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हेराल्ड पर सदन में हंगामा, कांग्रेस ने लगाया बदले की राजनीति का आरोप

नेशनल हेराल्ड मामले की पृष्ठभूमि में संसद के दोनों सदनों में कांग्रेस के सदस्यों ने सरकार पर प्रतिशोध की राजनीति करने का आरोप लगाते हुए मंगलवार को जमकर हंगामा किया..

Author नई दिल्ली | December 9, 2015 00:51 am
नेशनल हेराल्ड केस में नरेंद्र मोदी सरकार के खिलाफ नई दिल्ली के तीम मूर्ति के पास प्रदर्शन करते कांग्रेसी कार्यकर्ता। (पीटीआई फोटो)

नेशनल हेराल्ड मामले की पृष्ठभूमि में संसद के दोनों सदनों में कांग्रेस के सदस्यों ने सरकार पर प्रतिशोध की राजनीति करने का आरोप लगाते हुए मंगलवार को जमकर हंगामा किया। इस कारण कई बार के स्थगन के बाद दोनों सदनों की कार्यवाही दिन भर के लिए स्थगित कर दी गई। सरकार ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी पर आरोप लगाया कि वे सदन की कार्यवाही में बाधा डाल रही हैं और इसकी वजह भी बताने को तैयार नहीं हैं। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कांग्रेस के इस आरोप को गलत बताया कि सरकार राजनीतिक प्रतिशोध की भावना से काम कर रही है।उधर हेराल्ड मामले में सोनिया गांधी और राहुल गांधी को अदालती राहत नहीं मिल पाई है। अब उन्हें 19 दिसंबर को अदालत में पेश होना पड़ेगा।

कांग्रेस और सत्तापक्ष, दोनों ओर से हालांकि नेशनल हेराल्ड मामले का सीधा उल्लेख नहीं किया गया। राजनीतिक प्रतिशोध के कांगे्रस के आरोप को अस्वीकार करते हुए सरकार ने कहा कि अदालत में सरकार का कोई हस्तक्षेप नहीं है। सदन के भीतर कांग्रेस की रणनीति संबंधी समिति की बैठक के बाद सोनिया गांधी ने संसद भवन परिसर में कहा- मैं इंदिरा गांधी की बहू हूं। मैं किसी से डरती नहीं हूं। उनसे संवाददाताओं ने नेशनल हेराल्ड मामले में उनके खिलाफ दिल्ली की एक अदालत की ओर से जारी समन को रद्द करने की अपील को दिल्ली हाई कोर्ट द्वारा नामंजूर किए जाने को लेकर सवाल किया था। उधर संसदीय मामलों के मंत्री एम वेंकैया नायडू ने संसद भवन परिसर में कहा कि उन्हें अदालत में मामला लड़ना चाहिए। आप सरकार को कैसे जिम्मेदार ठहरा सकते हैं। यह पूरी तरह अनुचित और गैर-जिम्मेदाराना है।

संसदीय मामलों के राज्य मंत्री राजीव प्रताप रूडी ने लोकसभा में कार्यवाही को बाधित करने का सोनिया गांधी पर आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि उनका अनुमान है कि अदालत की किसी बात को लेकर कांग्रेस सदस्य आंदोलित हैं। उन्होंने कहा कि इस मामले से सरकार का या सदन का कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने कहा कि सुबह से कांग्रेस सदस्य इस मामले को लेकर उत्तेजित हैं। लेकिन उसका कोई नेता यह बोलने को तैयार नहीं है कि मामला क्या है। अगर कांग्रेस अध्यक्ष को लगता है कि वे पीड़ित हैं और सरकार पीड़क है तो वे सदन में अपनी बात रख सकती हैं। विधि मंत्री डीवी सदानंद गौड़ा ने भी कहा कि केवल हंगामा करने से कोई मकसद हल नहीं होता और विपक्ष के इस प्रकार के रवैए को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने कहा कि आसन को इस बारे में न तो कोई नोटिस दिया गया है और न ही कांग्रेस के नेता खुद यह बताने को तैयार हैं कि मामला क्या है? न तो आपके नेता कुछ बता रहे हैं, न आपने कोई नोटिस दिया है , ऐसे ही हंगामा कर रहे हैं। ऐसा तो पहली बार हो रहा है सदन में। लोकसभा और राज्यसभा में कांग्रेसी सदस्यों के हंगामे के कारण कोई विशेष कामकाज नहीं हो सका। प्रश्नकाल की कार्यवाही बाधित हुई और आवश्यक दस्तावेज भी हंगामे के बीच ही पटल पर रखवाए गए। लोकसभा में नियम 193 के तहत देश में सूखे के कारण उत्पन्न संकट पर सोमवार को शुरू हुई चर्चा भी आगे नहीं बढ़ सकी।

इससे पहले नेशनल हेराल्ड से जुड़े मामले की पृष्ठभूमि में आक्रामक मुद्रा अपनाए कांग्रेस सदस्यों ने राज्यसभा में भारी हंगामा किया जिससे सदन की कार्यवाही बार-बार बाधित हुई और पांच बार के स्थगन के बाद अंतत: पूरे दिन के लिए स्थगित कर दी गई।

विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद ने सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि सप्ताह भर पहले यहां संविधान पर चर्चा में इसके प्रति फिर से प्रतिबद्धता जताई गई। लेकिन उन्हें हालात में कोई बदलाव नहीं दिख रहा है। उन्होंने कहा कि जिस तरह का वातावरण बन रहा है, ऐसा लगता है कि दो तरह के कानून का पालन हो रहा है। आजाद ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ही नहीं बल्कि पूरे विपक्ष को निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि तीन राज्यों के मुख्यमंत्रियों और एक केंद्रीय मंत्री के खिलाफ कार्रवाई की विपक्ष की मांग के कारण पिछला सत्र नहीं चला।

कांग्रेस के आरोपों को सिरे से नकारते हुए सदन के नेता अरुण जेटली ने कहा कि कांग्रेस नेताओं के खिलाफ गंभीर मामला आया है जिसे सरकार ने नहीं बल्कि न्यायपालिका ने उठाया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को न्यायपालिका में जवाब देना चाहिए। राज्यसभा में उप सभापति कुरियन ने कांग्रेस सदस्यों से हंगामा बंद कर अपने स्थानों पर लौटकर अपनी बात कहने को कहा। उन्होंने कहा, हंगामा करने के बजाय वे बताएं कि वे ऐसा क्यों कर रहे हैं। संसदीय कार्य राज्य मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा कि उनकी समस्या अदालत के फैसले को लेकर है, सरकार को लेकर नहीं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को न्यायिक प्रक्रिया का सम्मान करना चाहिए और कानून के अनुसार काम करना चाहिए। हंगामा थमते नहीं देख कुरियन ने 11 बज कर करीब 10 मिनट पर बैठक 11 बज कर तीस मिनट तक के लिए स्थगित कर दी।

बैठक फिर शुरू होने पर भी कांग्रेस सदस्यों का हंगामा जारी रहा। इस बीच सपा के नरेश अग्रवाल ने कहा कि उन्होंने शून्यकाल स्थगित करने के लिए नोटिस दिया है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के साथ बदले की भावना के साथ काम कर रही है चाहे वह निजी तौर पर हो या राजनीतिक तौर पर। उन्होंने कहा, खास कर उत्तर प्रदेश सरकार के साथ बदले की भावना से काम किया जा रहा है। एक ओर राज्य में तमाम विकास कार्य रोक दिए गए हैं, वहीं दूसरी ओर राज्य सरकार को बदनाम करने की कोशिश की जा रही है। इस दौरान कांग्रेस सदस्यों का आसन के समक्ष हंगामा जारी था। सदन में व्यवस्था बनते न देख कुरियन ने बैठक दोपहर बारह बजे तक के लिए स्थगित कर दी।

दो बार के स्थगन के बाद बारह बजे बैठक शुरू होने पर भी कांग्रेस सदस्यों का हंगामा जारी रहा और वे आसन के समक्ष आकर नारेबाजी करने लगे। उधर भाजपा के भी कुछ सदस्य जवाबी नारेबाजी करते दिखे। हंगामे को देखते हुए सभापति हामिद अंसारी ने बैठक पहले साढ़े 12 बजे तक के लिए फिर दोपहर दो बजे तक के लिए स्थगित कर दी। दोपहर दो बजे बैठक शुरू होने पर भी कांग्रेस सदस्यों का हंगामा जारी रहा और वे आसन के समक्ष आकर नारेबाजी करने लगे। इसी दौरान उपसभापति पीजे कुरियन ने एक ध्यानाकर्षण प्रस्ताव पर चर्चा के लिए माकपा सदस्य तपन कुमार सेन का नाम लिया। लेकिन हंगामा थमते नहीं देख कुरियन ने चंद मिनट बाद ही बैठक दोपहर बाद तीन बजे तक के लिए स्थगित कर दी।

तीन बजे बैठक शुरू होने पर विपक्ष के नेता आजाद ने अपनी बातें कहीं। इसके बाद हंगामे में सदन के नेता अरुण जेटली ने सरकार का पक्ष रखा। बहरहाल हंगामे को देखते हुए कुरियन ने करीब सवा तीन बजे बैठक दिन भर के लिए स्थगित कर दी। मंगलवार को सदन में प्रश्नकाल और शून्यकाल हंगामे की भेंट चढ़ गया।

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