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CBI पर सीजेआई रंजन गोगोई ने उठाए सवाल, बोले- जब मामले में राजनीतिक रंग नहीं होता, तब अच्छा काम क्यों करती है CBI

मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि कई हाई-प्रोफाइल और राजनीतिक रूप से संवेदनशील मामलों में एजेंसी न्यायिक जांच के मानकों को पूरा नहीं कर पाई है। इसके साथ यह भी सच्चाई है कि यह कमियां कभी-कभी नहीं रही होंगी।

भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) रंजन गोगोई। (Express photo by Praveen Khanna)

भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) रंजन गोगोई ने मंगलवार (13 जुलाई, 2019) को “राजनीतिक रूप से संवेदनशील” मामलों में केंद्रीय जांच एजेंसी (CBI) की प्रभावशीलता और कार्यशैली पर सवाल उठाए। चीफ जस्टिस ने कहा कि यह “संस्थागत आकांक्षाओं के बीच बहुत बड़े बेमल” और “शासन करने वाली राजनीति” को दर्शाता है। गोगोई ने सवाल किया कि ऐसा क्यों होता है कि जब किसी मामले का कोई राजनीतिक रंग नहीं होता, तब सीबीआई अच्छा काम करती है। उन्होंने सीबीआई को नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (CAG) के बराबर एक वैधानिक दर्जा देने का सुझाव दिया।

CJI गोगोई ने यह भी सुझाव दिया कि “पब्लिक ऑर्डर” को इंटरस्टेट क्राइम की जांच के लिए समवर्ती सूची का हिस्सा बनाया जाना चाहिए। पब्लिग ऑर्डर वर्तमान में राज्य सरकारों के अधीन है। विज्ञान भवन में CBI द्वारा आयोजित DP कोहली मेमोरियल लेक्चर में बोलते हुए चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने सीबीआई के कामकाज में राजनीतिक एवं प्रशासनिक हस्तक्षेप पर चिंता जाहिर की। उन्होंने कहा, “ऐसा क्यों होता है जब कोई राजनीतिक रंग न हो तो सीबीआई अच्छा काम करती है।”

मुख्य न्यायाधीश ने कहा, “कई हाई-प्रोफाइल और राजनीतिक रूप से संवेदनशील मामलों में एजेंसी न्यायिक जांच के मानकों को पूरा नहीं कर पाई है। इसके साथ यह भी सच्चाई है कि यह कमियां कभी-कभी नहीं रही होंगी। इस तरह के उदाहरण क्रमवार ढंग से मुद्दों को दर्शाते हैं और संस्थागत आकांक्षाओं, संगठनात्मक बनवाट, कार्य संस्कृति और शासन करने वाली राजनीति के बीच गहरा बेमेल का संकेत देते हैं।”

CJI रंजन गोगोई ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा विनीत नारायण मामले में दिए फैसले द्वारा सीबीआई की अखंडता की रक्षा के लिए जारी दिशा-निर्देश के बारे में भी कहा। उन्होंने कहा कि आम लोगों की धारणा को देखते हुए एजेंसी को अपनी ख्याति के बारे में सोचना होगा। उन्होंने बताया कि लोगों की धारणा और संस्थागत कार्यशैली में अंतर होने का बुरा प्रभाव राष्ट्र की शासन प्रणाली पर पड़ेगा।

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