। माना जा रहा है कि चीन इस पर चर्चा नहीं चाहता और अध्यक्ष देश होने के नाते एजंडा तय करने पर आखिरी मुहर लगाने का अधिकार उसके पास है।

हाल में सुरक्षा परिषद ने संयुक्त राष्ट्र में चीन के राजदूत झांग जुन की अध्यक्षता में वीडियो कांफ्रेंसिंग की और लीबिया में संयुक्त राष्ट्र सहयोग मिशन के कार्य पर चर्चा की। बैठक के बाद संयुक्त राष्ट्र में चीनी मिशन द्वारा जारी बयान में कहा गया कि परिषद के सदस्यों ने लीबिया में कोविड-19 वैश्विक महामारी के संभावित प्रभावों पर चिंता जाहिर की और पक्षों ने तत्काल संघर्ष रोकने तथा देश भर में अबाधित आपूर्ति सुनिश्चित करने की अपील की। इस पूरे बयान में कोविड-19 का बस इतना ही जिक्र था।
मानव जीवन को गंभीर तरीके से प्रभावित करने वाले कोरोना संक्रमण के मुद्दे पर परिषद की चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है। लेकिन चीन की अपनी दलीलें हैं। अप्रैल में परिषद की अध्यक्षता डॉमिनिकन गणराज्य को हासिल हो जाएगी।

इस महीने की शुरुआत में परिषद की अध्यक्षता संभालने से पहले झांग से पूछा गया था कि क्या चीन कोरोना वायरस आपदा पर चर्चा करेगा? झांग का तर्क था कि कोरोना वायरस महामारी से परेशान होने की जरूरत नहीं और अपनी अध्यक्षता में पेइचिंग सुरक्षा परिषद में इस पर चर्चा नहीं करेगा। झांग का तर्क था कि कोरोना वायरस का मुद्दा वैश्विक जन स्वास्थ्य के तहत आता है, जबकि सुरक्षा परिषद की प्राथमिक जिम्मेदारी भू-राजनीतिक सुरक्षा एवं शांति मामलों के साथ निपटना है।

कई अध्ययन रिपोर्ट में यह बात सामने आई है कि अगर चीन ने इस विषाणु की शुरुआत के समय और ज्यादा पारदर्शिता बरती होती तो कोरोना के असर को काफी हद तक कम कर लिया गया होता। 14 जनवरी को विश्व स्वास्थ्य संगठन ने अपनी पहली रिपोर्ट जारी की कि यह विषाणु इंसान से इंसान में नहीं फैलता है। 15 जनवरी को वुहान के स्वास्थ्य आयोग ने कहा कि इंसान से इंसान में कोरोना विषाणु के जाने की सीमित संभावना है। इसके बाद भी वुहान में भीड़ को जुटने दिया गया। 19 जनवरी को चीन के राष्ट्रीय स्वास्थ्य आयोग ने एलान किया कि कोरोना के इंसान से इंसान में फैलने के दो मामले सामने आए हैं।

वुहान से फैला कोरोना पूरी दुनिया में फैल चुका है। अमेरिकी पत्रिका नेशनल रिव्यू में छपे लेख के मुताबिक चीन ने कोरोना आंकड़े दुनिया से छिपाकर रखे जिससे यह लड़ाई बहुत कठिन हो गई है। एक दिसंबर, 2019 को कोरोना के पहले मरीज में लक्षण सामने आया। पांच दिन बाद मरीज की पत्नी भी पीड़ित हो गई। दिसंबर के दूसरे सप्ताह में वुहान के डॉक्टर उन लोगों की तलाश कर रहे थे, जिनमें यह विषाणु फैला था।

25 दिसंबर को वुहान में चीन के दो चिकित्साकर्मियों में भी कोरोना का लक्षण पाया गया। इस पूरे मामले का खुलासा करने वाले वाले डॉक्टर ली वेनलिआंग ने डॉक्टरों के एक समूह को चेतावनी दी कि यह सार्स हो सकता है। इसके बावजूद 31 दिसंबर को वुहान के स्वास्थ्य आयोग ने यह घोषित कर दिया कि यह वायरस इंसान से इंसान में नहीं फैलता है। चीन ने इस तरह के मामले सामने आने के तीन सप्ताह बाद डब्लूएचओ को इसके बारे में बताया। इसके बाद डॉक्टर ली को वुहान के पब्लिक सिक्योरिटी ब्यूरो बुलाया गया और उन पर अफवाह फैलाने का आरोप लगाया गया। उसी दिन ह्युवेई के प्रांतीय स्वास्थ्य आयोग ने वुहान के सारे नमूनों को नष्ट कर दिया।

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