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लद्दाख सीमा के पास चीन ने एयरबेस का किया विस्तार, तैनात किए फाइटर प्लेन; सैटेलाइट इमेज से खुलासा

लद्दाख के करीब मौजूद भारत-चीन के बॉर्डर पर चीन ने इन्फ्रास्ट्रक्चर का निर्माण तेज कर दिया है, इस विवाद की तुलना 1999 के करगिल के तनाव से की जा रही है।

सैटेलाइट इमेज में हुआ तिब्बत स्थित एयरबेस पर चीन की बढ़ी हुई गतिविधियों का खुलासा। (फोटो- detresfa_)

भारत और चीन के बीच सीमा पर विवाद बढ़ता ही जा रहा है। दोनों देशों ने लद्दाख से लगे बॉर्डर एरिया पर बराबर संख्या में सेना को तैनात कर दिया है। इस बीच कुछ सैटेलाइट इमेज सामने आई हैं, जिनमें पाया गया है कि चीनॉ पांगोंग सा लेक से करीब 200 किलोमीटर दूर स्थित एयरबेस पर निर्माण गतिविधियां तेज कर रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, चीन इस बेस पर एक हवाई पट्टी बनाने में जुटा है, जिसे हेलिकॉप्टर या फाइटर एयरक्राफ्ट को उड़ाने में आसानी होगी।

न्यूज वेबसाइट एनडीटीवी ने ओपन सोर्स इंटेलिजेंस एक्सपर्ट detresfa_ की तिब्बत स्थित नगारी गुनसा एयरपोर्ट की दो सैटेलाइट इमेजेस हासिल की हैं। पहली तस्वीर इसी साल 6 अप्रैल की है, जबकि दूसरी तस्वीर 21 मई की है। इनमें साफ देखा जा सकता है कि एयरबेस पर चीनी सेना दूसरे टैक्सी ट्रैक का निर्माण करने में जुटी है। एक तीसरी सैटेलाइट इमेज में मुख्य हवाई पट्टी को दिखाया गया है, जिस पर पहले से ही चीनी फाइटर जेट खड़े हैं। माना जा रहा है कि यह चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के जे-11 और जे-16 फाइटर जेट्स हो सकते हैं।

गौरतलब है कि जे-11 और जे-16 रूस के सुखोई 27 के चीनी वर्जन हैं और इनकी क्षमता भारत के सुखोई-30 फाइटर विमान जैसी ही हैं। सैटेलाइट इमेज में दिखाया गया है कि इन जेट्स को तिब्बती एयरबेस पर पहली बार दिसंबर 2019 में देखा गया था। भारत के लिए नगारी गुनसा एयरबेस की लोकेशन खास मायने रखती है, क्योंकि यह बेस 14 हजार 22 फीट पर है, जो कि इसे दुनिया में सबसे ऊंचा एयरबेस बनाता है। हालांकि, एलएसी के पास मौजूद होने के बावजूद इतनी ऊंचाई पर लड़ाकू विमान सीमित युद्धक सामग्री के साथ ही उड़ान भर सकते हैं।

सैटेलाइट इमेज के मुताबिक तिब्बत के करीब एयरबेस पर दिसंबर 2019 में पहली बार फाइटर जेट देखे गए थे। (फोटो- detresfa_)

चीनी हरकत के बाद चार प्रदेशों में सेना ने चीन से लगी सीमा पर जवानों की संख्या बढ़ाई
गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को ही सीडीएस जनरल बिपिन रावत, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोवाल और तीनों सेना प्रमुखों से लद्दाख मुद्दे पर चर्चा की थी। सूत्रों के मुताबिक, भारतीय सेना ने सिक्किम, उत्तराखंड, अरुणाचल प्रदेश के साथ लद्दाख में सैनिकों की मौजूदगी बढ़ा दी है। बताया गया है कि चीन के आक्रामक रवैये के खिलाफ भारत कहीं भी कोताही बरतने के पक्ष में नहीं दिख रहा है।

बता दें कि लद्दाख में भारत और चीनी मिलिट्री कमांडरों के बीच करीब 6 राउंड्स की बातचीत हो चुकी है, लेकिन इसमें कोई खास सफलता नहीं मिली है। सूत्रों का कहना है कि चीनी सेना ने तीन जगहों पर एलएसी पार की और वे भारतीय सीमा से वापस जाने या तनाव कम करने के लिए तैयार नहीं हैं। गलवन वैली में भी चीन ने एलएसी के दूसरी तरफ भारी संख्या में फौज तैनात की है।

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