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कांग्रेस को टीडीपी और टीआरएस ने दिया झटका, कहा- कांग्रेस का साथ गंवारा नहीं

टीआरएस चीफ और तेलंगाना के सीएम चंद्रशेखर राव पहले ही गैर भाजपाई और गैर-कांग्रेसी दलों को एकजुट करने की कोशिश कर रहे हैं। इसके लिए वह कई बार क्षेत्रीय दलों के नेताओं के साथ मुलाकात कर चुके हैं।

Author Published on: June 1, 2018 6:43 PM
टीडीपी और टीआरएस का ऐलान कांग्रेस के साथ जाने का नहीं कोई प्लान। (image source-Facebook)

2019 लोकसभा चुनावों के लिए कांग्रेस, भाजपा के खिलाफ महागठबंधन बनाने की तैयारी में जुटी है। कर्नाटक में एचडी कुमारस्वामी के शपथ ग्रहण समारोह में जिस तरह विभिन्न विपक्षी पार्टियां साथ दिखाई दी, उससे महागठबंधन की उम्मीद बंधती दिखाई दी थी, लेकिन अब दक्षिण भारत के ही 2 प्रमुख पार्टियों ने कांग्रेस को करारा झटका दिया है। दरअसल तेलंगाना की सत्तासीन पार्टी टीआरएस और आंध्र प्रदेश की सत्तासीन पार्टी तेदेपा ने साफ कर दिया है कि उनका कांग्रेस के साथ जाने का कोई इरादा नहीं है। बता दें कि तेलंगाना में कांग्रेस मुख्य विपक्षी पार्टी है, वहीं आंध्र प्रदेश में कांग्रेस से टूटकर बनी वाईएसआर कांग्रेस मुख्य विपक्षी पार्टी की भूमिका में है। हालांकि दोनों ही राज्यों में कांग्रेस अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही है।

एचडी कुमारस्वामी के शपथ ग्रहण समारोह में क्यों हुए थे शामिल?– तेदेपा चीफ चंद्रबाबू नायडू ने एचडी कुमारस्वामी के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने और विपक्षी एकता के मेगा शो का हिस्सा बनने पर सफाई पेश करते हुए कहा कि वह सिर्फ वहां एचडी देवगौड़ा के निमंत्रण पर गए थे। इस कार्यक्रम में सभी नेताओं ने मंच साझा किया, लेकिन कांग्रेस और टीडीपी के बीच ऐसा कुछ भी नहीं हैं। बता दें कि तेदेपा हाल ही में भाजपा का दामन छोड़कर एनडीए से अलग हुई है और तेदेपा की कोशिश भाजपा को 2019 के चुनाव में रोकने की है।

फेडरल फ्रंट का कर सकते हैं गठनः टीआरएस चीफ और तेलंगाना के सीएम चंद्रशेखर राव पहले ही गैर भाजपाई और गैर-कांग्रेसी दलों को एकजुट करने की कोशिश कर रहे हैं। इसके लिए वह कई बार क्षेत्रीय दलों के नेताओं के साथ मुलाकात कर चुके हैं। इंडिया टुडे से बातचीत में टीडीपी प्रवक्ता लंका दिनाकर ने साफ कहा है कि उनकी पार्टी कांग्रेस और बीजेपी दोनों से ही बराबर दूरी बनाए रखना चाहती है। 2019 में सभी क्षेत्रीय दल मजबूती से भाजपा का सामना करने के लिए तैयार हैं। टीआरएस प्रवक्ता ने यह भी कहा कि चंद्रबाबू नायडू के पास क्षेत्रीय दलों को साथ लाने का काफी अनुभव है और पीएम तय करने में टीडीपी अहम भूमिका निभाएगी। तेदेपा और टीआरएस के ऐलान के बाद 2019 में महागठबंधन की कोशिशों को बड़ा झटका लगा है।

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