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अडानी को मिले माइनिंग कॉन्ट्रैक्ट के खिलाफ विरोध प्रदर्शन, छत्तीसगढ़ सरकार ने खनन पर लगाई रोक

खनन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे टिकनपल गांव के जनपद सदस्य राजू भास्कर ने खनन की जाने वाली पहाड़ी की ओर इशारा कर बताया कि 'उनके लिए वह पहाड़ी डिपोजिट 13 है, जबकि हमारे लिए वह पिथोरमेता हैं, जिन्हें पिथोर रानी कहा जाता है। वह आदिवासियों की देवी हैं।'

Author नई दिल्ली | June 12, 2019 9:01 AM
खनन का विरोध प्रदर्शन कर रहे आदिवासी समुदाय के लोग। (express image)

छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा में अडानी ग्रुप को मिले खनन के कॉन्ट्रैक्ट के खिलाफ स्थानीय आदिवासी लोगों का गुस्सा फूट पड़ा है। लोगों ने इसके खिलाफ विरोध प्रदर्शन शुरु कर दिया है। लोगों को बढ़ते विरोध के चलते छत्तीसगढ़ सरकार ने फिलहाल खनन के काम पर रोक लगा दी है। खबर के अनुसार, अडानी ग्रुप की कंपनी अडानी इंटरप्राइजेज लिमिटेड को दंतेवाड़ा के बैलादिला की पहाड़ियों में खनन का कॉन्ट्रैक्ट मिला था। बैलादिला की पहाड़ियों में बड़ी संख्या में लौह अयस्क होने की बात कही जा रही है। लेकिन छत्तीसगढ़ के आदिवासी समुदाय के लिए बैलादिला की पहाड़ियां आस्था का विषय हैं और आदिवासी समाज इन पहाड़ियों की पूजा करता है। यही वजह है कि आदिवासी समुदाय के लोगों ने खनन का विरोध शुरु कर दिया है।

आदिवासियों ने किरानदुल में स्थित NMDC लिमिटेड के परिसर में डेरा डाल दिया है और हजारों की संख्या में आदिवासी लोग यहां जुट रहे हैं। विरोध प्रदर्शन संयुक्त पंचायत जन संघर्ष समिति के बैनर तले किया जा रहा है, जिसमें दंतेवाड़ा, सुकमा और बीजापुर सहित कई जगहों से लोग प्रदर्शन स्थल पर पहुंच रहे हैं। द इंडियन एक्सप्रेस की एक खबर के अनुसार, लोग अपने साथ राशन भी ला रहे हैं, जिससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि लोगों की योजना लंबे समय तक प्रदर्शन करने की है।

मंगलवार को बस्तर से कांग्रेस सांसद दीपक बैज, पूर्व केन्द्रीय मंत्री अरविंद नेताम के नेतृत्व में स्थानीय विधायक और सर्व आदिवासी समाज के सदस्यों ने सीएम भूपेश बघेल से मुलाकात की। मुलाकात के बाद भूपेश बघेल ने बैलादिला की पहाड़ियों में खनन के काम पर फिलहाल रोक लगा दी है। सीएम भूपेश बघेल ने कहा कि ‘खनन के काम को साल 2014 में ग्राम सभा से मिले अनापत्ति प्रमाण पत्र की भी जांच करायी जाएगी।’ द इंडियन एक्सप्रेस ने धरना स्थल का दौरा किया और वहां मौजूद आदिवासी लोगों से बात की। खनन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे टिकनपल गांव के जनपद सदस्य राजू भास्कर ने खनन की जाने वाली पहाड़ी की ओर इशारा कर बताया कि ‘उनके लिए वह पहाड़ी डिपोजिट 13 है, जबकि हमारे लिए वह पिथोरमेता हैं, जिन्हें पिथोर रानी कहा जाता है। वह आदिवासियों की देवी हैं।’

बैलादिला की पहाड़ियों में लंबे समय से खनन का काम किया जा रहा है, लेकिन डिपोजिट 13 में कई मिलियन टन लौह अयस्क होने की संभावना है। यही वजह है कि इस पहाड़ी को NCL ने खनन के लिए विकसित किया है। NCL केन्द्र की NMDC लिमिटेड और राज्य की CMDC लिमिटेड का संयुक्त उपक्रम है। खनन के लिए विकसित करने के बाद NCL ने खनन का ठेका अडानी इंटरप्राइजेज लिमिटेड को दे दिया। लेकिन स्थानीय लोग इसे पूजनीय बताते हुए इसके विरोध में खड़े हो गए हैं। पहाड़ी को ग्राम सभा से अनापत्ति पत्र मिलने पर भी लोग सवाल खड़े कर रहे हैं और इसे फर्जी बता रहे हैं। फिलहाल सरकार ने इसकी जांच शुरु करा दी है। वहीं अडाली इंटरप्राइजेज लिमिटेड का कहना है कि अनापत्ति पत्र लेने में उनकी कोई भूमिका नहीं है। कंपनी ने बीते साल दिसंबर में खनन का ठेका लिया है।

वहीं राज्य में अब यह मामला लोगों की आस्था से जुड़ा होने के साथ ही राजनैतिक भी बनता जा रहा है। राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी भी हाल ही में धरना स्थल पहुंचे थे और आदिवासियों के प्रति अपना समर्थन जताया था। वहीं पुलिस अधिकारियों का कहना है कि माओवादी भी इस मुद्दे पर स्थानीय लोगों को भड़काने में लगे हैं। वहीं खनन के काम पर पूरी तरह से रोक लगाने के सवाल पर छत्तीसगढ़ के सीएम भूपेश बघेल ने बताया कि NCL में NMDC के 51 प्रतिशत और CMDC के 49 प्रतिशत शेयर हैं। इसलिए खनन पर पूरी तरह से रोक लगाने का फैसला ये दोनों कंपनियां मिलकर ही कर सकती हैं।

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