Chhattisgarh tragedy: Even after deaths, 26 more tubectomies were done in one hour at another camp - Jansatta
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नसबंदी मामला: एक और शिविर, एक घंटे में 26 नसबंदी

रायपुर / बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में नसबंदी के बाद मरने वाली महिलाओं की संख्या बढ़कर 13 हो गई है। जिले के अन्य नसबंदी शिविरों की भी महिलाओं की हालत बिगड़ने की जानकारी मिली है। इस बीच सूत्रों ने बताया है कि इतवार को पेंडारी (तखतपुर) में ऑपरेशन से कई महिलाओं की मौत के […]

Author , November 13, 2014 8:41 AM
एक और शिविर, एक घंटे में 26 नसबंदी

रायपुर / बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में नसबंदी के बाद मरने वाली महिलाओं की संख्या बढ़कर 13 हो गई है। जिले के अन्य नसबंदी शिविरों की भी महिलाओं की हालत बिगड़ने की जानकारी मिली है। इस बीच सूत्रों ने बताया है कि इतवार को पेंडारी (तखतपुर) में ऑपरेशन से कई महिलाओं की मौत के बाद गुरैला अस्पताल में लगे अन्य शिविर में सोमवार को एक घंटे के भीतर 26 महिलाओं की नसबंदी की गई। तखतपुर में जहां पांच घंटे के भीतर 83 महिलाओं की नसबंदी की गई, वहीं गुरैला में हर दो मिनट बाद एक नसबंदी हुई और 26 आॅपरेशन किए गए।

बुधवार को एक और महिला की मौत हुई, जबकि 20 अन्य की हालत अब भी बिगड़ी है। बुधवार को 15 अस्वस्थ महिलाओं को बिलासपुर मुख्यालय लाया गया। जिस महिला की मौत हुई है, उसका नाम चैती बाई है, जो बैगा आदिवासी समुदाय से है। यह संरक्षित जनजाति है। राज्य सरकार ने इस जनजाति के सदस्यों की नसबंदी पर पाबंदी लगा रखी है। उनके कल्याण के लिए सरकार ने कई कल्याणकारी योजनाएं चला रखी हैं। बैगा जनजाति की एक और महिला मंगली बाई की हालत भी चिंताजनक बताई जा रही है। उधर राज्य शासन ने नसबंदी शिविर में इस्तेमाल की गई छह संदिग्ध दवाओं की बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया है। बताते हैं कि इन दवाओं के कारण महिलाओं की हालत बिगड़ी थी। उच्च न्यायालय ने इस मामले में दस दिन के भीतर रिपोर्ट देने को कहा है।

इस बीच बिलासपुर संभाग के आयुक्त सोनमणि बोरा ने बताया कि जिले के पेंडारी गांव में हुए नसबंदी आॅपरेशन के बाद अपोलो अस्पताल में भर्ती एक महिला शिवकुमारी की बुधवार को मौत हो गई। बोरा ने बताया कि राज्य के पेंडारी गांव के शिविर में 83 महिलाओं की नसबंदी की गई थी जिनमेंं से 12 महिलाओं की मौत हो गई है। वहीं जिले के पेंडरा, गुरैला और मारवाही ब्लाक में 10 नवंबर को 56 महिलाओं की नबसंदी की गई थी जिसमें से एक चैती बाई की बुधवार को मौत हो गई।

उन्होंने बताया कि 10 नवंबर को शिविर के दौरान जिन 56 महिलाओं की नसबंदी की गई थी उनमें से 20 महिलाओं को बिलासपुर जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। हालांकि 10 नवंबर को नसंबदी कराने वाली सभी महिलाओं को अस्पताल बुला लिया गया है और सभी की जांच की जा रही है। जांच समिति में शामिल एक अधिकारी ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि अभी तक मिली जानकारी के अनुसार महिलाओं को आॅपरेशन के बाद दी गई दवाओं की वजह से समस्याएं आई है। हालांकि अभी किसी भी नतीजे में पहुंचना जल्दबाजी होगी।

अधिकारी ने बताया कि इस घटना में मृत महिलाओं का पोस्टमार्टम कराया गया है और कई तरह से जांच की गई है। अभी सभी जांच की रिपोर्ट नहीं मिली है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही इस बाबत सही जानकारी मिल सकेगी। हालांकि अभी तक मिली जानकारी के मुताबिक महिलाओं को आॅपरेशन के बाद आईब्रुफेन और सिप्रोसिन दिया गया था। इन दोनों दवाओं से नसबंदी के बाद महिलाओं को तकलीफ हो सकती है। अधिकारी ने बताया कि राज्य में अप्रैल माह से अब तक 20 हजार महिलाओं का और एक हजार पुरुषों का नसबंदी आॅपरेशन किया गया है।

नसबंदी के बाद महिलाओं की मौत को देखते हुए राज्य शासन ने नई दिल्ली एम्स के चिकित्सकों की सेवाएं लेने का फैसला किया। एम्स के सात डॉक्टरों की टीम ने बुधवार को बिलासपुर जिला मुख्यालय का दौरा किया। राज्य शासन ने घटना की उच्चस्तरीय जांच के लिए समिति गठित की है। इधर इस घटना के बाद राज्य के मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने मुख्यमंत्री रमन सिंह और स्वास्थ्य मंत्री अमर अग्रवाल के इस्तीफे की मांग की है।

मुख्यमंत्री रमन सिंह ने नसबंदी शिविर में आॅपरेशन के बाद बीमार हुई महिलाओं के बेहतर इलाज की व्यवस्था के बारे में बुधवार सुबह यहां अपने निवास कार्यालय में एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक ली। बैठक के दौरान एम्स की टीम के प्रमुख चिकित्सा विशेषज्ञ से टेलीफोन पर चर्चा की। राज्य के वरिष्ठ अधिकारियों ने यह जानकारी देते हुए बताया कि चिकित्सकों से बातचीत के बाद सिंह ने राज्य में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को एम्स की टीम के लिए बिलासपुर में सभी आवश्यक व्यवस्था करने और महिलाओं के स्वास्थ्य पर लगातार नजर रखने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि बीमार महिलाओं का बेहतर इलाज राज्य शासन द्वारा करवाया जाएगा।

एम्स के एनेस्थीसिया विभाग के प्रोफेसर डॉक्टर अंजन त्रिखा ने संवाददाताओं से बातचीत के दौरान बताया कि जिला मुख्यालय के विभिन्न अस्पतालों में दाखिल पीड़ित महिलाओं का उचित ढंग से उपचार किया जा रहा है।

सूत्रों ने बताया कि राज्य शासन ने नसबंदी शिविर में इस्तेमाल की गई छह संदिग्ध दवाओं की बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया है। आधिकारिक सूत्रों ने जानकारी दी किराज्य सरकार ने बिलासपुर जिले के पेंडारी (तखतपुर) के नसबंदी शिविर में महिलाओं के ऑपरेशन के दौरान इस्तेमाल की गई छह विभिन्न औषधियों की राज्य के मेडिकल स्टोर्स में बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया है।

नियंत्रक, खाद्य व औषधि प्रशासन छत्तीसगढ़ से मिली जानकारी के अनुसार, औषधियों की गुणवत्ता संदिग्ध होने के कारण औषध निरीक्षक बिलासपुर ने इन दवाओं के नमूने लिए हैं। इन नमूनों को जांच और विश्लेषण के लिए कोलकाता स्थित केंद्रीय औषध परीक्षण प्रयोगशाला को भेजा जा रहा है। नियंत्रक खाद्य और औषधि प्रशासन ने बैच नंबर और निर्माताओं के नाम सहित इन दवाओं की सूची जारी की है।

 

 

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