ताज़ा खबर
 

Chandrayaan 2: विक्रम लैंडर से फिर होगा संपर्क? ISRO ने नहीं छोड़ी है उम्मीद

मिशन से जुड़े इसरो के एक अधिकारी ने एक अंतरिक्ष यान से फिर संपर्क बहाल कर लेने के इसरो के अनुभव को याद करते हुए कहा कि ‘विक्रम’ के मामले में स्थिति भिन्न है।

Author नई दिल्ली | Updated: Sep 11, 2019 10:51:39 am
चंद्रयान-2 का ऑर्बिटर फिलहाल लैंडर विक्रम से संपर्क करने की कोशिश कर रहा है। (पीटीआई फोटो)

लैंडर ‘विक्रम’ का अंतिम समय में जमीनी स्टेशन से संपर्क टूटने तक ‘चंद्रयान-2’ मिशन के त्रुटिरहित एवं सटीक प्रक्षेपण तथा शानदार प्रबंधन ने इसरो को ‘ऑर्बिटर’ के मोर्चे पर अत्यंत गौरवान्वित किया है। यह बात अंतरिक्ष एजेंसी के एक अधिकारी ने कही। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने 2,379 किलोग्राम वजनी ऑर्बिटर का मिशन काल एक साल तय किया था, लेकिन अब यह लगभग सात साल तक काम कर सकता है। इसरो के एक अधिकारी ने कहा, ‘‘ऑर्बिटर में पर्याप्त ईंधन मौजूद है। यान को चांद की कक्षा में प्रवेश कराने तक हमने किसी त्रुटि का सामना नहीं किया। अतिरिक्त ईंधन का बिलकुल भी इस्तेमाल नहीं किया गया। हर चीज योजना के अनुरूप हुई। हमारे पास (ऑर्बिटर में) अतिरिक्त ईंधन मौजूद है।’’

अंतरिक्ष एजेंसी के एक अन्य अधिकारी ने कहा, ‘‘जीएसएलवी-मार्क ।।। (जिसने अंतरिक्ष यान को प्रक्षेपित किया) के शानदार प्रदर्शन और शानदार मिशन प्रबंधन की वजह से हमारे पास इसे (आर्बिटर) सात साल तक आगे जारी रखने के लिए पर्याप्त ईंधन है।’’इसरो ने यह भी कहा कि सटीक प्रक्षेपण और उत्कृष्ट मिशन प्रबंधन ने ऑर्बिटर का जीवनकाल निर्धारित एक वर्ष की जगह लगभग सात साल सुनिश्चित कर दिया है। अंतरिक्ष एजेंसी ने लैंडर ‘विक्रम’ का जमीनी स्टेशन से संपर्क टूट जाने से प्रभावित हुए बिना कहा कि ‘चंद्रयान-2’ मिशन के 90-95 प्रतिशत उद्देश्य पूरे हुए हैं जिनसे चंद्र विज्ञान को लगातार मदद मिलती रहेगी।

आर्बिटर ने शानदार प्रदर्शन करते हुए चांद की सतह पर पड़े ‘विक्रम’ का भी पता लगा लिया और उसकी तस्वीर इसरो को भेज दी। यह उल्लेख करते हुए कि ऑर्बिटर को पहले ही चांद की वांछित कक्षा में स्थापित किया जा चुका है, इसरो ने कहा, ‘‘यह अपने आठ अत्याधुनिक वैज्ञानिक उपकरणों का इस्तेमाल कर चंद्रमा की उत्पत्ति के बारे में हमारी समझ में वृद्धि करेगा और इसके दक्षिणी ध्रुव क्षेत्र में मौजूद खनिजों तथा जलीय कणों का मानचित्रण करेगा।’’ इसरो ने कहा, ‘‘ऑर्बिटर का कैमरा किसी भी चंद्र मिशन में इस्तेमाल किया गया अब तक का सबसे उच्चतम गुणवतता वाला कैमरा (0.3 मीटर) है। यह उच्च गुणवत्ता वाली तस्वीरें उपलब्ध कराएगा जो वैश्विक वैज्ञानिक समुदाय के लिए अत्यंत लाभकारी होंगी।’’

Live Blog

Highlights

    12:26 (IST)10 Sep 2019
    इसरो को है अपने मिशन पर गर्व

    लैंडर ‘विक्रम’ का अंतिम समय में जमीनी स्टेशन से संपर्क टूटने तक ‘चंद्रयान-2’ मिशन के त्रुटिरहित एवं सटीक प्रक्षेपण तथा शानदार प्रबंधन ने इसरो को ‘ऑर्बिटर’ के मोर्चे पर अत्यंत गौरवान्वित किया है। यह बात अंतरिक्ष एजेंसी के एक अधिकारी ने कही। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने 2,379 किलोग्राम वजनी आॅर्बिटर का मिशन काल एक साल तय किया था, लेकिन अब यह लगभग सात साल तक काम कर सकता है। इसरो के एक अधिकारी ने कहा, ‘‘आॅर्बिटर में पर्याप्त ईंधन मौजूद है। यान को चांद की कक्षा में प्रवेश कराने तक हमने किसी त्रुटि का सामना नहीं किया। अतिरिक्त ईंधन का बिलकुल भी इस्तेमाल नहीं किया गया। हर चीज योजना के अनुरूप हुई। हमारे पास (आॅर्बिटर में) अतिरिक्त ईंधन मौजूद है।’’

    11:00 (IST)10 Sep 2019
    विक्रम की ये बातें जानते हैं आप?

    ‘विक्रम’ में तीन उपकरण-रेडियो एनाटमी ऑफ मून बाउंड हाइपरसेंसिटिव आयनोस्फेयर एंड एटमस्फेयर (रम्भा), चंद्राज सरफेस थर्मो फिजिकल एक्सपेरीमेंट (चेस्ट) और इंस्ट्रूमेंट फॉर लूनर सिस्मिक एक्टिविटी (इल्सा) लगे हैं। ‘चंद्रयान-2’ मिशन पर 978 करोड़ रुपये की लागत आई है। भारत अब तक का ऐसा एकमात्र देश है जिसने चांद के अनदेखे दक्षिणी ध्रुव क्षेत्र पर पहुंचने का प्रयास किया है। मिशन के ‘सॉफ्ट लैंडिंग’ चरण में यदि सफलता मिलती तो रूस, अमेरिका और चीन के बाद भारत ऐसा करने वाला दुनिया का चौथा देश बन जाता।

    10:30 (IST)10 Sep 2019
    कितनी है विक्रम से दोबारा संपर्क की संभावना?

    मिशन से जुड़े इसरो के एक अधिकारी ने भूस्थिर कक्षा में संपर्क से बाहर हुए एक अंतरिक्ष यान से फिर संपर्क बहाल कर लेने के इसरो के अनुभव को याद करते हुए कहा कि ‘विक्रम’ के मामले में स्थिति भिन्न है। वह पहले ही चंद्रमा की सतह पर पड़ा है और उसकी दिशा फिर से नहीं बदली जा सकती। अधिकारी ने कहा कि एक महत्वपूर्ण पहलू एंटीना की स्थिति का है। इसकी दिशा या तो जमीनी स्टेशन की तरफ होनी चाहिए या फिर ऑर्बिटर की तरफ। उन्होंने कहा, ‘‘ऐसे अभियान बहुत कठिन होते हैं। साथ ही संभावनाएं भी हैं और हमें हाथ थामकर इंतजार करना चाहिए।’’ अधिकारी ने कहा कि हालांकि, लैंडर का ऊर्जा उत्पन्न करना कोई मुद्दा नहीं है क्योंकि इसमें चारों तरफ सौर पैनल लगे हैं। इसके भीतर बैटरियां भी लगी हैं जो बहुत ज्यादा इस्तेमाल नहीं हुई हैं।

    09:52 (IST)10 Sep 2019
    14 दिन तक संपर्क की कोशिश करेगा इसरो

    लैंडर और रोवर की मिशन अवधि एक चंद्र दिवस यानी कि धरती के 14 दिनों के बराबर है। इसरो अध्यक्ष के. सिवन ने शनिवार को कहा था कि भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी लैंडर से संपर्क साधने की 14 दिन तक कोशिश करेगी। उन्होंने रविवार को लैंडर की तस्वीर मिलने के बाद यह बात एक बार फिर दोहराई।अंतरिक्ष एजेंसी के एक अधिकारी ने कहा, ‘‘जब तक (लैंडर में) सबकुछ सही नहीं होगा, यह (दोबारा संपर्क स्थापित करना) बहुत मुश्किल है। संभावनाएं कम हैं। अगर ‘सॉफ्ट लैंंिडग’ हुई हो और सभी प्रणालियां काम कर रही हों, तभी संपर्क स्थापित किया जा सकता है। फिलहाल उम्मीद कम है।’’ इसरो के एक अन्य वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि लैंडर के फिर सक्रिय होने की संभावनाओं से इनकार नहीं किया जा सकता, लेकिन कुछ सीमाएं हैं।

    08:54 (IST)10 Sep 2019
    पाकिस्तानी अंतरिक्ष यात्री ने कहा- कौन सा देश आगे बढ़ता है फर्क नहीं पड़ता

    पाकिस्तान की पहली महिला अंतरिक्ष यात्री नमिरा सलीम ने कहा कि दक्षिण एशिया में अंतरिक्ष के क्षेत्र में क्षेत्रीय विकास शानदार है। उन्होंने कहा, ‘‘दक्षिण एशिया में अंतरिक्ष के क्षेत्र में क्षेत्रीय विकास शानदार है और इससे फर्क नहीं पड़ता कि कौन देश अंतरिक्ष में आगे बढ़ता है, सभी राजनीतिक सीमाएं मिट जाती हैं और अंतरिक्ष में हमें एकजुट करती हैं, जो हमें पृथ्वी पर विभाजित करती हैं।’’ सलीम का यह बयान भारत द्वारा गत पांच अगस्त को जम्मू कश्मीर को विशेष दर्जा वापस लेने और राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों में बांटने के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तीखी बयानबाजी के बीच आया है।

    08:23 (IST)10 Sep 2019
    साबुत है लैंडर, नहीं टूटा

    भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के एक अधिकारी ने सोमवार को कहा कि ‘चंद्रयान-2’ का लैंडर ‘विक्रम’ चांद की सतह पर साबुत अवस्था में है और यह टूटा नहीं है। हालांकि, ‘हार्ड लैंडिंग’ की वजह से यह झुक गया है तथा इससे पुन: संपर्क स्थापित करने की हरसंभव कोशिश की जा रही है।‘विक्रम’ का शनिवार को ‘सॉफ्ट लैंडिंग’ के प्रयास के अंतिम क्षणों में उस समय इसरो के नियंत्रण कक्ष से संपर्क टूट गया था जब यह चांद की सतह से 2.1 किलोमीटर की ऊंचाई पर था। लैंडर के भीतर ‘प्रज्ञान’ नाम का रोवर भी है।

    08:09 (IST)10 Sep 2019
    चंद्रयान 2 पर नागपुर पुलिस के दिलचस्प ट्वीट्स

    नागपुर पुलिस चंद्रयान-2 के लैंडर विक्रम को लेकर अपने एक दिलचस्प ट्वीट की वजह से इंटरनेट पर छाई हुई है। इस ट्वीट में पुलिस ने ‘विक्रम’ से जवाब देने का अनुरोध करते हुए कहा कि सिग्नल तोड़ने के लिये उसका चालान नहीं किया जाएगा। नागपुर पुलिस ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर कहा, ‘‘प्रिय विक्रम, कृपया जवाब दो। हम सिग्नल तोड़ने पर तुम्हारा चालान नहीं काटेंगे।’’सोशल मीडिया पर नागपुर पुलिस के इस ट्वीट को खूब पसंद किया जा रहा है और उसके हास्यबोध की भी तारीफ हो रही है। ट्वीट को कुछ ही घंटों के अंदर ही 31 हजार से ज्यादा यूजर्स ने लाइक किया और नौ हजार से ज्यादा लोगों ने इसे रीट्वीट किया। नागपुर पुलिस ने फिल्म शोले के एक मशहूर संवाद का इस्तेमाल करते हुए एक और ट्वीट साझा कर इसरो के ऐतिहासिक मिशन की सराहना की। इस ट्वीट में कहा गया, ‘‘दूसरों ने कितने अटेंप्ट किये...सरदार 9...और इसरो ने...सरदार एक। दूसरों ने 9 और इसरो ने 1..फिर भी इतनी सक्सेस मिल गई। बहुत गर्व की बात है ये।’’

    07:46 (IST)10 Sep 2019
    सुरक्षित है विक्रम लैंडर

    भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के एक अधिकारी ने सोमवार को कहा , ‘‘आर्बिटर के कैमरे से भेजी गईं तस्वीरों के मुताबिक यह तय जगह के बेहद नजदीक एक ‘हार्ड लैंंडिंग’ थी। लैंडर वहां साबुत है, उसके टुकड़े नहीं हुए हैं। वह झुकी हुई स्थिति में है।’’उल्लेखनीय है कि चंद्रयान..2 के लैंडर ‘विक्रम’ की शुक्रवार देर रात चंद्रमा पर सॉफ्ट लैंंिडग कराने की भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) की योजना उम्मीद के अनुरूप सफल नही हो पायी थी । लैंडर जब चंद्रमा से करीब 2.1 किलोमीटर दूर था तब उसका जमीनी स्टेशन से सम्पर्क टूट गया था। इसे चंद्रमा के लिए देश के दूसरे अभियान का ‘‘सबसे जटिल’’ चरण माना जा रहा था।

    07:39 (IST)10 Sep 2019
    चीन के आम लोगों ने कहा, भारत सम्मान पाने का हकदार

    इंटरनेट पर चीन के व्यक्ति ने कहा कि भारतीय वैज्ञानिकों ने अंतरिक्ष खोज के लिए महान प्रयास और त्याग किया है। कोरा जैसी साइट झिहु पर एक व्यक्ति ने कहा, ‘‘हम सभी गटर में हैं, लेकिन हममें से कुछ लोग सितारों की ओर देख रहे हैं। जो भी देश बहादुरी के साथ अंतरिक्ष में खोज का प्रयत्न कर रहे हैं, वे हमारी ओर से सम्मान पाने के हकदार हैं।’’ ग्लोबल टाइम्स ने चीनी अंतरिक्ष विशेषज्ञ पांग झिहाओ के हवाले से कहा कि संभव है कि लैंडर ‘विक्रम’ का संपर्क संभवत: एटिट्यूड कंट्रोल थ्रस्टर्स (एसीटी) के विफल होने से टूटा होगा।

    07:38 (IST)10 Sep 2019
    पाकिस्तानी महिला अंतरिक्ष यात्री ने भी की तारीफ

    पाकिस्तान की पहली महिला अंतरिक्ष यात्री नमिरा सलीम ने कराची की पत्रिका ‘साइंशिया’ को जारी एक बयान में कहा, ‘‘मैं भारत और इसरो को चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर विक्रम लैंडर की एक सफल सॉफ्ट लैंंिडग कराने के उसे ऐतिहासिक प्रयास के लिए बधाई देती हूं। चंद्रयान..2 चंद्रमा मिशन वास्तव में दक्षिण एशिया के लिए एक बड़ी छलांग है जो न केवल क्षेत्र बल्कि पूरे वैश्चिक अंतरिक्ष उद्योग को गौर्वांवित बनाता है।’’ सलीम अंतरिक्ष में जाने वाली पहली पाकिस्तानी हैं। वह सर रिचर्ड ब्रैनसन के वर्जिन गैलेक्टिक से अंतरिक्ष में गई थीं।

    07:31 (IST)10 Sep 2019
    चीन के लोग सोशल मीडिया पर कर रहे भारत के चंद्रयान-2 मिशन की तारीफ

    चीन में बहुत से लोगों ने ट्विटर जैसी माइक्रो ब्लॉगिंग साइट ‘साइना वीबो’ पर भारतीय वैज्ञानिकों से उम्मीद न छोड़ने को कहा। सरकार संचालित ग्लोबल टाइम्स एक इंटरनेट उपभोक्ता के हवाले से कहा, ‘‘अंतरिक्ष खोज में सभी मनुष्य शामिल हैं। इससे फर्क नहीं पड़ता कि किस देश को सफलता मिली, इसे हमारी प्रशंसा मिलनी चाहिए और जो अस्थायी रूप से विफल हुए हैं, उनका भी हौसला बढ़ाया जाना चाहिए।’’

    Next Stories
    1 पाक में एएसआइ बनने वाली पहली हिंदू
    2 अंतरिक्ष अनुसंधान: चांद पर आर्यभट्ट से लेकर डॉ भाभा तक
    3 NRC पर संघ ने भी उठाए सवाल, सूची में गड़बड़ी के लगे आरोपों पर कहा- समाधान निकाले सरकार
    जस्‍ट नाउ
    X