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बच्‍चों के लिए बनी हेल्‍पलाइन पर आ रहीं गंदी कॉल्‍स, बंद करना पड़ा टोल-फ्री नंबर

यह हेल्पलाइन साल 2016 में ई-बॉक्स पहल के अंतर्गत महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने लॉन्च की थी।

तस्वीर का इस्तेमाल सिर्फ प्रस्तुतिकरण के लिए किया गया है। (फोटोः Freepik)

बच्चों के साथ होने वाले यौन शोषण के लिए बनी हेल्पलाइन पर गंदी फोन कॉल्स आ रही थीं। अज्ञात कॉलर उस पर सेक्सुअल सेवाओं की मांग करते थे। ऐसे में राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) ने मजबूरी में उस टोल फ्री नंबर को अस्थाई तौर पर बंद कर दिया। मीडिया रिपोर्ट्स में एनसीपीसीआर के सदस्य यशवंत जैन के हवाले से बताया गया, “पिछले कुछ दिनों से फोन लगातार बजता था। दिन भर में तकरीबन 300 से 400 फोन कॉल आती थीं।”

उनके खिलाफ, “हम लगभग एक महीने से ऊपर से इस समस्या का सामना कर रहे थे। ऐसे में अस्थाई तौर पर हेल्पलाइन नंबर को बंद कर दिया गया है।” आपको बता दें कि हेल्पलाइन की देखरेख का काम आयोग के पास है। उस पर आने वाले फोन कॉल्स के लिए एक ऑपरेटर नियुक्त किया गया था, ताकि लोगों को शिकायतें ली जा सकें।

हेल्पलाइन साल 2016 में ई-बॉक्स पहल के अंतर्गत महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने लॉन्च की थी। एनसीपीसीआर की वेबसाइट पर ई-बॉक्स का विकल्प दर्शाता है, जिसकी मदद से यूजर ऑनलाइन शिकायत या फिर टोल फ्री नंबर पर कॉल कर शिकायत कर सकते हैं।

एनसीपीसीआर अधिकारी ने इस बाबत हेल्पलाइन पर कॉलर्स के साथ अपनी बातचीत का अनुभव साझा किया। वह बोले कि कॉलर्स ने हेल्पलाइन पर फोन करने से पहले इंटरनेट पर पोर्न कंटेंट सर्च किया होगा, उसी दौरान उन्हें बच्चों के खिलाफ होने वाले यौन शोषण की हेल्पलाइन का यह नंबर मिला होगा। जैन के मुताबिक, अधिकतर कॉल्स पिछड़े इलाकों में रहने वालों व कम पढ़े-लिखे लोगों ने की थीं। उन्हें बताया गया कि यह हेल्पलाइन है, पर वे समझ ही नहीं सके।

आयोग ने इस संबंध में पुलिस को शिकायत भी दी। एमटीएनएल से भी इस बारे में मदद मांगी गई। टोल फ्री नंबर मिलाने के बाद उन्हें रिकॉर्डेड मैसेज से सूचित किया गया कि यह हेल्पलाइन नंबर थी, जिस पर बच्चों के खिलाफ होने वाले यौन शोषण की शिकायत दी जाती है।

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