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छोटा राजन की गिरफ्तारी के पीछे बड़ा राज

दाऊद इब्राहीम की हिट लिस्ट में पहले नंबर रहने वाले, लंबे अरसे से बीमार चल रहे छोटा राजन को भारत लाकर राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल अपना वह मनसूबा पूरा करना चाहते हैं जो वे इंटेलिजेंस ब्यूरो प्रमुख रहते हुए कर पाने में नाकाम रहे थे। उसकी स्वदेश वापसी के साथ ही दाऊद की जिंदगी के लिए खतरा बढ़ गया है।

Author नई दिल्ली | October 27, 2015 9:20 AM
छोटा राजन से बरामद पासपोर्ट।

दाऊद इब्राहीम की हिट लिस्ट में पहले नंबर रहने वाले, लंबे अरसे से बीमार चल रहे छोटा राजन को भारत लाकर राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल अपना वह मनसूबा पूरा करना चाहते हैं जो वे इंटेलिजेंस ब्यूरो प्रमुख रहते हुए कर पाने में नाकाम रहे थे। उसकी स्वदेश वापसी के साथ ही दाऊद की जिंदगी के लिए खतरा बढ़ गया है।

ऑस्ट्रेलिया, इंडोनेशिया के सहयोग से भारत को छोटा राजन को पकड़ने में जो उपलब्धि हासिल हुई है, उसकी असली कहानी कुछ और ही है। कभी दाऊद के दाहिने हाथ रह चुके इस माफिया सरगना के दाऊद से संबंध खराब होने की एक बड़ी वजह 1993 के मुंबई बम विस्फोट थे। इस धमाके के बाद वहां का अंडरवर्ल्ड भी हिंदू-मुसलमान के बीच बंट गया था। राजन के खिलाफ कई गंभीर मामले दर्ज थे और वह भी देश छोड़ कर दुबई भाग गया था। फिर दोनों सरगनाओं में गैंगवार शुरू हो गया। बताते हैं कि उस दौर में छोटा राजन ने खुद को राष्ट्रभक्त करार देते हुए कभी कहा था कि वह देशद्रोही दाऊद को खत्म करके ही दम लेगा।

दाऊद पाकिस्तान में वहां की कुख्यात एजंसी आइएसआइ की छत्रछाया में रह रहा था और उसे मार पाना आसान काम नहीं था। तब भारतीय खुफिया एजंसियों ने छोटा राजन से संपर्क साधा। उसने दाऊद गिरोह के तमाम अपराधियों को निपटाया था। बदले में सन 2000 में बैंकाक में दाऊद ने उस पर हमला करवाया था। हमले में वह गंभीर रूप से घायल हो गया था और एक अस्पताल में भर्ती होना पड़ा था। यह माना जा रहा था कि भारत सरकार उसे यहां ले आएगी क्योंकि 1995 से ही उसके खिलाफ इंटरपोल ने रेड कार्नर नोटिस जारी किया हुआ था।

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लेकिन उन दिनों भारत सरकार ने उसे यहां लाने के लिए कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई। फिर अचानक वह अस्पताल की सातवीं मंजिल पर स्थित अपने कमरे से कड़ी सुरक्षा के बीच फरार हो गया। फरार होने के बाद उसने कहा कि वह दाऊद को निपटाकर ही दम लेगा।

हिंदुत्व की पैरोकार शिवसेना ने ‘सामना’ में उसकी इस देशभक्ति की तारीफ की। इस बीच वह आॅस्ट्रेलिया चला गया। राजग की पिछली सरकार हर कीमत पर दाऊद को मारना चाहती थी। इंटेलीजेंस ब्यूरो के तत्कालीन प्रमुख अजित डोभाल ने इसमें खासी रुचि दिखाई थी। उन्होंने राजन से संपर्क साधा। लेकिन जब तक सारी तैयारी हुई, वे रिटायर हो गए। हालांकि उन्होंने प्रयास नहीं छोड़ा।

उन्होंने छोटा राजन के दो शार्प शूटरों विक्की मल्होत्रा व फरीद तनशा के फर्जी पासपोर्ट तैयार करवाए। योजना यह थी कि दाऊद की बेटी माहरूफ , जिसकी शादी पाकिस्तानी क्रिकेटर जावेद मियांदाद के बेटे जुनेद से हुई थी, के दुबई में होने वाले रिसेप्शन में दाऊद की हत्या कर दी जाएगी। यह रिसेप्शन 23 जुलाई 2008 को वहां के ग्रैंड हयात होटल में होना था।

उन्होंने इन दोनों को दिल्ली के अशोक  होटल में बुलवाया और उन्हें सब कुछ समझा रहे थे कि तभी होटल के कमरे पर मुंबई पुलिस की स्पेशल ब्रांच का छापा पड़ा और उसने लाख समझाने के बावजूद न केवल इन दोनों को गिरफ्तार कर लिया बल्कि चंद मिनटों के अंदर मुंबई में इस गिरफ्तारी की सूचना भी प्रेस को लीक कर दी गई। इतना जरूर हुआ कि डोभाल का नाम कहीं नहीं आया। तब यह माना गया था कि दाऊद ने ही मुंबई पुलिस में अपने लोगों को यह खबर देकर इस अभियान में पलीता लगा दिया था।

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फिलहाल छोटा राजन काफी बीमार चल रहा है। जुलाई माह में भारतीय गुप्तचर एजंसियों ने दाऊद के करीबी छोटा शकील को उसके गैंग के एक आदमी से यह पूछते हुए सुना कि आॅस्ट्रेलिया में उसका पता क्या है। वह उसे मारना चाहता था। उसने प्राप्त जानकारी के आधार पर वहां के न्यू कैसल होटल पर हमला किया, पर तब तक राजन वहां से फरार हो चुका था। भारत व इंडोनेशिया के बीच प्रत्यर्पण संधि न होने के कारण उसे वहां से निर्वासित किया जाएगा।

सूत्रों के मुताबिक, वह भारत में ज्यादा सुरक्षित रहेगा। संयोग से अब अजित डोभाल राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बन चुके हैं व केंद्र में एक बार फिर राजग की सरकार है। उसके जरिए उनकी दाऊद को निपटाने का तमन्ना पूरी हो सकेगी। वैसे भी राजनीतिक दृष्टि से छोटा राजन का काफी महत्त्व है क्योंकि वह अक्सर यह कहता आया है कि वह उन नेताओं के नामों का खुलासा कर सकता है जो कि दाऊद के करीबी रहे हैं।

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