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Chandrayaan 2: इसरो की उम्मीदें बरकरार, के.सिवन बोले- ऑर्बिटर ‘‘बेहतर परिणाम’’ हासिल करने में सक्षम

Chandrayaan 2: ‘सॉफ्ट लैंडिंग’ के दौरान आखिरी पलों में चंद्रमा की सतह से 2.1 किमी ऊपर इसरो का विक्रम से संपर्क टूट गया था। इसरो ऑर्बिटर की मदद से लगातार विक्रम को खोजने की मदद कर रहा है।

Author नई दिल्ली | Updated: Sep 18, 2019 08:52 am
चंद्रयान-2 का ऑर्बिटर फिलहाल लैंडर विक्रम से संपर्क करने की कोशिश कर रहा है। (पीटीआई फोटो)

Chandrayaan-2: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के पूर्व प्रमुख ए एस किरण कुमार ने बृहस्पतिवार को कहा कि लैंडर ‘विक्रम’ और इसके भीतर मौजूद रोवर ‘प्रज्ञान’ से संपर्क टूट जाने के बावजूद ‘चंद्रयान-2’ का ऑर्बिटर ‘‘बेहतर परिणाम’’ प्राप्त करने में सक्षम है। कुमार ने पीटीआई-भाषा से कहा, ‘‘अंतिम ‘लैंडिंग’ गतिविधि को छोड़कर अन्य सभी योजनाबद्ध गतिविधियां अक्षुण्ण हैं।’’

Chandrayaan 2 Vikram Lander Live Updates: विक्रम से संपर्क करने में NASA कर रहा है मदद, रेडियो सिग्नल के माध्यम से भेजे संदेश

उन्होंने कहा कि इस बार का ऑर्बिटर महत्वपूर्ण उपकरणों से लैस है जो एक दशक पहले भेजे गए ‘चंद्रयान-1’ की तुलना में अधिक शानदार परिणाम देने पर केंद्रित हैं। कुमार ने कहा कि पूर्व में नासा जेपीएल से ‘चंद्रयान-1’ द्वारा ले जाए गए दो उपकरणों की तुलना में इस बार के उपकरण तीन माइक्रोन से लेकर पांच माइक्रोन तक की स्पेक्ट्रम रेंज तथा रडारों, दोनों के मामलों में ‘‘शानदार प्रदर्शन’’ करने की क्षमता से लैस हैं

Read | How ISRO is trying to reconnect with Chandrayaan-2’s Vikram Lander

उन्होंने कहा, ‘‘एक सिंथेटिक अपर्चर रडार की जगह (इस बार) हमारे पास दो फ्रीक्वेंसी रडार हैं। इस तरह इसमें अनेक नयी क्षमताएं हैं। वास्तव में यह बेहतर परिणाम हासिल करने में हमारी मदद करेगा।’’

Live Blog

Highlights

    23:56 (IST)13 Sep 2019
    चंद्रयान-2 पर बोले नोबेल विजेता वैज्ञानिक-समस्याएं, अप्रत्याशित घटनाएं देती हैं अनुसंधान को धार

    नोबेल पुरस्कार विजेता फ्रांसीसी भौतिक विज्ञानी सर्जे हरोशे ने शुक्रवार को कहा कि समस्याएं, हादसे और अप्रत्याशित घटनाएं अनुसंधान को धार देने का काम करती हैं तथा भारत को चांद के दक्षिणी ध्रुव क्षेत्र में ऐतिहासिक ‘सॉफ्ट लैंडिंग’ के प्रयास के दौरान आई खामी के बाद आगे की ओर देखना चाहिए। वर्ष 2012 में भौतिकी के क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार जीतने वाले 75 वर्षीय हरोशे ''नोबेल प्राइज सीरीज इंडिया 2019'' के लिए भारत में हैं और यह देश में इस तरह की तीसरी श्रृंखला है।

    फ्रांसीसी वैज्ञानिक ने कहा कि ‘चंद्रयान-2’ मिशन एक बड़ी वैज्ञानिक परियोजना है और इस तरह की परियोजनाओं में आम तौर पर सरकार का काफी योगदान होता है। उन्होंने कहा, ‘‘यह एक तरह से प्रतिष्ठा से जुड़ी परियोजना है जिसमें आम तौर पर काफी धन खर्च होता है और जब आपको असफलता मिलती है या कोई दुर्घटना होती है तो मीडिया का ध्यान केंद्रित होने के कारण काफी निराशा होती है।’’

    22:33 (IST)13 Sep 2019
    चंद्रयान 2 के संबंध में मोदी पर टिप्पणी करके विवादों में घिरे मंत्री

    छत्तीसगढ़ के संस्कृति मंत्री अमरजीत भगत ने चंद्रयान 2 मिशन को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर विवादित टिप्पणी करते हुए कहा कि वह अब तक दूसरे के कामों की वाहवाही लूटते थे, लेकिन पहली बार चंद्रयान 2 का प्रक्षेपण करने गए और वह भी असफल हो गया। इस टिप्पणी के बाद मंत्री सोशल मीडिया पर घिर गए और उन्हें इसे लेकर स्पष्टीकरण देना पड़ा। राज्य में मुख्य विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी ने भी मंत्री की टिप्पणी पर आपत्ति जताई है।

    भगत से राज्य के कोरिया जिले में सोमवार को आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान संवाददाताओं ने केंद्र में मोदी सरकार के 100 दिन पूरे होने को लेकर सवाल किया, जिसके जवाब में मंत्री ने कहा कि अभी तक मोदी केवल दूसरे के किए (पूर्ववर्ती सरकार के कार्यकाल में किए गए) काम में फीता काटते थे, उद्घाटन करते थे और वाहवाही लूटते थे। वह पहली बार चंद्रयान 2 का प्रक्षेपण करने गए और वह भी असफल हो गया।

    22:31 (IST)13 Sep 2019
    ‘चंद्रयान-2’: लैंडर ‘विक्रम’ से संपर्क साधने की संभावना हो रही क्षीण

    ‘चंद्रयान-2’ के लैंडर ‘विक्रम’ से पुन: संपर्क करने और इसके भीतर बंद रोवर ‘प्रज्ञान’ को बाहर निकालकर चांद की सतह पर चलाने की संभावनाएं हर गुजरते दिन के साथ क्षीण होती जा रही हैं। लैंडर को चांद की सतह पर ‘सॉफ्ट लैंडिंग’ के लिए डिजाइन किया गया था। इसके भीतर बंद रोवर का जीवनकाल एक चंद्र दिवस यानी कि धरती के 14 दिन के बराबर है। सात सितंबर की घटना के बाद से लगभग एक सप्ताह निकल चुका है तथा अब इसरो के पास मात्र एक सप्ताह शेष बचा है।

    इसरो ने कहा था कि वह 14 दिन तक लैंडर से संपर्क साधने की कोशिश करता रहेगा। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के वैज्ञानिकों की तमाम कोशिशों के बावजूद लैंडर से अब तक संपर्क स्थापित नहीं हो पाया है। हालांकि, ‘चंद्रयान-2’ के आॅर्बिटर ने ‘हार्ड लैंडिंग’ के कारण टेढ़े हुए लैंडर का पता लगा लिया था और इसकी ‘थर्मल इमेज’ भेजी थी।

    22:27 (IST)13 Sep 2019
    चंद्रयान-2 पर बोले नोबेल विजेता वैज्ञानिक-समस्याएं, अप्रत्याशित घटनाएं देती हैं अनुसंधान को धार

    नोबेल पुरस्कार विजेता फ्रांसीसी भौतिक विज्ञानी सर्जे हरोशे ने शुक्रवार को कहा कि समस्याएं, हादसे और अप्रत्याशित घटनाएं अनुसंधान को धार देने का काम करती हैं तथा भारत को चांद के दक्षिणी ध्रुव क्षेत्र में ऐतिहासिक ‘सॉफ्ट लैंडिंग’ के प्रयास के दौरान आई खामी के बाद आगे की ओर देखना चाहिए।

    वर्ष 2012 में भौतिकी के क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार जीतने वाले 75 वर्षीय हरोशे ''नोबेल प्राइज सीरीज इंडिया 2019'' के लिए भारत में हैं और यह देश में इस तरह की तीसरी श्रृंखला है। फ्रांसीसी वैज्ञानिक ने कहा कि ‘चंद्रयान-2’ मिशन एक बड़ी वैज्ञानिक परियोजना है और इस तरह की परियोजनाओं में आम तौर पर सरकार का काफी योगदान होता है।

    18:43 (IST)13 Sep 2019
    'शानदार परिणाम मिलने की कर रहे उम्मीद'

    पूर्व इसरो प्रमुख ने कहा, ‘‘हम शानदार परिणाम मिलने की उम्मीद कर रहे हैं क्योंकि हम अपने माइक्रोवेव ड्युअल फ्रीक्वेंसी सेंसरों का इस्तेमाल कर स्थायी रूप से अंधकार में छाए रहने वाले (चांद के) क्षेत्रों का मानचित्रीकरण करने में सफल होंगे।’

    17:11 (IST)13 Sep 2019
    विक्रम की लैंडिंग साइट के ऊपर से गुजरेगा नासा का ऑर्बिटर

    स्पेसफ्लाइट नाउ ने नासा के ऑर्बिटन के प्रॉजेक्ट साइंटिस्ट नोआह पेत्रो के हवाले से लिखा है कि नासा का ऑर्बिटर 17 सितंबर यानी मंगलवार को विक्रम की लैंडिंग साइट के ऊपर से गुजरेगा। पेत्रो ने कहा कि नासा की नीति की मुताबिक उसके ऑर्बिटर का डेटा सार्वजनिक तौर पर उपलब्ध होता है।

    16:37 (IST)13 Sep 2019
    चंद्रमा की सतह पर साबुत अवस्था में है विक्रम

    अभियान से जुड़े इसरो के सीनियर अधिकारी बोले, ‘‘आर्बिटर कैमरा की तस्वीरों से यह प्रर्दिशत होता है कि लैंडर विक्रम चंद्रमा की सतह पर साबुत अवस्था में है, वह टूट कर नहीं बिखरा है। यह झुकी हुई अवस्था में है। यह अपने चार पैरों पर खड़ा नहीं है, जैसा कि यह सामान्यत: रहता है।’’ अधिकारी ने बताया, ‘‘यह उलटा नहीं है। यह एक ओर झुका हुआ है।’’

    15:26 (IST)13 Sep 2019
    सात साल तक काम कर सकता है ऑर्बिटर

    यान का ऑर्बिटर एकदम ठीक है और शान के साथ चंद्रमा की परिक्रमा कर रहा है। इसका कार्यकाल एक साल निर्धारित था, लेकिन अब इसरो ने कहा है कि पर्याप्त मात्रा में ईंधन होने के चलते ऑर्बिटर लगभग सात साल तक काम कर सकता है।

    14:27 (IST)13 Sep 2019
    नासा का ऑर्बिटर लैंडर विक्रम की साइट के ऊपर से गुजरेगा

    नासा का ऑर्बिटर लैंडर विक्रम की साइट के ऊपर से गुजरेगा। इसके साथ ही वह इसकी तस्वीरें भी भेजेगा। ऐसा मंलगवार (17 सितंबर 2019) को किया जाएगा। स्पेसफ्लाइट नाउ ने नासा के ऑर्बिटन के प्रॉजेक्ट साइंटिस्ट नोआह पेत्रो के हवाले से यह जानकारी सामने आई है।

    13:56 (IST)13 Sep 2019
    ऑर्बिटर ने ‘विक्रम’ का पता लगा लिया

    अंतरिक्ष एजेंसी ने गत रविवार को कहा था कि ऑर्बिटर ने चंद्र सतह पर पलटे ‘विक्रम’ का पता लगा लिया है और उससे संपर्क के सभी प्रयास किए जा रहे हैं।

    13:32 (IST)13 Sep 2019
    चंद्रयान-3 के तहत फिर भेजेंगे

    एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक इसरो के विश्वस्त सूत्रों ने बताया है कि अगर लैंडर नहीं मिलता तो वे विक्रम और प्रज्ञान रोवर का अपग्रेडेड वर्जन चंद्रयान-3 के तहत भेजेंगे। हालांकि इसको लेकर इसरो ने अबतक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है।

    12:48 (IST)13 Sep 2019
    अगर सॉफ्ट लैंडिंग होती तो ये होता

    यदि ‘विक्रम’ सॉफ्ट लैंडिंग में सफल रहता तो इसके भीतर से रोवर ‘प्रज्ञान’ बाहर निकलता और एक चंद्र दिवस यानी कि पृथ्वी के 14 दिन जितनी अवधि तक चंद्र सतह पर वैज्ञानिक प्रयोगों को अंजाम देता।

    12:25 (IST)13 Sep 2019
    ऑर्बिटर एकदम ठीक है

    यान का ऑर्बिटर एकदम ठीक है और शान के साथ चंद्रमा की परिक्रमा कर रहा है। इसका कार्यकाल एक साल निर्धारित था, लेकिन अब इसरो ने कहा है कि पर्याप्त मात्रा में ईंधन होने के चलते ऑर्बिटर लगभग सात साल तक काम कर सकता है।

    11:31 (IST)13 Sep 2019
    हमारे पास दो फ्रीक्वेंसी रडार हैं

    पूर्व इसरो प्रमुख ने कहा, ‘‘एक सिंथेटिक अपर्चर रडार की जगह (इस बार) हमारे पास दो फ्रीक्वेंसी रडार हैं। इस तरह इसमें अनेक नयी क्षमताएं हैं। वास्तव में यह बेहतर परिणाम हासिल करने में हमारी मदद करेगा।’’ उन्होंने कहा, ‘‘हम शानदार परिणाम मिलने की उम्मीद कर रहे हैं क्योंकि हम अपने माइक्रोवेव ड्युअल फ्रीक्वेंसी सेंसरों का इस्तेमाल कर स्थायी रूप से अंधकार में छाए रहने वाले (चांद के) क्षेत्रों का मानचित्रीकरण करने में सफल होंगे।’’

    11:08 (IST)13 Sep 2019
    चंद्रयान-1’ की तुलना में ज्यादा अच्छा

    ए एस किरण कुमार ने कहा कि पूर्व में नासा जेपीएल से ‘चंद्रयान-1’ द्वारा ले जाए गए दो उपकरणों की तुलना में इस बार के उपकरण तीन माइक्रोन से लेकर पांच माइक्रोन तक की स्पेक्ट्रम रेंज तथा रडारों, दोनों के मामलों में ‘‘शानदार प्रदर्शन’’ करने की क्षमता से लैस हैं।

    10:50 (IST)13 Sep 2019
    ऑर्बिटर महत्वपूर्ण उपकरणों से लैस

    इसरो के पूर्व प्रमुख ए एस किरण कुमार ने कहा ‘‘अंतिम ‘लैंडिंग गतिविधि को छोड़कर अन्य सभी योजनाबद्ध गतिविधियां अक्षुण्ण हैं।’’ उन्होंने कहा कि इस बार का ऑर्बिटर महत्वपूर्ण उपकरणों से लैस है जो एक दशक पहले भेजे गए ‘चंद्रयान-1’ की तुलना में अधिक शानदार परिणाम देने पर केंद्रित हैं।

    10:03 (IST)13 Sep 2019
    संपर्क टूट गया था

    चंद्रमा की सतह पर शनिवार तड़के लैंडर की ‘सॉफ्ट लैंडिंग’ के दौरान आखिरी पलों में उसका इसरो के जमीनी स्टेशनों से संपर्क टूट गया था। उस वक्त विक्रम पृथ्वी के प्राकृतिक उपग्रह (चंद्रमा) से महज 2.1 किमी ऊपर था। ‘लैंडर’ विक्रम के अंदर ‘रोवर’ प्रज्ञान भी है

    23:46 (IST)12 Sep 2019
    ‘चंद्रयान-2’ का ऑर्बिटर ‘‘बेहतर परिणाम’’ हासिल करने में सक्षम

    भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के पूर्व प्रमुख ए एस किरण कुमार ने बृहस्पतिवार को कहा कि लैंडर ‘विक्रम’ और इसके भीतर मौजूद रोवर ‘प्रज्ञान’ से संपर्क टूट जाने के बावजूद ‘चंद्रयान-2’ का ऑर्बिटर ‘‘बेहतर परिणाम’’ प्राप्त करने में सक्षम है।

    22:34 (IST)12 Sep 2019
    ये डेटा नहीं, खजाना है...: गौहर रजा

    गौहर रजा ने समाचार एजेंसी एएनआई से कहा, "स्कैनिंग एक बार में रुकेगी नहीं। हम उसे बार-बार स्कैन करेंगे। उसकी रफ्तार (उतरने के दौरान) पता करने की कोशिश करेंगे। ये डेटा पूरी मानव जाति इस्तेमाल करेगी। यह ऐसा खजाना है, जो हमें आगे कदम बढ़ाने में जरूरत पड़ेगी। आम जनता को यह समझना चाहिए कि साइंस में कोई चीज असफल नहीं होगी। हम जब किसी चीज (लक्ष्य) में सफल नहीं हो पाते हैं, तब हमारी उसमें देर हो जाती है। हो सकता है कि दो या तीन साल बाद हो। सिर्फ यही है कि तारीख में देरी हो जाए। वैज्ञानिकों के पास हताश होकर बैठने का विकल्प नहीं होती, क्योंकि देश को, मानवता को और विज्ञान को इसकी जरूरत है। यह पूरा होगा ही।"

    21:29 (IST)12 Sep 2019
    चंद्रयान-3 भेजने का भी है प्लान!

    एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक इसरो के विश्वस्त सूत्रों ने बताया है कि अगर लैंडर नहीं मिलता तो वे विक्रम और प्रज्ञान रोवर का अपग्रेडेड वर्जन चंद्रयान-3 के तहत भेजेंगे। हालांकि इसको लेकर इसरो ने अबतक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। 

    18:56 (IST)12 Sep 2019
    लैंडर से संपर्क की कोशिश जारी, ISRO लगा रहा एड़ी चोटी का जोर

    दरअसल, चंद्रमा की सतह पर शनिवार तड़के लैंडर की ‘सॉफ्ट लैंडिंग’ के दौरान आखिरी पलों में उसका इसरो के जमीनी स्टेशनों से संपर्क टूट गया था। उस वक्त विक्रम पृथ्वी के प्राकृतिक उपग्रह (चंद्रमा) से महज 2.1 किमी ऊपर था। ‘लैंडर’ विक्रम के अंदर ‘रोवर’ प्रज्ञान भी है। इसरो ने इस बारे में ट्वीट किया, ‘‘लैंडर से संपर्क करने के लिए कोशिशें जारी हैं।’’

    18:05 (IST)12 Sep 2019
    चंद्रयान-2: किस अवस्था में चांद पर है लैंडर?

    अभियान से जुड़े इसरो के सीनियर अधिकारी बोले, ‘‘आर्बिटर कैमरा की तस्वीरों से यह प्रर्दिशत होता है कि लैंडर विक्रम चंद्रमा की सतह पर साबुत अवस्था में है, वह टूट कर नहीं बिखरा है। यह झुकी हुई अवस्था में है। यह अपने चार पैरों पर खड़ा नहीं है, जैसा कि यह सामान्यत: रहता है।’’ अधिकारी ने बताया, ‘‘यह उलटा नहीं है। यह एक ओर झुका हुआ है।’’

    17:21 (IST)12 Sep 2019
    हाई रिजोल्यूशन तस्वीर लेने में सक्षम

    टेरेन मैपिंग कैमरा का इस्तेमाल चंद्रयान-1 में भी किया गया था। यह चांद की सतह का हाई रिजोल्यूशन तस्वीर ले सकता है। यह चांद की कक्षा से 100 किमी की दूरी से चांद की सतह पर 5 मीटर से लेकर 20 किमी तक के क्षेत्रफल की तस्वीर लेने में सक्षम है।

    16:55 (IST)12 Sep 2019
    ऑर्बिटर का वजन 682 किलो है

    चंद्रयान-2 का ऑर्बिटर फिलहाल चांद की कक्षा में 100 किलोमीटर की दूरी पर सफलतापूर्वक चक्कर लगा रहा है। 22 जुलाई को लॉन्च के समय ऑर्बिटर का कुल वजन 2379 था। इसमें ईंधन का वजन भी शामिल है। बिना ईंधन के ऑर्बिटर का वजन सिर्फ 682 किलो है।

    16:09 (IST)12 Sep 2019
    500 किलो ईंधन है ऑर्बिटर में

    अभी ऑर्बिटर में करीब 500 किलो ईंधन है जो उसे सात साल से ज्यादा समय तक काम करने की क्षमता प्रदान करता है। लेकिन, यह अंतरिक्ष के वातावरण पर भी निर्भर करता है कि वह कितने साल काम करता है।

    15:03 (IST)12 Sep 2019
    नासा की उम्मीदों को भी झटका लगा

    विक्रम में पैसिव पेलोड लेजर रिफ्लेक्टर लगे हैं। इसके जरिए लैंडर की सटीक स्थिति का पता चल सकता है और यह धरती से चांद की दूरी का सटीक आकलन कर सकता है। दूरी के आकलन के बाद नासा को अपने भविष्य के मिशन को बेहतर करने में मदद मिल सकती है। लेकिन लैंडर विक्रम के चांद की सतह पर हार्ड लैंडिंग के बाद नासा की उम्मीदों को भी झटका लगा है।

    14:35 (IST)12 Sep 2019
    नासा भी कर रहा 'विक्रम' से संपर्क साधने की कोशिश

    दुनिया की सबसे बड़ी स्पेस एजेंसी नासा भी चांद की सतह पर तिरछे पड़े लैंडर विक्रम से संपर्क की कोशिश में जूट गई है। एजेंसी ने लैंडर को 'हलो मेसेज' भेजा है। भारतीय स्पेस एजेंसी इसरो भी विक्रम से संपर्क की हरसंभव कोशिश कर रही है।

    14:00 (IST)12 Sep 2019
    कैसे बदलता है चांद का मौसम

    परिक्रमा के दौरान चांद अपनी धुरी पर सिर्फ 1.54 डिग्री तक तिरछा होता है जबकि पृथ्वी 23.44 डिग्री तक। इस कारण चांद पर पृथ्वी की तरह मौसम नहीं बदलते और चांद के ध्रुवों पर ऐसे कई इलाके हैं जहां कभी सूरज की रोशनी या किरणें पहुंच ही नहीं पातीं।

    13:44 (IST)12 Sep 2019
    1950 में हुई थी शुरुआत

    चांद पर जाने की शुरुआत 1950 के दशक में हुई थी। अमेरिका और रूस ने इस दौरान 14 मिशन चांद पर भेजे थे। लेकिन अमेरिका को एक और रूस को 3 में सफलता मिली।

    12:54 (IST)12 Sep 2019
    अमेरिका 26 बार असफल रहा है

    ऐसा नहीं है कि केवल भारत ही चांद पर सॉफ्ट लैंडिंग से चूका हो, अमेरिका और रूस जैसे देशों को भी अपने चांद अभियानों में मुश्किलों का सामना करना पड़ा था। शुरुआत में तो चांद पर पहुंचने की सफलता दर बेहद कम थी लेकिन, जैसे-जैसे तकनीक बदलती गई इसमें बदलाव आता गया। अमेरिका अपने कुल चांद मिशन में 26 बार असफल रहा है जबकि रूस को 14 बार नाकामी हाथ लगी थी।

    12:19 (IST)12 Sep 2019
    सतह पर तिरछा पड़ा है विक्रम

    सोमवार को खबर आई थी कि विक्रम चंद्रमा की सतह पर तिरछा पड़ा है और उसमें कोई टूट-फूट नहीं हुई है। इसरो ने बताया था कि ऑर्बिटर ने जो तस्वीर भेजी है, उसमें विक्रम का कोई टुकड़ा नहीं दिख रहा है। इसका मतलब है कि विक्रम बिल्कुल साबुत बचा है।

    12:01 (IST)12 Sep 2019
    अध्यक्ष के. सिवन का बयान

    इसरो अध्यक्ष के. सिवन ने शनिवार शाम कहा था कि अंतरिक्ष एजेंसी 14 दिनों तक लैंडर से संपर्क बहाल करने की कोशिश करेगी और तब से यह संकल्प दोहराया जा रहा है। इसरो के एक अधिकारी ने कहा कि विक्रम को चंद्रमा की सतह के जिस स्थान पर उतरना था, उससे करीब 500 मीटर दूर (चंद्रमा की) सतह से वह टकराया। लेकिन इस पर इसरो ने आधिकारिक रूप से कुछ भी नहीं कहा है। सूत्रों ने बताया कि इसरो की एक टीम यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या वे लैंडर के एंटेना इस तरह से फिर से व्यवस्थित कर सकते हैं कि संपर्क बहाल हो जाए।

    11:44 (IST)12 Sep 2019
    ऐसे किया जाता है संपर्क

    अंतरिक्ष में मौजूद किसी वस्तु से संपर्क इलेक्ट्रोमैग्नेटिक तरंगों द्वारा साधा जाता है। अंतरिक्ष संचार के लिए एस बैंड (माइक्रोवेव) और एल बैंड (रेडियो वेव) आवृत्ति वाली तरंगों का इस्तेमाल होता है।

    11:25 (IST)12 Sep 2019
    ऑर्बिटर की मदद से खोज जारी

    ‘सॉफ्ट लैंडिंग’ के दौरान आखिरी पलों में चंद्रमा की सतह से 2.1 किमी ऊपर इसरो का विक्रम से संपर्क टूट गया था। इसरो ऑर्बिटर की मदद से लगातार विक्रम को खोजने की कोशिश जारी है। 

    10:58 (IST)12 Sep 2019
    ISRO के पास 10 दिन का समय बाकी

    चंद्रमा पर 14 दिन का रात और 14 दिन की सुबह होती है। फिलहाल चंद्रमा पर दिन का समय है और अब इसरो के पास लैंडर विक्रम से संपर्क साधने के लिए सिर्फ 10 दिन का समय बाकी है। 10 दिन के बाद चंद्रमा पर रात हो जाएगी और ऐसे में लैंडर विक्रम से संपर्क साधना बेहद मुश्किल हो जाएगा। रात के समय चांद पर तापमान माइनस 200 डिग्री सेल्सियल तक चला जाता है। 

    10:35 (IST)12 Sep 2019
    विक्रम को खोजने की कोशिश जारी

    Chandrayaan 2: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) चंद्रयान-2 के ‘लैंडर’ विक्रम से शीघ्र संपर्क साध कर उसमें मौजूद ‘रोवर’ प्रज्ञान को उपयोग में लाने के लिए हर संभव कोशिश कर रहा है। ‘लैंडर’ विक्रम के चंद्रमा की सतह पर शनिवार तड़के ‘सॉफ्ट लैंडिंग’ करने के दौरान आखिरी क्षणों में उसका इसरो के जमीनी स्टेशनों से संपर्क टूट गया था।

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