ताज़ा खबर
 

चीन की विस्तारवादी नीति: कैसे धीरे-धीरे दबा ली 23 देशों की जमीन

चीन ने 11.83 लाख वर्ग किलोमीटर भूभाग वाले मंगोलिया पर अक्तूबर 1945 में हमला कर कब्जा जमा लिया। यहां दुनिया का 25 फीसद कोयला भंडार है। यहां की आबादी तीन करोड़ है। चीन ने 1997 में हांगकांग पर कब्जा कर लिया। इन दिनों वह वहां राष्ट्रीय सुरक्षा कानून लागू कर शिकंजा कसने की फिराक में है। 450 वर्ष के शासन के बाद 1999 में पुर्तगालियों ने चीन को मकाउ सौंप दिया। रूस से 52 हजार वर्ग किलोमीटर क्षेत्र पर चीन का विवाद है।

China, Galvan valley, aksai chinचीन अपनी विस्तारवादी नीति के तहत दुनिया के 23 देशों की जमीनें ताकत के बल पर हथिया ली है।

चीन ने जिस तरह अक्साई चिन को हड़पा और अब पूर्वी लद्दाख में गलवान घाटी पर कब्जा जमाने की नापाक कोशिश कर रहा है वह नया नहीं है। चीन की सीमा भले ही 14 देशों से लगती हो, लेकिन वह कम से 23 देशों की जमीन या समुद्री सीमाओं पर दावा जताता है। चीन अब तक दूसरे देशों की 41 लाख वर्ग किलोमीटर भूमि पर कब्जा कर चुका है, जो मौजूदा चीन का 43 फीसद हिस्सा है।

चीन ने अपनी विस्तारवादी नीति से पिछले 6-7 दशकों में अपने आकार को लगभग दोगुना कर लिया है। दरअसल, चीन ने 1949 में कम्युनिस्ट शासन की स्थापना के बाद से जमीन हथियाने की नीति अपनाई। राष्ट्रपति शी जिनपिंग के 2013 में सत्ता में आने के बाद से चीन ने भारत से लगी सीमा पर मोर्चेबंदी तेज की। लेकिन उसे कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है।

कब्जे का तौर-तरीका
ला ट्रोबे यूनिवर्सिटी एशिया सुरक्षा रिपोर्ट में चीन की विस्तारवादी नीति को लेकर तथ्य दिए गए हैं। चीन ने पूर्वी तुर्किस्तान के 16.55 लाख वर्ग किलोमीटर का भूभाग हड़प रखा है। 1934 में पहली बार इसे अंजाम दिया। 1949 तक चीन ने पूर्वी तुर्किस्तान पर कब्जा कर लिया। यहां की 45 फीसद आबादी उइघुर मुसलमानों की है। इसके बाद चीन ने 12.3 लाख वर्ग किलोमीटर वाले तिब्बत पर सात अक्तूबर 1950 को कब्जा कर लिया। 80 फीसद बौद्ध आबादी वाले तिब्बत पर हमला कर उसने अपनी सीमा का विस्तार भारत तक कर लिया। उसे यहां अपार खनिज, सिंधु, ब्रह्मपुत्र, मीकांग जैसी नदियों का स्रोत मिल गया।

चीन ने 11.83 लाख वर्ग किलोमीटर भूभाग वाले मंगोलिया पर अक्तूबर 1945 में हमला कर कब्जा जमा लिया। यहां दुनिया का 25 फीसद कोयला भंडार है। यहां की आबादी तीन करोड़ है। चीन ने 1997 में हांगकांग पर कब्जा कर लिया। इन दिनों वह वहां राष्ट्रीय सुरक्षा कानून लागू कर शिकंजा कसने की फिराक में है। 450 वर्ष के शासन के बाद 1999 में पुर्तगालियों ने चीन को मकाउ सौंप दिया। रूस से 52 हजार वर्ग किलोमीटर क्षेत्र पर चीन का विवाद है।

ताइवान, तिब्बत और अरुणाचल
ताइवान की तरह तिब्बत भी चीन की विदेश नीति में बहुत महत्व रखता है। अरुणाचल प्रदेश मुद्दे को उठाकर बेजिंग इस मुद्दे को भी तिब्बत की तरह बनाने की कोशिश कर रहा है। चीन का मानना है कि अरुणाचल नया ताइवान है, जिसे चीनी गणराज्य में शामिल होना चाहिए। चीन भौगोलिक परिस्थितियों के कारण भारत का पड़ोसी नहीं बना है, बल्कि इसने 1951 में तिब्बत को हथियाया। भारत की चीन से लगी सीमा के क्षेत्रों में घुसपैठ की घटनाएं जान बूझकर की जाती हैं।

2001 में उत्तराखंड के साथ लगती सीमा के नक्शों की अदला बदली की गई थी, लेकिन इस क्षेत्र में भी चीन घुसपैठ करने से बाज नहीं आता। सिक्किम की तिब्बत से लगी करीब 206 किमी की सीमा विवादित नहीं है और इसे चीन भी मान्यता देता है, लेकिन इसके बावजूद इस इलाके में घुसपैठ होती रहती है।

चीनी सेना बर्फीले हिमालयी क्षेत्र में घुसपैठ के जरिए और तिब्बत में सैन्य तैयारियों के चलते अपने रेल संपर्क को पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर, नेपाल, म्यांमार और बांग्लादेश तक बढ़ाना चाहता है। उसने दक्षिण एशिया और हिंद महासागर में अपने सामरिक दायरे को बढ़ा लिया है। चीन देंग शियाओ पिंग के जमाने में ‘हाइड एंड बाइड’ (छिपकर मौके का इंतजार करने की नीति) को छोड़कर ‘सीजिंग अपॉरचुनीटीज’ (मौकों को पैदा करने में) नीति पर अमल करने लगा है।

भारत की नीति
जानकारों की राय में जब तक भारत अपनी स्थिति को देखते हुए मुखर और आक्रामक नहीं होता है, तब तक यह टुकड़ों-टुकड़ों में चीन जमीन कब्जा करने की नीति पर अमल करता रहेगा। चीन ने तिब्बत को छिंगहाई से जोड़ने वाला रेल मार्ग बना लिया है, जो तिब्बत को शेष चीन के साथ जोड़ता है। यह 1985 किलोमीटर लंबा रेलमार्ग चीन के लिए सामरिक महत्व का पड़ाव है। यह रेलमार्ग भारत, नेपाल और भूटान की सीमाओं के बहुत करीब है।

चीन ने तांगुला रेलवे स्टेशन का निर्माण किया है जो कि 5068 मीटर की दूरी पर स्थित है। चीन अब अपने तिब्बत के भूभाग को पाक अधिकृत कश्मीर से भी जोड़ने में लगा हुआ है। भारत ने सीमावर्ती क्षेत्रों में चीन की मौजूदगी के खिलाफ जो उपाय अपनाए हैं, उन्हें चीनी सैनिक सीमा में घुसकर टेंट लगाने, फ्लैग मार्च करने, बंकरों को नष्ट करने और निगरानी कैमरों को छीनने का काम कर निष्क्रिय बता देते हैं।

क्या कहते हैं जानकार
भारतीय क्षेत्र में आकर जमे चीन के सैनिक फिंगर इलाके में डोकलाम की तरह स्थायी निगरानी मैकेनिज्म खड़ा करना चाहते हैं। ऐसे में विवाद सुलझने में समय लग सकता है। चीन के साथ भारत को सद्भावपूर्ण कूटनीतिक रिश्ते को अहमियत देनी चाहिए। शिखर नेतृत्व के बीच में भी चर्चा, लेकिन भारत झुकना नहीं चाहिए।
– शशांक, पूर्व विदेश सचिव

चीन के सैनिक भारतीय इलाके में आकर बैठ गए हैं। चीनी सैनिक पहले से भारतीय क्षेत्र में घुसपैठ करते रहे हैं, लेकिन पिछले कुछ समय से उनके सैन्य अधिकारी भारतीय क्षेत्र में आने के बाद जिद दिखाने लगे हैं। यह खतरनाक है और इसपर रोक लगनी चाहिए।
– मेजर जनरल (रिटायर) लखविंदर सिंह, रक्षा विशेषज्ञ

समुद्री सीमा विवाद
35 हजार वर्ग किलोमीटर वाले समुद्र से चारों ओर से घिरे ताइवान पर लंबे समय से चीन की नजर है। 1949 में कम्युनिस्टों की जीत के बाद राष्ट्रवादियों ने ताइवान में शरण ली। ताइवान को अमेरिकी समर्थन है। जापान के 81 हजार वर्ग किमी के आठ द्वीपों पर चीन की नजर है। 2013 में चीन के वायु सीमा जोन बनाने से विवाद बढ़ गया था। दक्षिण चीन सागर क्षेत्र में सात देशों से क्षेत्र हड़पने की कोशिश कर रहा है चीन। ताइवान, ब्रूनेई, इंडोनेशिया, मलेशिया, फिलीपींस, वियतनाम, सिंगापुर से तनाव है। 35.5 लाख वर्ग किलोमीटर में फैले दक्षिणी चीन सागर 90 फीस क्षेत्र पर दावा करता है। चीन ने पारसले, स्पाटर्ले द्वीपों पर कब्जा जमाकर सैन्य अड्डे बनाए।

Hindi News के लिए हमारे साथ फेसबुक, ट्विटर, लिंक्डइन, टेलीग्राम पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News AppOnline game में रुचि है तो यहां क्‍लिक कर सकते हैं।

Next Stories
1 ‘Unlock 2’ Guidelines में क्या खुलेगा और क्या रहेगा बंद? जानें यहां
2 Unlock 2.0 Guidelines: मेट्रो रेल-जिम और सिनेमा हॉल नहीं खुलेंगे, नाइट कर्फ्यू भी रहेगा; पढ़ें पूरे दिशा-निर्देश
3 Chinese Apps Banned in India List: चीन के TikTok, UC Browser व WeChat सहित 59 ऐप्स मोदी सरकार ने किए बैन, यहां देखें पूरी लिस्ट