चीन ने लद्दाख में की सेना की बड़ी तैनाती, आर्मी चीफ नरवणे ने चिंता जता कहा- हम हर चुनौती से निपटने के लिए तैयार

लद्दाख के पास चीनी सैनिकों की भारी संख्या में मौजूदगी पर सेना प्रमुख ने चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि हम हर परिस्थित के लिए तैयार हैं। सेना प्रमुख अपने दो दिवसीय दौरे पर लद्दाख में हैं।

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सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे। (फोटो-एएनआई)

चीन ने भारतीय सीमा के पास अपनी सेना की एक बड़ी संख्या की तैनाती कर दी है। इस पर चिंता जताते हुए आर्मी प्रमुख नरवणे ने कहा कि हम हर चुनौती से निपटने के लिए तैयार हैं। आर्मी चीफ ने ये बातें लद्दाख गतिरोध और सैन्य बलों को हटाने पर दोनों देशों के बीच होने वाले 13वें दौर की बातचीत से पहले कही है।

आर्मी चीफ नरवणे ने एएनआई से बातचीत में कहा कि चीन ने हमारे पूर्वी कमान तक, पूरे पूर्वी लद्दाख और उत्तरी मोर्चे पर काफी संख्या में सैनिकों की तैनाती है। निश्चित रूप से, अग्रिम क्षेत्रों में चीन की तैनाती में वृद्धि हुई है जो हमारे लिए चिंता का विषय बना हुआ है।

उन्होंने कहा- “हम नियमित रूप से उनके सभी मूवमेंट की निगरानी कर रहे हैं। हमें मिले इनपुट के आधार पर, हम बुनियादी ढांचे के विकास के साथ-साथ सैनिकों के लेवल पर भी समान रूप से काम कर रहे हैं। फिलहाल, हम किसी भी स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार हैं”।

सेना प्रमुख ने आगे कहा कि पिछले छह महीने में स्थिति काफी सामान्य रही है। नरवणे ने कहा- “धीरे-धीरे, सभी विवादित बिंदु हल हो जाएंगे। मेरा दृढ़ मत है कि हम बातचीत के माध्यम से अपने मतभेदों को हल कर सकते हैं। मुझे उम्मीद है कि हम परिणाम पाने में सक्षम होंगे”।

उन्होंने कहा कि हमें उम्मीद है कि अक्टूबर के दूसरे सप्ताह में 13वें दौर की वार्ता में मतभेद सुलझाने को लेकर आम सहमति बनेगी। नरवणे लद्दाख में सेना की तैयारियों का जायजा के लिए दो दिवसीय यात्रा पर शुक्रवार को पूर्वी लद्दाख पहुंचे। यहां सेना प्रमुख ने रेजांग ला युद्ध स्मारक का दौरा किया। फरवरी तक इस क्षेत्र में कुछ सौ मीटर की दूरी पर दोनों सेनाएं अपने सैनिकों और टैंकों के साथ तैनात थीं।

16 सितंबर को केंद्रीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने दुशांबे में चीन के स्टेट काउंसलर और विदेश मंत्री वांग यी से मुलाकात की थी। विदेश मंत्रालय के अनुसार, दोनों नेताओं ने पूर्वी लद्दाख में एलएसी के साथ “मौजूदा स्थिति पर विचारों का आदान-प्रदान” किया।

पिछली बार दोनों देशों के बीच 12वें दौर की वार्ता 31 जुलाई को हुई थी, जिस दौरान दोनों पक्ष पेट्रोलिंग प्वाइंट 17ए के गोगरा पोस्ट से हटने पर सहमत हुए थे।

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