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संक्रमण की गिरफ्त में आने से पहले चीन करा चुका है कोरोना पर 362 पेटेंट

कोरोना से जुड़े शोध को लेकर यह खुलासा पेटेंट व मार्केट रिसर्च पर काम कर रही संस्था ‘एन्फोल्ज’ के एक अध्ययन से हुआ है।

Corona Virus Chinaखतरनाक होता जा रहा है कोरोना वायरस। फोटो सोर्स: इंडियन एक्सप्रेस

कोरोना विषाणु पर चल रहे विवादों के बीच तथ्यों पर गौर करें तो पता चलता है कि चीन लंबे समय से इस पर काम कर रहा था। यही नहीं, चीन इब तक कोरोना से संबंधित 362 पेटेंट करा चुका है। इस सिलसिले में चीन में सबसे ज्यादा काम पिछले दो सालों में हुआ है। वुहान स्थित कृषि विश्वविद्यालय इस संबंध में रिसर्च के मामले में सबसे आगे है।

वुहान प्रांत से ही इस बीमारी का प्रसार शुरू हुआ है। चीन के एके डमी ऑफ मिलिट्री मेडिकल साइंसेज ने भी कोरोना विषाणु से संबंधित कई पेटेंट कराए हैं। साफ है कि कोरोना के संक्रमण ने आज भले पूरी दुनिया को अपनी गिरफ्त में ले लिया है, पर कम से कम चीन के शोध संस्थानों के लिए यह बीमारी नई नहीं है। खासकर चीन के वुहान शहर में स्थित संस्थानों के लिए तो यह बिल्कुल ही नई बीमारी नहीं है। दिलचस्प है कि वुहान प्रांत से ही कोरोना संक्रमण पूरी दुनिया में फैला है। कोरोना से जुड़े शोध को लेकर यह खुलासा हुआ है पेटेंट व मार्केट रिसर्च पर काम कर रही संस्था ‘एन्फोल्ज’ की ओर से किए गए एक अध्ययन से।

एन्फोल्ज के अध्ययन के मुताबिक चीन में कोरोना विषाणु को लेकर कई सालों से काफी शोध चल रहा है। इस दिशा में सबसे अधिक काम करने वाले संस्थानों में वुहान स्थित हुआजॉन्ग एग्रिकल्चरल यूनिवर्सिटी का नाम भी शामिल है, जिसके पास कोरोना से संबंधित 15 पेटेंट हैं और इनमें से नौ पेटेंट वर्ष 2018-19 में कराए गए हैं। किसी भी क्षेत्र में शोध व विकास का ठोस पैमाना होता है आविष्कार, जिसकी वैधता की पुष्टि पेटेंट के जरिए होती है। एन्फोल्ज ने कोरोना वायरस की दिशा में चल रहे शोध व विकास के बारे में पता लगाने के लिए एक संक्षिप्त अध्ययन किया, जिसका आधार पेटेंट को बनाया गया। अध्ययन में पता चला कि पिछले कुछ वर्षों में दुनिया भर में इससे संबंधित 1286 पेटेंट कराए गए हैं, जिनमें से 1002 पेटेंट सीधे तौर पर कोरोना वायरस से संबंधित हैं।

अधिकतर पेटेंट श्वसन (रेस्पीरेटरी) से संबंधित प्रयोगों को लेकर ही हैं। इनमें से एक तिहाई,यानी कि 362 पेटेंट सिर्फ चीन के पास हैं। एन्फोल्ज के अध्ययन के मुताबिक वुहान स्थित हुआजांग एग्रिकल्चरल यूनिवर्सिटी के अलावा चीन के पांच अन्य संस्थानों ने कोरोना वायरस के संबंध में सबसे अधिक काम किया है। इनमें क्विगडाओ बायो इंजीनियरिंग कंपनी लिमिटेड के पास कोरोना से संबंधित 15 पेटेंट हैं। इसी तरह पुलाइक बायोलाजिकल इंजीनियरिंग के पास 18 पेटेंट हैं।

इनके अलावा साउथ चाइना एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी और चीन की एकेडमी ऑफ मिलिट्री मेडिकल साइंसेज के नाम भी कोरोना से संबंधित कई पेटेंट हैं। एन्फोल्ज के निदेशक और सह संस्थापक विनोद सिंह का कहना है कि दुनिया भर के लिए बड़ी मुसीबत बन चुके कोरोना विषाणु का वास्तविक स्रोत क्या है, इस बात को लेकर अब तक कयास ही लगाए जा रहे हैं। सबसे अधिक आशंका चमगादड़ और सांपों को लेकर है। गौरतलब है कि इनका इस्तेमाल चीन में खानपान में होता है।

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