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CJI से बोले मशहूर एक्टिविस्ट- आप निष्पक्ष नहीं, मामले की सुनवाई छोड़ दें, कोर्ट ने खारिज की याचिका

सुनवाई के दौरान सीजेआई ने पूछा 'आपकी शिकायत क्या है? आपको जजों पर भरोसा रखना चाहिए यह सही नहीं कि आप सीजेआई पर सवाल उठाए।

सीजेआई रंजन गोगोई। (एक्सप्रेस फोटोः अमित मेहरा)

सुप्रीम कोर्ट ने मशहूर सामाजिक कार्यकर्ता हर्ष मंदर की उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) जस्टिस रंजन गोगोई को असम के डिटेंशन सेंटर से जुड़े मामले की सुनवाई से अलग रहने का अनुरोध किया था। दरअसल, मंदर ने अपनी याचिका में यह शंका जाहिर की थी कि सीजेआई रंजन गोगोई इस मामले में पक्षपात कर सकते हैं क्योंकि उनका रुझान विदेशी घुसपैठियों को बाहर करने की ओर है। याचिकाकर्ता के इस व्यवहार पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त नाराजगी जताई और कहा कि आप संवैधाविक संस्थानों को कमतर आंक रहे हैं और बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं।

गुरुवार (2 मई 2019) को सीजेआई की अध्यक्षता वाली बेंच में जस्टिस दीपक गुप्ता और जस्टिस संजीव खन्ना भी शामिल थे। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा, “क्या यह आपके व्यवहार का तरीका है। आप ऐक्टिविस्ट हैं, आपको पता है कि आप किस तरह से देश की सेवा कर रहे है? आपने सीजेआई की मंशा पर सवाल उठा दिया? आप पहले जज पर भरोसा करना सीखें। आप देखिए कि आपने किस तरह से संस्थान (जूडिशरी) को नुकसान पहुंचाया है।”

सुनवाई के दौरान सीजेआई ने पूछा ‘आपकी शिकायत क्या है? आपको जजों पर भरोसा रखना चाहिए यह सही नहीं कि आप सीजेआई पर सवाल उठाएं। जज के तौर पर हम मौखिक टिप्पणियां करते हैं इसका मतलब यह नहीं कि उन बातों का कुछ मतलब निकाल लिया जाए।’ जस्टिस गोगोई ने खुद को इस केस से अलग करने की मांग को खारिज करते हुए कहा ‘ऐसा करना संस्थान को बर्बाद करेगा। हम ऐसा नहीं करेंगे। हम किसी को भी इस संस्था को नुकसान पहुंचाने नहीं देंगे।

कोर्ट ने मामले में याचिकाकर्ता का नाम हटाकर लीगल सर्विस अथॉरिटी को पार्टी बना दिया और वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण को कोर्ट सलाहकार नियुक्त कर दिया। प्रशांत भूषण पहले याचिकाकर्ता के वकील रह चुके थे। इससे पहले चीफ जस्टिस ने कहा कि याचिकाकर्ता जो कहना चाहते हैं, खुलकर कहें। तब मंदर ने कहा कि वो चाहते हैं कि इस मामले की सुनवाई से सीजेआई हट जाएं, जिसे कोर्ट ने ठुकरा दिया।

इससे पहले सीजेआई ने असम के मुख्य सचिव को हलफनामा दायर कर यह पूछा था कि विदेशियों को हिरासत केंद्रों से बाहर निकाले जाने के लिए क्या उपाय अपनाएं जा रहे हैं। पीठ ने कहा, ‘हम यह जानना चाहते हैं कि वहां कितने हिरासत केंद्र हैं। हम यह भी जानना चाहते हैं कि वहां कितने लोग बंद हैं और कब से।

बता दें कि हर्ष मंदर ने जब याचिका दायर की थी तो उन्होंने असम के डिटेंशन सेंटर में रह रहे घुसपैठियों की मानवीय उपचार के मुद्दे को उठाया था। बता दें कि डिटेंशन सेंटर में कैद ज्यादात्तर अप्रवासी गैर-कानूनी तरीके से भारत में दाखिल हुए हैं इनमें से कई तो पिछले 10 सालों से कैद में हैं। असम में एनआरसी लागू होने से लगभग 40 लाख लोगों पर अस्तित्व का संकट आ गया है। बहुत से लोगों के पास वैध पहचान पत्र ना होने की वजह से उन्हें डिटेंशन सेंटर में डाला गया है।

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