परीक्षाओं में नकल करने के अजीबोगरीब तरीकों की खबरें यूं तो कई बार सामने आती रहती हैं। लेकिन बहुत कम बार ऐसा होता है कि नकल के तरीके सुर्खियां बन जाएं और पूरी शिक्षा व्यवस्था पर ही सवाल खड़े कर दें। इस बार कुछ ऐसा ही गुजरात के वीर नर्मद दक्षिण गुजरात विश्वविद्यालय (VNSGU) में हुआ जहां इस साल की परीक्षाएं सिर्फ उत्तर पुस्तिकाओं तक सीमित नहीं रहीं। परीक्षाओं के बीच शिक्षा व्यवस्था के सामने इस विश्वविद्यालय ने एक गंभीर सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या विद्यार्थी सीखने के लिए पढ़ रहे हैं या सिर्फ पास होने के लिए?
प्रभारी रजिस्ट्रार और परीक्षा नियंत्रक ए. वी. धाडुक ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया, ”परंपरा से हटकर गुजरात के इस विश्वविद्यालय ने मार्च में हुई अपनी मेडिकल परीक्षाओं में नकल करते पकड़े गए लगभग 400 छात्रों को दंडित ना करने का फैसला लिया है। इसके बजाय, वीर नर्मद दक्षिण गुजरात विश्वविद्यालय ने छात्रों को कदाचार जांच समिति (malpractices inquiry committee) के सामने पेश करेगा। विश्वविद्यालय यह जानना चाहता है कि उन्होंने नकल क्यों की और फिर उन्हें काउंसलिंग के लिए भेजेगा।”
ChatGPT से नकल करने की कोशिश
परीक्षा के दौरान नकल के कई चौंकाने वाले तरीके सामने आए। कुछ छात्रों ने अपनी उत्तर पुस्तिकाओं में पैसे रखकर परीक्षकों से ‘पास’ करने की गुहार लगाई तो कुछ मोबाइल फोन छिपाकर लाए और ChatGPT का इस्तेमाल करके सवाल हल करने की कोशिश की। इसके अलावा, शरीर पर नोट्स लिखना, रूमाल और बेंच पर जानकारी छिपाना जैसी पुरानी तरकीबें भी देखने को मिलीं।
इस पूरे घटनाक्रम में लगभग 400 छात्रों को नकल करते हुए पकड़ा गया। ये छात्र अलग-अलग पाठ्यक्रमों जैसे अंडरग्रेजुएट, पोस्टग्रेजुएट, मेडिकल और पैरामेडिकल से जुड़े थे। इनमें से 226 छात्रों को अनुशासन समिति के समक्ष पेश होने के लिए कहा गया। जांच के बाद 14 छात्रों को विशेष रूप से काउंसलिंग के लिए चुना गया।
विश्वविद्यालय ने इस पूरी प्रक्रिया को ‘Education With Understanding’ नाम दिया है। इसका उद्देश्य सिर्फ सजा देना नहीं बल्कि छात्रों को उनकी गलतियों का अहसास कराना और उन्हें सही दिशा में मार्गदर्शन देना है।
विश्वविद्यालय द्वारा बनाई गई बोर्ड मैनेजमेंट कमेटी में पांच सदस्य हैं जिनमें एग्जिक्युटिव काउंसिल मेंबर, डीन, गुजरात हाई कोर्ट के एक वरिष्ठ अधिवक्ता और VNSGU के परीक्षा नियंत्रक शामिल हैं। सोमवार और मंगलवार को हुई सुनवाई में 153 छात्र इस कमेटी के सामने हाज़िर हुए।
सूत्रों ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि 94 छात्र नकल करने के लिए पर्चियों (चिट्स) का इस्तेमाल करते पकड़े गए जबकि 45 छात्रों के पास पर्चियां मिलीं। 21 छात्र रूलर, रबर और हॉल टिकट पर लिखे नोट्स से नकल करते पाए गए वहीं 17 ने अपने हाथों और पैरों पर उत्तर लिख रखे थे। 15 छात्रों ने रूमाल, कपड़ों और बेंचों पर उत्तर लिखकर नकल की।
नकल करने के अलग-अलग तरीके
11 छात्र कैलकुलेटर और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसेज का इस्तेमाल करते पकड़े गए। छह छात्रों ने ChatGPT का इस्तेमाल करके उत्तर तैयार किए और तीन छात्रों ने अपनी उत्तर पुस्तिकाओं में करेंसी नोट रखकर परीक्षकों से उन्हें ‘पास’ करने का अनुरोध किया।
2024 में इसी विश्वविद्यालय में कम से कम 130 छात्र नकल करते पकड़े गए थे। जिस छात्र ने 500 रुपये का नोट उत्तर पुस्तिका में रखा था, उस पर 2500 रुपये का जुर्माना लगाया गया और उसे छह महीने के लिए परीक्षा देने से प्रतिबंधित कर दिया गया।
धाड़ुक ने कहा, ”हमने छात्रों को बुलाकर उनकी बात सुनी और पूछा कि उन्होंने ऐसा क्यों किया। छात्रों ने हमारे सामने अपनी गलती स्वीकार की। हमने नकल करते पकड़े गए 14 छात्रों को मनोवैज्ञानिक परामर्श लेने की भी सलाह दी है। पिछले साल 600 से अधिक छात्र नकल करते पकड़े गए थे और इस साल यह संख्या घटकर लगभग 400 रह गई है।”
उन्होंने आगे बताया, ”सुनवाई का अगला सत्र अगले सप्ताह आयोजित किया जाएगा। तब बाकी छात्रों को बुलाकर उनकी बात सुनी जाएगी। कॉलेज हमें विश्वविद्यालय परीक्षाओं में नकल करते पकड़े गए छात्रों की सूची देता है और उसी आधार पर हम उन्हें बुलाते हैं। हम हर छात्र की व्यक्तिगत रूप से सुनवाई करते हैं ताकि उनकी पहचान गुप्त रहे।”
