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TRP केस: हाई कोर्ट में अर्नब गोस्वामी के वकील ने क‍िया वाजे का ज‍िक्र

अर्नब के वकील अशोक मुंडेगी ने बॉम्बे हाईकोर्ट में कहा कि टीआरएम स्कैम में दायर चार्जशीट कुछ और नहीं बल्कि रिपब्लिक टीवी के एडिटर-इन-चीफ अर्नब गोस्वामी को निशाना बनाने की कोशिश है।

Designer Anvay Naik suicide, Arnab Goswami, republic Tv, abetment to suicide caseबॉम्बे हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान गोस्वामी के वकील ने सचिन वाजे का जिक्र किया।

टेलीविज़न रेटिंग पॉइंट्स (TRP) में धांधली के मामले पर सुनवाई के दौरान रिपब्लिक टीवी के एडिटर-इन-चीफ अर्नब गोस्वामी के वकील ने मुंबई पुलिस के असिस्टेंड इंस्पेक्टर सचिन वाजे का जिक्र किया। वाजे को मुंबई पुलिस ने सस्पैंड कर दिया है और उनपर उद्योगपति मुकेश अंबानी के घर एंटीलिया के बाहर विस्फोटकों भरी एक एसयूवी गाड़ी पार्क करने का आरोप है।

अर्नब के वकील अशोक मुंडेगी ने बॉम्बे हाईकोर्ट में कहा कि टीआरएम स्कैम में दायर चार्जशीट कुछ और नहीं बल्कि रिपब्लिक टीवी के एडिटर-इन-चीफ अर्नब गोस्वामी को निशाना बनाने की कोशिश है। गोस्वामी के वकील मुंडर्गी ने जस्टिस एस के शिंदे और मनीष पिटले की पीठ का ध्यान इस तथ्य की ओर आकर्षित किया कि निलंबित एपीआई सचिन वेज जांच के प्रभारी थे। उन्होंने कहा कि पहले मुखबिर हंसा रिसर्च समूह ने जून 2020 से धांधली के बारे में पता किया था और इसकी जानकारी वेज और एक अन्य अधिकारी ने दी थी।

मुंडेगी ने कहा “लेकिन एफ़आईआर 6 अक्टूबर, 2020 को कांदिवली पुलिस स्टेशन में की गई। जिसमें दावा किया गया था कि पुलिस को हंसा रिसर्च समूह के एक कर्मचारी से गुप्त सूचना मिली मुंडेगी ने यह भी कहा कि एफ़आईआर दर्ज होने के दो दिन बाद, मुंबई पुलिस आयुक्त ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की, जिसमें ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल (BARC) की एक रिपोर्ट के आधार पर रिपब्लिक टीवी के शामिल होने का दावा किया गया था।

वकील ने कहा कि BARC ने बाद में लिखित रूप से स्पष्ट किया कि ऐसी कोई भी जांच रिपब्लिक टीवी के खिलाफ नहीं थी। मंगलवार को बॉम्बे हाई कोर्ट ने यह जानना चाहा कि मुंबई पुलिस को टीआरपी घोटाले को लेकर पिछले साल प्रेस कॉन्फ्रेंस करने के लिए किस चीज ने प्रेरित किया था।

न्यायमूर्ति एस.एस. शिंदे और न्यायमूर्ति मनीष पिटले की पीठ ने सवाल किया, ‘क्या प्रेस से संवाद करना पुलिस का दायित्व है? पुलिस आयुक्त को प्रेस से बातचीत क्यों करनी पड़ी थी।’ पीठ ने एआरजी आउटलायर मीडिया के वकील अशोक मुंदारगी की दलीलों पर जवाब देते हुए यह टिप्पणी की।

याचिकाकर्ताओं ने टीआरपी घोटाले की जांच सीबीआई या किसी अन्य स्वतंत्र एजेंसी को सौंपे जाने सहित अन्य राहत प्रदान करने का अदालत से अनुरोध किया है। मुंदारगी ने हाई कोर्ट से कहा कि पिछले साल अक्टूबर में प्रेस कॉन्फ्रेंस करने के पीछे पुलिस के दुर्भावनापूर्ण इरादे थे।

उन्होंने दलील दी कि रिपब्लिक टीवी और इसके एडिटर गोस्वामी के खिलाफ कोई सबूत नहीं हैं, लेकिन पुलिस उन्हें किसी ना किसी तरह से आरोपी के तौर पर नामजद करने की कोशिश कर रही है।

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