छत्तीसगढ़ के स्कूलों में मिड डे मील बनाने वाले रसोइयों पर राज्य सरकार ने मुकदमा दर्ज कर दिया है। मुकदमा दर्ज करने के पीछे वजह यह है कि लगभग 500-600 रसोइयों ने न्यू रायपुर में अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन किया था लेकिन पुलिस ने उन पर सड़क पर धरना देने और ट्रैफिक जाम करने के आरोप में मामला दर्ज कर दिया।
रसोइयों की मांग है कि उनकी हर दिन की मजदूरी को 66 रुपये से बढ़कर कम से कम 261 रुपये किया जाए।
यह सभी रसोइये प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण (पीएम-पोषण) मध्याह्न भोजन योजना के तहत काम करते हैं। वे पिछले 34 दिनों से नया रायपुर के तूता मैदान में अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। यह प्रदर्शन छत्तीसगढ़ स्कूल मध्यान्ह भोजन रसोईया संयुक्त संघ के बैनर तले किया जा रहा है।
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संगठन के सचिव महाराज बघेल कहते हैं, ‘हम शिक्षा मंत्री से मिले और हमने मांग की थी कि हमारी मजदूरी प्रतिदिन 440 रुपये कर दी जाए लेकिन उन्होंने कहा कि वह मजदूरी में सिर्फ 500 रुपये प्रति महीने ही बढ़ाएंगे। हमने इसे मानने से इनकार कर दिया। फिर हमने कहा कि हमें कम से कम 261 रुपये हर दिन चाहिए लेकिन सरकार ने हमारी इस मांग को भी ठुकरा दिया।’
बघेल कहते हैं, ‘वे हमारी हालत क्यों नहीं समझते? हम हर दिन चार से पांच घंटे काम करते हैं और 66 रुपये बहुत कम हैं। वे पिछले कई सालों में बढ़ी महंगाई के बराबर भी वेतन नहीं दे रहे हैं।’
संगठन के अध्यक्ष रामराज कश्यप कहते हैं, ‘हमने किसी सार्वजनिक संपत्ति को छुआ तक नहीं। हां, हमने सड़क पर जाम जरूर लगाया था। हमने कोई टकड़ा नहीं किया और उन्होंने हम पर दंगा करने की धारा लगा दी है।’
गुरुवार रात को सैकड़ों रसोइये प्रदर्शन स्थल से निकलकर मंत्रालय की ओर बढ़ गए। पुलिस ने उन्हें रोकने की कोशिश की लेकिन वे सड़क पर ही बैठ गए। पुलिस का कहना है कि हमने प्रदर्शनकारियों से मुख्य सड़क खाली करने को कहा लेकिन वे नहीं माने। इसके बाद उनके खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया लेकिन अभी तक किसी को गिरफ्तार नहीं किया गया है।
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