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Chandrayaan 2: नासा भी कर रहा मदद, विक्रम से संपर्क कर पाएगा इसरो?

Chandrayaan 2 Vikram Lander: यदि विक्रम ‘सॉफ्ट लैंडिंग’ करने में सफल रहता तो इसके भीतर से रोवर बाहर निकलता और चांद की सतह पर वैज्ञानिक प्रयोगों को अंजाम देता।

Author नई दिल्ली | Updated: Sep 18, 2019 8:51:44 am
7 सितंबर को ‘सॉफ्ट लैंडिंग’ की प्रक्रिया के दौरान अंतिम क्षणों में ‘विक्रम’ का जमीनी स्टेशन से संपर्क टूट गया था। (फोटोः स्क्रीनशॉट/इसरो)

Chandrayaan 2:  विक्रम लैंडर से संपर्क करने के लिए नासा ने भी मदद के हाथ बढ़ाए हैं। इसरो के एक अधिकारी के मुताबिक, नासा की जेट प्रोपल्शन लेबोरेटरी  विक्रम को रेडियो सिग्नल भेज रही है। वहीं, इसरो भी अपने लैंडर तक सिग्नल भेजने और और संपर्क कायम करने के लिए लगातार कोशिश कर रहा है।वहीं,  कैलिफोर्निया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी यानी कैलटेक और नैशनल एरोनॉटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन नासा के जेट प्रोपल्शन लेबोरेटरी के अधिकारियों ने इसरो का दौरा किया है। अधिकारियों ने इसरो के चेयरमैन के. सिवन से मुलाकात की। हालांकि, इसरो की ओर से यह नहीं बताया गया कि बैठक का मकसद क्या था?

विक्रम लैंडर से संपर्क की कोशिशों के बीच खबर आ रही है कि इसरो ने अपनी चूक के बारे में पता लगाने का फैसला किया है। मीडिया में आई रिपोर्ट्स की मानें तो इसरो अब विक्रम लैंडर के असफल होने के कारणों की जांच करेगा। खबर के मुताबिक, एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश करेगी कि ऐसा क्या गलत हुआ जिसकी वजह से चंद्रयान-2 मिशन का लैंडर वहां उतर नहीं सका। स्पेस एजेंसी के एक रिटायर्ड अधिकारी के हवाले से यह खबर सामने आई है। अधिकारी के मुताबिक, इसरो को अभी तक जो भी डेटा मिला है, उसकी जांच की जाएगी। इसरो यह पता करेगा कि लॉन्च से पहले किसी सिमुलेशन को क्या अनदेखा किया गया था?

 

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Highlights

    14:46 (IST)15 Sep 2019
    चीन ने भी की थी जमकर तारीफ

    चीन के लोगों ने भी भारत के दूसरे चंद्र मिशन से जुड़े वैज्ञानिकों की इंटरनेट पर काफी सराहना की है और उनसे उम्मीद न छोड़ने तथा ब्रह्मांड में खोज जारी रखने को कहा है। चीनी मीडिया रिपोर्ट्स के हवाले से यह बात सामने आ चुकी है। रिपोर्ट के मुताबिक, चीन में बहुत से लोगों ने ट्विटर जैसी माइक्रो ब्लॉगिंग साइट ‘साइना वीबो’ पर भारतीय वैज्ञानिकों से उम्मीद न छोड़ने को कहा। ग्लोबल टाइम्स एक इंटरनेट उपभोक्ता के हवाले से कहा, ‘‘अंतरिक्ष खोज में सभी मनुष्य शामिल हैं। इससे फर्क नहीं पड़ता कि किस देश को सफलता मिली, इसे हमारी प्रशंसा मिलनी चाहिए और जो अस्थायी रूप से विफल हुए हैं, उनका भी हौसला बढ़ाया जाना चाहिए।’’ इंटरनेट पर एक अन्य व्यक्ति ने कहा कि भारतीय वैज्ञानिकों ने अंतरिक्ष खोज के लिए महान प्रयास और त्याग किया है।

    13:35 (IST)15 Sep 2019
    भाभा अटॉमिक रिसर्च सेंटर भी जुटा

    विक्रम लैंडर से संपर्क करने की कोशिश सिर्फ इसरो के वैज्ञानिक ही नहीं कर रहे। देश के शीर्ष रिसर्च संस्थानों में शुमार भाभा अटॉमिक रिसर्च सेंटर भी इस काम में जुटा हुआ है। एक अंग्रेजी अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक, बार्क और इलेक्ट्रॉनिक्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया ने मिलकर एक खास ऐंटिना बनाया है। इस ऐंटिना का साइज किसी टेनिस कोर्ट से 5 गुना बड़ा है और इसे बनाने की लागत करीब 65 करोड़ रुपये आई है।

    12:16 (IST)15 Sep 2019
    मिशन 90 से 95 फीसदी कामयाब

    इसरो द्वारा चंद्रयान-2 के विक्रम मॉड्यूल की स्थिति की जानकारी देना ‘‘नि:संदेह साबित करता है’’ कि आॅर्बिटर सही से काम कर रहा है। अंतरिक्ष विशेषज्ञ अजय लेले ने यह जानकारी दी है। रक्षा अध्ययन एवं विश्लेषण संस्थान के वरिष्ठ शोधार्थी लेले ने यह भी कहा कि यह महज वक्त की बात थी कि आॅर्बिटर विक्रम को कब तक खोज पाता है लेकिन अब सवाल यह है कि लैंडर किस स्थिति में है। लेले ने कहा, ‘‘लैंडर मॉड्यूल की स्थिति बिना किसी संदेह के साबित करती है कि आॅर्बिटर बिल्कुल सही तरीके से काम कर रहा है। आॅर्बिटर मिशन का मुख्य हिस्सा था क्योंकि इसे एक साल से ज्यादा वक्त तक काम करना है।’’ उन्होंने कहा कि आॅर्बिटर के सही ढंग से काम करने से मिशन के 90 से 95 फीसदी लक्ष्य हासिल कर लिए जाएंगे।

    10:56 (IST)15 Sep 2019
    20-21 सितंबर तक जारी रहेगी कोशिश

    इसरो के एक अधिकारी के मुताबिक, "चंद्रमा के विक्रम के साथ संचार लिंक कायम करने की कोशिश जारी है। यह कोशिश 20-21 सितंबर तक किए जाएंगे, जब सूरज की रोशनी उस क्षेत्र में होगी, जहां विक्रम है। बता दें कि बेंगलुरु के नजदीक बयालालू में अपने भारतीय डीप स्पेस नेटवर्क (आईडीएसएन) के जरिए इसरो विक्रम के साथ संपर्क की कोशिश कर रहा है।

    10:31 (IST)15 Sep 2019
    नासा कर रहा मदद

    कैलिफोर्निया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी यानी कैलटेक और नैशनल एरोनॉटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन नासा के जेट प्रोपल्शन लेबोरेटरी के अधिकारियों ने इसरो का दौरा किया है। अधिकारियों ने इसरो के चेयरमैन के. सिवन से मुलाकात की। हालांकि, इसरो की ओर से यह नहीं बताया गया कि बैठक का मकसद क्या था? इससे पहले खबर आई थी कि विक्रम लैंडर से संपर्क करने के लिए नासा ने भी मदद के हाथ बढ़ाए हैं। इसरो के एक अधिकारी के मुताबिक, नासा की जेट प्रोपल्शन लेबोरेटरी विक्रम को रेडियो सिग्नल भेज रही है। वहीं, इसरो भी अपने लैंडर तक सिग्नल भेजने और और संपर्क कायम करने के लिए लगातार कोशिश कर रहा है।

    09:09 (IST)15 Sep 2019
    क्यों बचा है कम वक्त?

    विक्रम लैंडर में बंद रोवर का जीवनकाल एक चंद्र दिवस यानी कि धरती के 14 दिन के बराबर है। सात सितंबर की घटना के बाद से लगभग एक सप्ताह निकल चुका है तथा अब इसरो के पास मात्र एक सप्ताह शेष बचा है। इसरो ने कहा था कि वह 14 दिन तक लैंडर से संपर्क साधने की कोशिश करता रहेगा। भारत के अंतरिक्ष वैज्ञानिक लैंडर से संपर्क साधने की हर रोज कोशिश कर रहे हैं, लेकिन प्रत्येक गुजरते दिन के साथ संभावनाएं क्षीण होती जा रही हैं।

    09:07 (IST)15 Sep 2019
    गड़बड़ी का पता लगाएगा इसरो

    मीडिया में आई रिपोर्ट्स की मानें तो इसरो अब विक्रम लैंडर के असफल होने के कारणों की जांच करेगा। खबर के मुताबिक, एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश करेगी कि ऐसा क्या गलत हुआ जिसकी वजह से चंद्रयान-2 मिशन का लैंडर वहां उतर नहीं सका। स्पेस एजेंसी के एक रिटायर्ड अधिकारी के हवाले से यह खबर सामने आई है। अधिकारी के मुताबिक, इसरो को अभी तक जो भी डेटा मिला है, उसकी जांच की जाएगी। इसरो यह पता करेगा कि लॉन्च से पहले किसी सिमुलेशन को क्या अनदेखा किया गया था?

    08:52 (IST)15 Sep 2019
    इस वजह से बढ़ी थी विक्रम से उम्मीद

    इसरो के वैज्ञानिकों ने कहा था,‘‘आर्बिटर कैमरा की तस्वीरों से यह प्रदर्शित होता है कि लैंडर विक्रम चंद्रमा की सतह पर साबुत अवस्था में है, वह टूट कर नहीं बिखरा है। यह झुकी हुई अवस्था में है। यह अपने चार पैरों पर खड़ा नहीं है, जैसा कि यह सामान्यत: रहता है।’’अधिकारी ने कहा, ‘‘यह उलटा नहीं है। यह एक ओर झुका हुआ है।’’बता दें कि चंद्रयान-2 में आर्बिटर, लैंडर (विक्रम) और रोवर (प्रज्ञान) हैं। लैंडर का जीवनकाल एक चंद्र दिवस है जो पृथ्वी के 14 दिनों के बराबर है।

    08:15 (IST)15 Sep 2019
    हर मुमकिन कोशिश कर रहा इसरो

    भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) चंद्रयान-2 के ‘लैंडर’ विक्रम से शीघ्र संपर्क साध कर उसमें मौजूद ‘रोवर’ प्रज्ञान को उपयोग में लाने के लिए हर संभव कोशिश कर रहा है। ‘लैंडर’ विक्रम के चंद्रमा की सतह पर शनिवार तड़के ‘सॉफ्ट लैंडिंग’ करने के दौरान आखिरी क्षणों में उसका इसरो के जमीनी स्टेशनों से संपर्क टूट गया था। उस वक्त विक्रम पृथ्वी के प्राकृतिक उपग्रह (चंद्रमा) से महज 2.1 किमी ऊपर था। ‘लैंडर’ विक्रम के अंदर ‘रोवर’ प्रज्ञान भी है। इसरो ने रविवार को कहा था कि विक्रम ने ‘हार्ड लैंडिंग’ की है।

    07:35 (IST)15 Sep 2019
    ऑर्बिटर से अभी भी काफी उम्मीदें

    उधर, भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के पूर्व प्रमुख ए एस किरण कुमार ने कहा है कि लैंडर ‘विक्रम’ और इसके भीतर मौजूद रोवर ‘प्रज्ञान’ से संपर्क टूट जाने के बावजूद ‘चंद्रयान-2’ का आर्बिटर ‘‘बेहतर परिणाम’’ प्राप्त करने में सक्षम है। कुमार ने कहा, ‘‘अंतिम ‘लैंडिंग’ गतिविधि को छोड़कर अन्य सभी योजनाबद्ध गतिविधियां अक्षुण्ण हैं।’’उन्होंने कहा कि इस बार का ऑर्बिटर महत्वपूर्ण उपकरणों से लैस है जो एक दशक पहले भेजे गए ‘चंद्रयान-1’ की तुलना में अधिक शानदार परिणाम देने पर केंद्रित हैं। कुमार ने कहा कि पूर्व में नासा जेपीएल से ‘चंद्रयान-1’ द्वारा ले जाए गए दो उपकरणों की तुलना में इस बार के उपकरण तीन माइक्रोन से लेकर पांच माइक्रोन तक की स्पेक्ट्रम रेंज तथा रडारों, दोनों के मामलों में ‘‘शानदार प्रदर्शन’’ करने की क्षमता से लैस हैं।

    07:29 (IST)15 Sep 2019
    क्या कहना है वैज्ञानिकों का

    इसरो के एक अधिकारी ने कहा, ‘‘उत्तरोत्तर, आप कल्पना कर सकते हैं कि हर गुजरते घंटे के साथ काम मुश्किल होता जा रहा है। बैटरी में उपलब्ध ऊर्जा खत्म हो रही होगी और इसके ऊर्जा हासिल करने तथा परिचालन के लिए कुछ नहीं बचेगा।’’उन्होंने कहा, ‘‘प्रत्येक गुजरते मिनट के साथ स्थिति केवल जटिल होती जा रही है...‘विक्रम’ से सपंर्क स्थापित होने की संभावना कम होती जा रही है।’’ यह पूछे जाने पर कि क्या संपर्क स्थापित होने की थोड़ी-बहुत संभावना है, अधिकारी ने कहा कि यह काफी दूर की बात है। इसरो टेलीमेट्री, ट्रैकिंग एंड कमांड नेटवर्क में एक टीम लैंडर से पुन: संपर्क स्थापित करने की लगातार कोशिश कर रही है।

    07:25 (IST)15 Sep 2019
    बचा है 7 दिन से भी कम वक्त

    बता दें कि चांद की सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग की कोशिश के दौरान विक्रम से संपर्क टूट गया था। इस बात को गुजरे एक हफ्ते से ज्यादा हो चुका है। वैज्ञानिकों के पास अब विक्रम से संपर्क करने के लिए 7 दिन से भी कम वक्त बचा है क्योंकि इसके अंदर बंद प्रज्ञान रोवर की बैटरी लाइफ महज 14 दिन है। इस डेडलाइन के बीत जाने के बाद संपर्क का कोई फायदा नहीं होगा क्योंकि फिर रोवर चांद की सतह पर उतर नहीं पाएगा। 

    07:25 (IST)15 Sep 2019
    ठप पड़ गया विक्रम का सिस्टम?

    इसरो के वैज्ञानिकों ने 'विक्रम' लैंडर से संपर्क करने की उम्मीदें नहीं छोड़ी हैं। हालांकि, इस बात की आशंका है कि चांद की सतह पर 'हार्ड लैंडिंग' की वजह से विक्रम लैंडर का कम्यूनिकेशन सिस्टम बंद पड़ गया है। इसरो के पूर्व वैज्ञानिक ऐसा अब मानने लगे हैं।

    21:59 (IST)14 Sep 2019
    ऑर्बिटर का वजन 682 किलो है

    चंद्रयान-2 का ऑर्बिटर फिलहाल चांद की कक्षा में 100 किलोमीटर की दूरी पर सफलतापूर्वक चक्कर लगा रहा है। 22 जुलाई को लॉन्च के समय ऑर्बिटर का कुल वजन 2379 था। इसमें ईंधन का वजन भी शामिल है। बिना ईंधन के ऑर्बिटर का वजन सिर्फ 682 किलो है।

    21:26 (IST)14 Sep 2019
    चंद्रयान-3 भेजने का भी है प्लान!

    एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक इसरो के विश्वस्त सूत्रों ने बताया है कि अगर लैंडर नहीं मिलता तो वे विक्रम और प्रज्ञान रोवर का अपग्रेडेड वर्जन चंद्रयान-3 के तहत भेजेंगे। हालांकि इसको लेकर इसरो ने अबतक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है।

    20:52 (IST)14 Sep 2019
    हमारे पास दो फ्रीक्वेंसी रडार हैं

    हमारे पास दो फ्रीक्वेंसी रडार हैं। पूर्व इसरो प्रमुख ने कहा, ‘‘एक सिंथेटिक अपर्चर रडार की जगह (इस बार) हमारे पास दो फ्रीक्वेंसी रडार हैं। इस तरह इसमें अनेक नयी क्षमताएं हैं। वास्तव में यह बेहतर परिणाम हासिल करने में हमारी मदद करेगा।’’ उन्होंने कहा, ‘‘हम शानदार परिणाम मिलने की उम्मीद कर रहे हैं क्योंकि हम अपने माइक्रोवेव ड्युअल फ्रीक्वेंसी सेंसरों का इस्तेमाल कर स्थायी रूप से अंधकार में छाए रहने वाले (चांद के) क्षेत्रों का मानचित्रीकरण करने में सफल होंगे।’’

    20:09 (IST)14 Sep 2019
    चंद्रमा की सतह पर साबुत अवस्था में है विक्रम

    विक्रम लैंडर चंद्रमा की सतह पर साबुत अवस्था में है। अभियान से जुड़े इसरो के सीनियर अधिकारी ने हाल ही में यह जानकारी दी है। अधिकारी के मुताबिक ‘‘आर्बिटर कैमरा की तस्वीरों से यह प्रर्दिशत होता है कि लैंडर विक्रम चंद्रमा की सतह पर साबुत अवस्था में है, वह टूट कर नहीं बिखरा है। यह झुकी हुई अवस्था में है। यह अपने चार पैरों पर खड़ा नहीं है, जैसा कि यह सामान्यत: रहता है।’’ अधिकारी ने बताया, ‘‘यह उलटा नहीं है। यह एक ओर झुका हुआ है।’’

    19:02 (IST)14 Sep 2019
    इसरो को है अपने मिशन पर गर्व

    लैंडर ‘विक्रम’ का अंतिम समय में जमीनी स्टेशन से संपर्क टूटने तक ‘चंद्रयान-2’ मिशन के त्रुटिरहित एवं सटीक प्रक्षेपण तथा शानदार प्रबंधन ने इसरो को ‘ऑर्बिटर’ के मोर्चे पर अत्यंत गौरवान्वित किया है। यह बात अंतरिक्ष एजेंसी के एक अधिकारी ने कही। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने 2,379 किलोग्राम वजनी ऑर्बिटर का मिशन काल एक साल तय किया था, लेकिन अब यह लगभग सात साल तक काम कर सकता है। इसरो के एक अधिकारी ने कहा, ‘‘ऑर्बिटर में पर्याप्त ईंधन मौजूद है। यान को चांद की कक्षा में प्रवेश कराने तक हमने किसी त्रुटि का सामना नहीं किया। अतिरिक्त ईंधन का बिलकुल भी इस्तेमाल नहीं किया गया। हर चीज योजना के अनुरूप हुई। हमारे पास (ऑर्बिटर में) अतिरिक्त ईंधन मौजूद है।’’

    18:20 (IST)14 Sep 2019
    क्यों नहीं हो पाई सॉफ्ट लैंडिंग

    इसरो के एक शीर्ष अधिकारी के मुताबिक चंद्रमा की सतह पर विक्रम की 'हार्ड लैंडिंग' ने दोबारा संपर्क कायम करने को मुश्किल बना दिया है, क्योंकि यह सहजता से और अपने चार पैरों के सहारे नहीं उतरा होगा। उन्होंने कहा कि चंद्रमा की सतह से टकराने के चलते लगे झटकों के चलते लैंडर को नुकसान पहुंचा होगा। उन्होंने कहा कि चंद्रमा की सतह से टकराने के चलते लगे झटकों के चलते लैंडर को नुकसान पहुंचा होगा।

    17:30 (IST)14 Sep 2019
    भारत के लिए कैसे लाभकारी है ये मिशन?

    यह मिशन पूरे सौर मंडल के विकास को समझने में हमारी मदद कर सकता है। चंद्रमा 3.5 अरब वर्ष पुराना है लेकिन आखिर चंद्रमा कैसे अस्तित्व में आया इसके पीछे क्या थ्योरी रही होगी ये इस मिशन के जरिए इन जानकारियों को पाने के लिए एक कदम बढ़ाया जा रहा है।  सवाल यह है कि दक्षिणी ध्रुव क्षेत्र में ‘सॉफ्ट लैंडिंग’ क्यों करवाई जा रही है? दरअसल आजतक कोई भी देश इसपर लैंडिंग नहीं करवा पाया है। यहां पर बहुत सारी बर्फ जमी हुई है। अगर भारत यहां पर पहुंचता है तो वहां मौजूदा पानी के मौजूदगी के अन्य सबूतों को एकत्रित कर सकता है।

    16:43 (IST)14 Sep 2019
    क्या है विक्रम लैंडर

    विक्रम लैंडर एक ऐसा मॉड्यूल है जो अपने स्वयं के कुछ प्रयोगों का संचालन करते हुए प्रग्यान रोवर को चांद के सतह पर पहुंचाएगा। विक्रम लैंडर जब एक बार तय समय के अनुसार सफलता पूर्वक चांद की सतह पर लैंड कर लेगा तो प्रग्यान रोवर खुद ही बाहर चांद की सतह पर आएगा, इस प्रक्रिया को रोल आउट कहा जाता है। इसमें कई उपकरण और पेलोड भी शामिल हैं जो अपने पूरे मिशन समय में लगातार प्रयोग करते रहेंगे।

    15:34 (IST)14 Sep 2019
    नासा का ऑर्बिटर 17 सितंबर को लैंडर विक्रम के ऊपर से गुजरेगा

    अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा का ऑर्बिटर 17 सितंबर को लैंडर विक्रम के ऊपर से गुजरेगा। बता दें कि भारत के चंद्रयान-2 मिशन के तहत चंद्रमा पर गए लैंडर विक्रम का पता लगाने में अब नासा भी मदद कर सकती है।

    14:42 (IST)14 Sep 2019
    पूजा पाठ का भी दौर

    ‘चंद्रयान-2’ के लैंडर ‘विक्रम’ से संपर्क साधने के लिए इसरो की ओर से हरसंभव प्रयास किए जाने के बीच तमिलनाडु के तंजावुर के नजदीक स्थित एक चंद्र मंदिर में श्रद्धालुओं ने लैंडर से संपर्क कराने के लिए ‘चंद्र देव’ से प्रार्थना की। चंद्र मंदिर के एक अधिकारी ने बताया कि इस दौरान चंद्र देव का शहद और चंदन सहित विभिन्न चीजों से (बने पंचामृत से) ‘अभिषेक’ किया गया। पूजा- अर्चना के बाद सामुदायिक भोज का भी आयोजन किया गया । श्री कैलाशनाथर (शिव) मंदिर के प्रांगण में ही चंद्र मंदिर भी है। यह नौ ग्रहों को सर्मिपत ‘‘नवग्रह’’ मंदिरों में से एक है। मंदिर प्रबंधक वी कन्नन ने प्रेट्र को से कहा, ‘‘लैंडर ‘विक्रम’ से (इसरो का)संपर्क टूट जाने के बाद हमने विशेष पूजा-अर्चना करने का निर्णय किया। चंद्र देव से लैंडर से दोबारा संपर्क कराने की प्रार्थना करते हुए सोमवार को यह विशेष पूजा-अर्चना की गयी।’’

    14:40 (IST)14 Sep 2019
    छत्तीसगढ़ के मंत्री भी दे चुके हैं विवादास्पद बयान

    छत्तीसगढ़ के संस्कृति मंत्री अमरजीत भगत ने चंद्रयान 2 मिशन को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर विवादित टिप्पणी करते हुए कहा था कि वह अब तक दूसरे के कामों की वाहवाही लूटते थे, लेकिन पहली बार चंद्रयान 2 का प्रक्षेपण करने गए और वह भी असफल हो गया। इस टिप्पणी के बाद मंत्री सोशल मीडिया पर घिर गए और उन्हें इसे लेकर स्पष्टीकरण देना पड़ा। राज्य में मुख्य विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी ने भी मंत्री की टिप्पणी पर आपत्ति जताई थी। भगत से एक कार्यक्रम के दौरान संवाददाताओं ने केंद्र में मोदी सरकार के 100 दिन पूरे होने को लेकर सवाल किया था, जिसके जवाब में मंत्री ने कहा था कि अभी तक मोदी केवल दूसरे के किए (पूर्ववर्ती सरकार के कार्यकाल में किए गए) काम में फीता काटते थे, उद्घाटन करते थे और वाहवाही लूटते थे। वह पहली बार चंद्रयान 2 का प्रक्षेपण करने गए और वह भी असफल हो गया।

    13:36 (IST)14 Sep 2019
    नेताओं की बयानबाजी भी

    कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री एच डी कुमारस्वामी ने यह बयान देकर एक बड़ा विवाद खड़ा कर दिया कि इसरो मुख्यालय में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी ‘‘अशुभ’’ साबित हुई होगी जिसके कारण ‘चंद्रयान-2’ मिशन के लैंडर विक्रम की ‘सॉफ्ट लैंडिंग’ असफल हो गई। कुमारस्वामी ने मैसूर में कहा था, ‘‘मैं नहीं जानता, लेकिन संभवत: वहां उनके कदम रखने का समय इसरो वैज्ञानिकों के लिए अपशगुन लेकर आया।’’उन्होंने कहा कि मोदी छह सितंबर को देश के लोगों को यह संदेश देने के लिए बेंगलुरु पहुंचे कि चंद्रयान के प्रक्षेपण के पीछे उनका हाथ है, जबकि यह परियोजना 2008-2009 के दौरान की संप्रग सरकार और वैज्ञानिकों का परिणाम थी। कुमारस्वामी ने कहा, ‘‘बेचारे वैज्ञानिकों ने 10 से 12 साल कड़ी मेहनत की। ‘चंद्रयान-2’ के लिए कैबिनेट की मंजूरी 2008-09 में दी गई थी और इसी साल फंड जारी किया गया था।’’ उन्होंने कहा, ‘‘वह (मोदी) यहां प्रचार पाने के लिए आए, जैसे मानो ‘चंद्रयान-2’ का प्रक्षेपण उन्हीं के कारण हुआ।’’

    12:02 (IST)14 Sep 2019
    इसरो के पास अब एक हफ्ते का वक्त

    यान का आॅर्बिटर एकदम ठीक है और शान के साथ चंद्रमा की परिक्रमा कर रहा है। इसका कार्यकाल एक साल निर्धारित था, लेकिन अब इसरो ने कहा है कि पर्याप्त मात्रा में ईंधन होने के चलते आॅर्बिटर लगभग सात साल तक काम कर सकता है। यदि ‘विक्रम’ सॉफ्ट लैंंिडग में सफल रहता तो इसके भीतर से रोवर ‘प्रज्ञान’ बाहर निकलता और एक चंद्र दिवस यानी कि पृथ्वी के 14 दिन जितनी अवधि तक चंद्र सतह पर वैज्ञानिक प्रयोगों को अंजाम देता। इसरो वैज्ञानिक अब भी लैंडर से संपर्क की हरसंभव कोशिशों में लगे हैं।गत सात सितंबर को ‘सॉफ्ट लैंंिडग’ की प्रक्रिया के दौरान अंतिम क्षणों में ‘विक्रम’ का जमीनी स्टेशन से संपर्क टूट गया था। लैंडर को चांद की सतह पर ‘सॉफ्ट लैंंिडग’ के लिए डिजाइन किया गया था। इसके भीतर बंद रोवर का जीवनकाल एक चंद्र दिवस यानी कि धरती के 14 दिन के बराबर है। सात सितंबर की घटना के बाद से लगभग एक सप्ताह निकल चुका है तथा अब इसरो के पास मात्र एक सप्ताह शेष बचा है। इसरो ने कहा था कि वह 14 दिन तक लैंडर से संपर्क साधने की कोशिश करता रहेगा।

    11:19 (IST)14 Sep 2019
    क्यों हैं शानदार परिणाम मिलने की उम्मीद

    इसरो के पूर्व प्रमुख ए एस किरण कुमार ने कहा, ‘‘एक सिंथेटिक अपर्चर रडार की जगह (इस बार) हमारे पास दो फ्रीक्वेंसी रडार हैं। इस तरह इसमें अनेक नयी क्षमताएं हैं। वास्तव में यह बेहतर परिणाम हासिल करने में हमारी मदद करेगा।’’ पूर्व इसरो प्रमुख ने कहा, ‘‘हम शानदार परिणाम मिलने की उम्मीद कर रहे हैं क्योंकि हम अपने माइक्रोवेव ड्युअल फ्रीक्वेंसी सेंसरों का इस्तेमाल कर स्थायी रूप से अंधकार में छाए रहने वाले (चांद के) क्षेत्रों का मानचित्रीकरण करने में सफल होंगे।’’ उन्होंने कहा, ‘‘इसके अलावा हमारे पास अत्यंत उच्च गुणवत्ता वाले कैमरे तथा दीर्घ स्पेक्ट्रल रेंज है।’’बता दें कि इसरो के महत्वाकांक्षी दूसरे चंद्र मिशन के तहत ‘चंद्रयान-2’ ने गत 22 जुलाई को श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से उड़ान भरी थी। यान ने पृथ्वी और चंद्रमा की कक्षा सहित सभी चरणों को सफलतापूर्वक पूरा किया। हालांकि, गत सात सितंबर को चांद के दक्षिणी ध्रुव क्षेत्र में ‘सॉफ्ट लैंडिंग’ के प्रयास के अंतिम क्षणों में लैंडर ‘विक्रम’ का जमीनी स्टेशन से संपर्क टूट गया था।

    11:03 (IST)14 Sep 2019
    ‘चंद्रयान-2’ का ऑर्बिटर ‘‘बेहतर परिणाम’’ हासिल करने में सक्षम

    इस बीच, भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के पूर्व प्रमुख ए एस किरण कुमार ने कहा है कि लैंडर ‘विक्रम’ और इसके भीतर मौजूद रोवर ‘प्रज्ञान’ से संपर्क टूट जाने के बावजूद ‘चंद्रयान-2’ का आर्बिटर ‘‘बेहतर परिणाम’’ प्राप्त करने में सक्षम है। कुमार ने कहा, ‘‘अंतिम ‘लैंडिंग’ गतिविधि को छोड़कर अन्य सभी योजनाबद्ध गतिविधियां अक्षुण्ण हैं।’’उन्होंने कहा कि इस बार का ऑर्बिटर महत्वपूर्ण उपकरणों से लैस है जो एक दशक पहले भेजे गए ‘चंद्रयान-1’ की तुलना में अधिक शानदार परिणाम देने पर केंद्रित हैं। कुमार ने कहा कि पूर्व में नासा जेपीएल से ‘चंद्रयान-1’ द्वारा ले जाए गए दो उपकरणों की तुलना में इस बार के उपकरण तीन माइक्रोन से लेकर पांच माइक्रोन तक की स्पेक्ट्रम रेंज तथा रडारों, दोनों के मामलों में ‘‘शानदार प्रदर्शन’’ करने की क्षमता से लैस हैं।

    09:51 (IST)14 Sep 2019
    फ्रेंच वैज्ञानिक बोले, मीडिया का ध्यान केंद्रित होने के होती है निराशा

    नोबल पुरस्कार विजेता फ्रेंच भौतिकशास्त्री ने कहा, ‘‘यह एक तरह से प्रतिष्ठा से जुड़ी परियोजना है जिसमें आम तौर पर काफी धन खर्च होता है और जब आपको असफलता मिलती है या कोई दुर्घटना होती है तो मीडिया का ध्यान केंद्रित होने के कारण काफी निराशा होती है।’’भारत के दूसरे चंद्र मिशन के बारे में पूछे जाने पर हरोशे ने कहा, ‘‘जब मैंने अपनी रिसर्च की तो मुझे इसके परिणाम मिलने तक किसी की भी इसमें रुचि नहीं थी...और मुझे लगता है कि इस तरह की समस्याएं, इस तरह के हादसे तथा इस तरह की अप्रत्याशित घटनाएं अनुसंधान को धार देने का ही काम करती हैं।’’उन्होंने कहा कि अनुसंधान के दौरान इस तरह की चीजें आम होती हैं तथा भारत को अब आगे की ओर देखना चाहिए। फ्रांसीसी वैज्ञानिक ने कहा, ‘‘सवाल यह है कि आगे क्या होगा और यह केवल वैज्ञानिक मुद्दा नहीं है। यह राजनीतिक और वित्तीय मुद्दा है। किसी को देखना होगा कि समस्या कहां थी और फिर से दुरुस्त कर दोबारा कोशिश करें।’’

    08:57 (IST)14 Sep 2019
    फ्रेंच नोबल पुरस्कार विजेता वैज्ञानिक ने भी बढ़ाई हिम्मत

    नोबेल पुरस्कार विजेता फ्रांसीसी भौतिक विज्ञानी सर्जे हरोशे ने शुक्रवार को कहा कि समस्याएं, हादसे और अप्रत्याशित घटनाएं अनुसंधान को धार देने का काम करती हैं तथा भारत को चांद के दक्षिणी ध्रुव क्षेत्र में ऐतिहासिक ‘सॉफ्ट लैंडिंग’ के प्रयास के दौरान आई खामी के बाद आगे की ओर देखना चाहिए। वर्ष 2012 में भौतिकी के क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार जीतने वाले 75 वर्षीय हरोशे ''नोबेल प्राइज सीरीज इंडिया 2019'' के लिए भारत में हैं और यह देश में इस तरह की तीसरी श्रृंखला है। फ्रांसीसी वैज्ञानिक ने कहा कि ‘चंद्रयान-2’ मिशन एक बड़ी वैज्ञानिक परियोजना है और इस तरह की परियोजनाओं में आम तौर पर सरकार का काफी योगदान होता है।

    08:47 (IST)14 Sep 2019
    अब भी चार्ज हो सकता है विक्रम

    इसरो अधिकारी ने कहा कि सही दिशा में होने की स्थिति में यह सौर पैनलों के चलते अब भी ऊर्जा उत्पन्न कर सकता है और बैटरियों को पुन: चार्ज कर सकता है। लेकिन इसकी संभावना, उत्तरोत्तर कम होती जा रही है। इसरो के एक अन्य शीर्ष अधिकारी ने कहा कि चंद्र सतह पर ‘विक्रम’ की ‘हार्ड लैंंिडग’ ने इससे पुन: संपर्क को कठिन बना दिया है क्योंकि हो सकता है कि यह ऐसी दिशा में न हो जिससे उसे सिग्नल मिल सकें।उन्होंने चंद्र सतह पर लगे झटके से लैंडर को नुकसान पहुंचने की भी आशंका जतायी।

    08:24 (IST)14 Sep 2019
    गुजरते वक्त के साथ कमजोर होती जा रही संभावना

    भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के वैज्ञानिकों की तमाम कोशिशों के बावजूद लैंडर से अब तक संपर्क स्थापित नहीं हो पाया है। हालांकि, ‘चंद्रयान-2’ के आॅर्बिटर ने ‘हार्ड लैंडिंग’ के कारण टेढ़े हुए लैंडर का पता लगा लिया था और इसकी ‘थर्मल इमेज’ भेजी थी।भारत के अंतरिक्ष वैज्ञानिक लैंडर से संपर्क साधने की हर रोज कोशिश कर रहे हैं, लेकिन प्रत्येक गुजरते दिन के साथ संभावनाएं क्षीण होती जा रही हैं। इसरो के एक अधिकारी ने पीटीआई-भाषा से कहा, ‘‘उत्तरोत्तर, आप कल्पना कर सकते हैं कि हर गुजरते घंटे के साथ काम मुश्किल होता जा रहा है। बैटरी में उपलब्ध ऊर्जा खत्म हो रही होगी और इसके ऊर्जा हासिल करने तथा परिचालन के लिए कुछ नहीं बचेगा।’’ उन्होंने कहा, ‘‘प्रत्येक गुजरते मिनट के साथ स्थिति केवल जटिल होती जा रही है...‘विक्रम’ से सपंर्क स्थापित होने की संभावना कम होती जा रही है।’’यह पूछे जाने पर कि क्या संपर्क स्थापित होने की थोड़ी-बहुत संभावना है, अधिकारी ने कहा कि यह काफी दूर की बात है।

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