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Chandrayan-2: धरती की कक्षा से बाहर निकला चंद्रयान, चांद की ओर किया कूच

Chandrayan-2: इसरो के चेयरमैन के सिवन ने बताया, 3.8 टन की यह सेटेलाइट अगले 6 दिन का सफर तय कर 20 अगस्त को चांद की कक्षा में पहुंचेगी।

Author नई दिल्ली | August 14, 2019 10:52 AM
प्रतीकात्मक तस्वीर/ इंडियन एक्सप्रेस

Chandrayan-2: चंद्रयान-2 धरती की कक्षा से बाहर निकल चुका है और अब चांद की तरफ कूच कर रहा है। भारत का महत्वकांक्षी प्रोजेक्ट चंद्रयान-2 अबतक सफल रहा है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने बुधवार को जानाकारी दी है कि चंद्रयान-2 धरती की कक्षा से बाहर निकल चुका है। सैटेलाइट अपने अगले पड़ाव यानि की चांद की तरफ आगे बढ़ रही है। ट्रांस लूनर इंसेर्शन सफलतापूर्वक पूरा हो चुका है।

इसरो ने एक बयान जारी कर कहा ‘मंगलवार देर रात करीब 2 बजकर 21 मिनट पर चंद्रयान-2 ने धरती की कक्षा को छोड़ दिया। इस दौरान स्पेसक्राफ्ट का ईंधन 1203 सेकेंड के लिए फायर किया गया। जिसके बाद चंद्रयान-2 लूनर ट्रांसफर ट्रेजेक्टरी में दाखिल हो गया।’ मालूम हो कि लूनर ट्रांसफर ट्रेजेक्‍टरी अंतरिक्ष का वह रास्‍ता होता है, जिसके जरिये अंतरिक्ष यान चांद की कक्षा की ओर प्रवेश करता है।

इसरो के चेयरमैन के सिवन ने बताया, 3.8 टन की यह सेटेलाइट अगले 6 दिन का सफर तय कर 20 अगस्त को चांद की कक्षा में पहुंचेगी। जैसे ही स्पेसक्राफ्ट चांद की कक्षा में पहुंचेगा एकबार फिर स्पेसक्राफ्ट का ईंधन फायर किया जाएगा। लैंडर के 6 सितंबर को 30 किमी की दूरी पर पहुंचने के साथ ही चांद की सतह पर उतरने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।

गौरतलब है चंद्रयान-2 भारत का एक अत्यंत ही महत्वकांक्षी प्रोजेक्ट है। इसके तहत भारत चांद की उन बारीकियों की जानकारी एकत्रित करना चाहता है जिसके बारे में अभी सिर्फ कयास ही लगाए जा रहे हैं। कहा जा रहा है कि यह मिशन पूरे सौर मंडल के विकास को समझने में हमारी मदद कर सकता है। चंद्रमा 3.5 अरब वर्ष पुराना है लेकिन आखिर चंद्रमा कैसे अस्तित्व में आया इसके पीछे क्या थ्योरी रही होगी ये इस मिशन के जरिए इन जानकारियों को पाने के लिए एक कदम बढ़ाया जा रहा है।

इस पूरे प्रोजेक्ट की लागत 978 करोड़ रुपए है। यदि सब कुछ सही रहता है तो रूस, अमेरिका और चीन के बाद भारत, चांद की सतह पर ‘सॉफ्ट लैंडिंग’ करने वाला चौथा देश बन जाएगा। ‘चंद्रयान-2’ मिशन भारत के लिए इसलिए भी बेहदमहत्वपूर्ण है क्योंकि चांद के दक्षिणी ध्रुव क्षेत्र में अभी तक कोई देश नहीं पहुंचा है।

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