गृह मंत्री अमित शाह ने 31 मार्च 2026 माओवादियों के खात्मे की आखिरी डेडलाइन दी है। पिछले कुछ महीनों से लगातार कई बड़े माओवादियों को मार गिराया गया है जबकि सैकड़ो की संख्या में सरेंडर किया है। इस बीच सुकमा और बीजापुर में 51 माओवादियों ने सरेंडर कर दिया। अधिकारियों ने बताया कि सरेंडर करने वालों में 24 महिलाएं शामिल थीं और जिन पर कुल 1.61 करोड़ रुपये का इनाम था।
2400 से ज़्यादा माओवादी कैडर छोड़ चुके हैं संगठन
सरेंडर के बाद बस्तर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक सुंदरराज पी. ने कहा, “पिछले दो सालों में 2,400 से ज़्यादा माओवादी कैडर संगठन छोड़ चुके हैं। प्रशासन सभी इच्छुक कैडरों को सम्मानजनक पुनर्वास के लिए सहायता देने के लिए प्रतिबद्ध है।”
केंद्र सरकार की माओवादियों को खत्म करने की मार्च 2026 की समयसीमा करीब आ रही है। बता दें कि हाल ही में अबूझमाड़ में एक मुठभेड़ में एक नक्सली नेता एल प्रभाकर राव और छह अन्य मारे गए थे। सुकमा में 21 कैडरों ने (जिनमें 14 महिलाएं शामिल थीं और जिन पर 76 लाख रुपये का इनाम था) 14 हथियारों के साथ सरेंडर किया। इनमें 120 राउंड वाली तीन AK-47 राइफलें, 40 राउंड वाली दो SLR राइफलें, 50 राउंड वाली INSAS राइफलें, पांच सिंगल-शॉट बंदूकें, 20 राउंड वाले तीन बैरल ग्रेनेड लॉन्चर (BGL), 10 जिलेटिन स्टिक, तार और 20 डेटोनेटर शामिल थे।
सुकमा के पुलिस अधीक्षक किरण चव्हाण ने कहा, “स्थानीय निवासियों ने हमें नक्सली कैडरों से संपर्क करने और सरेंडर कराने में मदद की। 12 कैडर छत्तीसगढ़ के थे लेकिन ओडिशा में सक्रिय थे। सुकमा में मुश्किल से 20-25 सशस्त्र कैडर बचे हैं और हम उनसे मुख्यधारा में लौटने की अपील करते हैं।”
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बीजापुर के पुलिस अधीक्षक ने क्या कहा?
बीजापुर के पुलिस अधीक्षक (SP) जितेंद्र यादव ने कहा, “30 माओवादियों ने (जिनमें 20 महिलाएं शामिल थीं और जिन पर कुल 85 लाख रुपये का इनाम था) हिंसक विचारधारा से खुद को अलग कर लिया और शांति का रास्ता चुना।” सरेंडर करने वाले प्रत्येक नक्सली को तत्काल वित्तीय सहायता के रूप में 50,000 रुपये मिलेंगे और उन पर घोषित इनाम की राशि भी दी जाएगी। सरेंडर किए गए हथियारों के लिए अतिरिक्त प्रोत्साहन दिया जाएगा, जिसमें AK-47 राइफल लौटाने के लिए 4 लाख रुपये शामिल हैं।
मार्च 2026 है डेडलाइन
2024 में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने नक्सली विद्रोह को खत्म करने के लिए मार्च 2026 की समय सीमा तय की थी। हालांकि पिछले दो सालों में छत्तीसगढ़ पुलिस ने सेंट्रल फोर्स के साथ मिलकर सभी सीनियर माओवादी नेताओं को मार गिराया है या उनसे सरेंडर करवाया है, लेकिन दो नेता (दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी (DKSZC) के सदस्य पापा राव और सेंट्रल कमेटी के सदस्य मल्लरजी रेड्डी उर्फ संग्राम) अभी भी एक्टिव हैं।
फोर्स के लिए एक लगातार चिंता का विषय पीपल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (PLGA) की बटालियन 1 है, जो बैन कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (माओवादी) की हथियारबंद विंग है। छोटे-छोटे ग्रुप में बंटने के बावजूद यह अभी भी एक्टिव है। इसके लंबे समय के कमांडर माडवी हिडमा पिछले साल नवंबर में आंध्र प्रदेश में एक मुठभेड़ में मारे गए थे, जबकि उनके उत्तराधिकारी बरसे देवा ने इस साल जनवरी में तेलंगाना में सरेंडर कर दिया था। पढ़ें छत्तीसगढ़ में सुरक्षा बलों ने 14 नक्सलियों को मार गिराया
