गोवर्धन पूजा पर छत्तीसगढ़ के सीएम पर ‘सोटे से वार’, जानें क्या है यहां की परंपरा

छत्तीसगढ़ में दिवाली के दूसरे दिन गोवर्धन पूजा के अवसर पर गौरा गौरी की पूजा की जाती है। इस दौरान जब गौरा गौरी की झांकी निकाली जाती है तो सोटा सहने की परंपरा है।

छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में गोवर्धन पूजा के अवसर पर सोटे का वार सहते सीएम बघेल (फोटो: ट्विटर/ bhupeshbaghel)

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल शुकवार को दीपावली के दूसरे गोवर्धन पूजा के दौरान मनाए जाने वाले गौरा-गौरी उत्सव में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने दुर्ग जिले के जंजगिरी गांव में कुश से बने सोटे का वार सहा। सोटे का वार सहने के बाद भी सीएम मुस्कुराते रहे। 

अधिकारियों ने बताया कि सीएम बघेल राज्य के कल्याण और विघ्नों के नाश की कामना की पूर्ति के लिए प्रति वर्ष कुश से बने सोटे का प्रहार सहते हैं। इसलिए वे शुक्रवार को जंजगिरी गांव में गौरा-गौरी पूजन में शामिल हुए तथा परंपरा के अनुसार उन्होंने अपने हाथ पर सोटे का वार सहा। गांव के ही बीरेंद्र ठाकुर नाम के एक शख्स ने उन पर सोटे से प्रहार किया।

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सोटे के वार सहने का वीडियो अपने ट्विटर अकाउंट भी शेयर किया है। वीडियो ट्वीट करते हुए उन्होंने लिखा कि प्रदेश की मंगल कामना और शुभ हेतु आज जंजगिरी में सोटा प्रहार सहने की परंपरा निभाई। सभी विघ्नों का नाश हो। ट्विटर पर शेयर किए गए वीडियो में साफ़ देखा जा सकता है कि मुख्यमंत्री बघेल सोटा मारने वाले व्यक्ति के सामने खड़े हैं। वह व्यक्ति उनके हाथ के ऊपर सोटे से लगातार वार करता है। इसके बाद बघेल सोटा मारने वाले शख्स को गले लगा लेते हैं।  

समाचार एजेंसी भाषा की रिपोर्ट के अनुसार मुख्यमंत्री ने इस रस्म के ​दौरान ग्रामीणों से कहा कि हर साल गांव के बुजुर्ग भरोसा ठाकुर यह प्रहार करते थे और उनके निधन के बाद अब यह परंपरा उनके पुत्र बीरेंद्र ठाकुर निभा रहे हैं। बघेल ने यह भी कहा कि गोवर्धन पूजा गोवंश के प्रति हमारी कृतज्ञता का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि गोवंश जितना समृद्ध होगा, उतनी ही हमारी तरक्की होगी।

इसके अलावा भूपेश बघेल ने यह भी कहा कि हमारे पूर्वजों ने बहुत सुंदर छोटी-छोटी परंपराओं का सृजन किया और इन परंपराओं के माध्यम से हमारे जीवन में उल्लास भरता है। आज आप सबके बीच पहुंचकर और इस हर्षित जनसमूह को देखकर मेरा मन भी हर्ष से भर गया है। गोवर्धन पूजा और गौरा-गौरी पूजा मिट्टी के प्रति गहरे अनुराग का उत्सव है। आप लोगों के उल्लास से भरे चेहरे देखकर अनुभव होता है कि हमारा प्रदेश सांस्कृतिक रूप से कितना समृद्ध है और हम इस सांस्कृतिक समृद्धि को किस तरह धरोहर के रूप में सहेजे हुए हैं।

दरअसल छत्तीसगढ़ में दिवाली के दूसरे दिन गोवर्धन पूजा के अवसर पर गौरा गौरी की पूजा की जाती है। इस दौरान जब गौरा गौरी की झांकी निकाली जाती है तो सोटा सहने की परंपरा है। मान्यता है कि सोटा सहने से किसी भी तरह की विघ्न और समस्या दूर हो जाती है। साथ ही यह सुख और समृद्धि लेकर आता है। इसलिए सोटा खाने को लेकर लोगों में उत्सुकता बनी रहती है। (भाषा इनपुट्स के साथ)

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