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अरुणाचल सीमा के नजदीक चीन ने बड़े पैमाने पर शुरू की खुदाई, बॉर्डर पर बढ़ाएगा कंट्रोल

चीन ने एक बार फिर अरुणाचल प्रदेश पर नियंत्रण बढ़ाने की कोशिशें तेज कर दी हैं। यह तब है जब हाल के बीते दिनों में ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात की है। चीन ने अपने मंसूबों को अंजाम देने के लिए अरुणाचल प्रदेश की सीमा के करीब बड़े पैमाने पर खनन कार्य शुरू किया है।

तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक तौर पर किया गया है। (फाइल फोटो- रॉयटर्स)

चीन ने एक बार फिर अरुणाचल प्रदेश पर नियंत्रण बढ़ाने की कोशिशें तेज कर दी हैं। यह तब है जब हाल के बीते दिनों में ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात की है। चीन ने अपने मंसूबों को अंजाम देने के लिए अरुणाचल प्रदेश की सीमा के करीब बड़े पैमाने पर खनन कार्य शुरू किया है। मीडिया रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि चीन अपने क्षेत्र में खनन कार्य कर रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक जिस जगह खनन कार्य चल रहा है, वहां सोना, चांदी और अन्य बहुमूल्य खनिजों का करीब 60 अरब डॉलर का भंडार पाया गया है। हांगकांग आधारित साउथ चाइना मार्निंग पोस्ट की खबर के मुताबिक खनन परियोजना भारत की सीमा से लगे चीनी क्षेत्र में पड़ने वाले लहुंजे काउंटी में चलाई जा रही है। गौरतलब है कि चीन अरूणाचल प्रदेश को दक्षिण तिब्बत का हिस्सा होने का दावा करता है। इसमें कहा गया है कि बुनियादी ढांचे में तीव्र विकास के साथ क्षेत्र के प्राकृतिक संसाधनों पर दावा करने का चीन का कदम इसे ‘एक और दक्षिण चीन सागर’ विवाद के रूप में तब्दील कर सकता है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि अरूणाचल प्रदेश को अपने नियंत्रण में करने के चीन के कदम के तहत खनन कार्य किया जा रहा। खबर के मुताबिक परियोजना से वाकिफ लोगों ने कहा है कि खनन कार्य दक्षिण तिब्बत पर फिर से दावा पेश करने की बीजिंग की महत्वाकांक्षी योजना का हिस्सा है। अखबार ने स्थानीय अधिकारियों, चीनी भूगर्भशास्त्रियों और रणनीतिक विशेषज्ञों से मिली जानकारी के आधार पर यह दावा किया है।

बता दें कि एक महीने पहले ही प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच प्रथम अनौपचारिक बैठक हुई थी। इस बैठक का उद्देश्य पिछले साल के डोकलाम सैन्य गतिरोध जैसी घटनाओं को टालना था। गौरतलब है कि डोकलाम गतिरोध ने द्विपक्षीय संबंधों को तनावपूर्ण कर दिया था। बीजिंग स्थित चीन भूविज्ञान विश्वविद्यालय के प्राध्यापक झेंग युये के मुताबिक नये पाए गए अयस्क हिमालय क्षेत्र में चीन और भारत के बीच संतुलन को बिगाड़ सकते हैं।

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