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CVO ने कहा बांध निर्माण में हुआ भ्रष्टाचार, किरेन रिजीजू ने बकाया बिलों के भुगतान के लिए लिखा मंत्रालय को पत्र

किरेन रिजीजू के कज़न गोबाई रिजीजू इस परियोजना में सब-कांन्ट्रैक्टर हैं। किरेन रिजीजू ने विद्युत मंत्रालय को ठेकेदार की बकाया राशि के भगुतान के लिए पत्र लिखा था।

Kiren Rijiju Tweets, Kiren Rijiju Hindu, Hindu Population Kiren Rijiju, India Minority Population, Arunachal Pradesh Hindu Populationगृह राज्यमंत्री किरेन रिजीजू (फाइल फोटो)

सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों (पीएसयू) के मुख्य सतर्कता अधिकारी (सीवीओ) की अरुणाचल प्रदेश की दो पनबिजली परियोजनाओं में हुए कथित भ्रष्टाचार की रिपोर्ट में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री किरेन रिजीजू, उनके कज़न और ठेकेदार गोबोई रिजीजू समेत नार्थ ईस्टर्न इलेक्ट्रिक पावर कार्पोरेशन (एनईईपीसीओ) के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर समेत कई अधिकारियों के नाम शामिल हैं। सीवीओ सतीश वर्मा की रिपोर्ट के अनुसार अरुणचाल प्रदेश में 600 मेगावाट के कामेंग पनबिजली परियोजना के तहत दो बांधों के निर्माण में भ्रष्टाचार हुआ है। वर्मा ने 129 पन्नों की रिपोर्ट इस साल जुलाई में सीबीआई, सीवीसी और विद्युत मंत्रालय को भेजी थी। किरेन रिजीजू ने अपनी सफाई में कहा है कि उन्होंने स्थानीय लोगों के भुगतान के लिए पत्र लिखा था लेकिन उन्हें भ्रष्टाचार के बारे में कुछ नहीं पता था।

वर्मा की रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि ठेकेदार, एनईईपीसीओ अधिकारियों और वेस्ट कामेंग जिले के अधिकारियों ने “व्यापक षडयंत्र” करके एनईईपीसीओ और सरकारी कोष का दुरुपयोग किया। वर्मा की रिपोर्ट के अनुसार इसमें “450 करोड़ रुपये तक का भ्रष्टाचार हो सकता है।” वेस्ट कामेंग जिला पश्चिमी अरुणचल प्रदेश का हिस्सा है जहां से किरेन रिजीजू सांसद हैं। रिपोर्ट जमा करने के बाद गुजरात कैडर के आईपीएस वर्मा को एनईईपीसीओ से “अनाधिकृत अनुपस्थिति” के कारण हटाकर उनका तबादला त्रिपुरा में सीआरपीएफ में कर दिया गया है। हालांकि वर्मा के अनुसार वो इस मामले की जांच के कारण “अनुपस्थित” रहे थे। सीबीआई ने मौके का दो बार औचक निरीक्षण किया है लेकिन अभी तक इस मामले में कोई एफआईआर नहीं दर्ज की गई है।

वर्मा रिपोर्ट के अनुसार परियोजना के ठेकेदार ने बांद के निर्माण के लिए पत्थरों की ढुलाई के मद में जाली बिल और भुगतान से ज्यादा राशि का बिल दिया था। रिपोर्ट के अनुसार न केवल ढुलाई भाड़े मनमाने तरीके से दिखाया गया बल्कि परिवहन से जुड़े दूसरे बिल भी इसी तरह बनाए गए। रिपोर्ट के अनुसार ठेकेदार पटेल इंजीनियरिंग लिमिटेड (पीईएल) द्वारा दिए गए ट्रांसपोर्ट चालान और अन्य दस्तावेज जाली पाए गए। रिपोर्ट के अनुसार कंपनी के दस्तावेज के अनुसार बांध निर्माण के लिए हजारों टन पत्थर पहुंचाने के लिए स्कूटर, मोटरबाइक और कारों का इस्तेमाल किया था। कंपनी द्वारा दिए गए कुछ गाड़ियों के नंबर असल में मौजूद ही नहीं थे। रिपोर्ट के अनुसार कुछ मामलों में एक ही गाड़ी या एक ही ड्राइवर को 70 किलोमीटर की दूरी माल लाने के चालान जमा किया गया है जबकि दो यात्राओं के बीच महज आधे घंटे का अंतर था।

जब वर्मा ने परियोजना के प्रमुख को इन अनियमितता के बारे में सूचित किया तो एनईईपीसीओ ने पीईएल के बकाया बिलों का भुगतान रोक दिया था। इनमें ज्यादातर बिल मई से जुलाई 2015 के बीच के थे। इंडियन एक्सप्रेस को मिले दस्तावेज के अनुसार केंद्रीय गृह राज्य मंत्री किरेन रिजीजू ने चार नवंबर 2015 को ठेकेदार के रुके हुए भगुतान को जारी करने के लिए बिजली मंत्रालय को पत्र लिखा। किरेन रिजीजू के कज़न गोबाई रिजीजू वर्मा से मिलने भी गए थे। गोबाई रिजीजू इस परियोजना के सब-कांट्रैक्टर हैं। रिपोर्ट में वर्मा और गोबाई रिजीजू के बीच 29 दिसंबर 2015 को हुई कथित बातचीत की ऑडियो सीडी भी दी है। कथित सीडी में गोबाई कथित तौर पर वर्मा से बाकी भुगतान को जारी करने का अनुरोध करने के साथ कह रहे हैं, “भैया से आपको जो भी मदद चाहिए होगी मिलेगी।”

बाद में एनईईपीसीओ ने वर्मा की सहमति से पीईएल को रुके हुए भुगतान का एक अंश जारी कर दिया जिसके बाद मार्च 2016 में बांध का निर्माण कार्य दोबारा शुरू हो गया। एनईईपीसीओ के सीएमडी के अनुरोध पर सितंबर 2015 में बांध का काम रुक गया था। वर्मा ने बकाया बिल की 60 प्रतिशत रकम के भुगतान की सहमति दी थी बशर्ते एक बांध का काम पूरा और दूसरे बांध और पावरहाउस का 75 प्रतिशत काम हो गया हो। भुगतान की राशि का निर्धारण वास्तविक और जाली गाड़ी नंबरों से संबंधित बिलों की कुल राशि के आधार पर किया गया। हालांकि सीवीओ ने पूरी जांच के बाद कानूनी कार्रवाई करने की अनुशंसा की है। बिचोम और टेंगा नदियों पर बने एनईईपीसीओ परियोजना के तहत बनने वाले दोनों बांध करीब करीब पूरे होने वाले हैं। इस परियोजना को मंजूरी साल 2005 में मिली थी।

किरेन रिजीजू ने इंडियन एक्सप्रेस से कहा है कि मैंने पटेल इंजीनियरिंग (ठेकेदार) का रुका हुआ भुगतान जारी करने के लिए पत्र लिखा था लेकिन ये बस स्थानीय ठेकेदार की अर्जी को ध्यान में रखते हुए लिखा गया था। मुझे इसमें भ्रष्टाचार के बारे में नहीं पता था। अगर ये भ्रष्टाचार है तो इसकी जांच होनी चाहिए और जो लोग जिम्मेदार हों उन्हें सजा मिलनी चाहिए। मैं भ्रष्टाचार के पूरी तरह खिलाफ हूं।

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