पश्चिम बंगाल में चुनाव बाद हिंसा के बीच बीजेपी नेता सुवेंदु अधिकारी के करीबी और उनके पीए चंद्रनाथ रथ की हत्या को लेकर राजनीतिक माहौल लगातार गरमाता जा रहा है। अब इस मामले में चंद्रनाथ रथ की मां हासिरानी रथ का दर्द छलक पड़ा है। उन्होंने अपने बेटे की हत्या के लिए सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस पर गंभीर आरोप लगाए हैं और दोषियों के लिए कड़ी सजा की मांग की है। चंद्रनाथ के भाई देव कुमार ने बताया कि उनकी किसी से कोई दुशमनी नहीं थी।

‘दोषियों को फांसी नहीं, आजीवन कारावास की सजा हो’

उत्तर 24 परगना के चांदीपुर में मीडिया से बात करते हुए हासिरानी रथ ने कहा, ”मैं चाहती हूं कि दोषियों को सजा मिले। मैं एक मां हूं, इसलिए मैं नहीं चाहती कि उन्हें फांसी हो। लेकिन मैं चाहती हूं कि उन्हें आजीवन कारावास मिले।”

उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी के सत्ता में आने के बाद उनके परिवार को निशाना बनाया गया। उनका कहना था कि राज्य में लगातार कानून-व्यवस्था बिगड़ती जा रही है और सत्ताधारी पार्टी के नेताओं द्वारा पहले से भड़काऊ बयान दिए जा रहे थे।

हासिरानी रथ ने कहा, “हमारे प्रदेश अध्यक्ष और नेता लगातार राज्य में शांति बनाए रखने की बात कह रहे थे। लेकिन दूसरी तरफ कुछ लोग खुलेआम धमकी दे रहे थे कि 4 तारीख के बाद दिल्ली के बाप भी नहीं बचा पाएंगे। अब वही सब हो रहा है।” उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि अगर उनके बेटे की मौत किसी हादसे में होती तो शायद इतना दुख नहीं होता। लेकिन जिस तरह से ‘बदमाशों ने तड़पा-तड़पाकर’ उसकी हत्या की गई उसे वह कभी नहीं भूल सकतीं। ये सब तृणमूल की रची हुई साजिश है।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सुवेंदु अधिकारी द्वारा ममता बनर्जी को हराने के बाद से उनका परिवार लगातार खतरे में था। उन्होंने कहा, ”जब से सुवेंदु बाबू ने ममता बनर्जी को हराया है तब से हमारे परिवार पर खतरा मंडरा रहा है।”

पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, चंद्रनाथ रथ की मां ने अपने बेटे के हत्यारों के लिए उम्रकैद की सजा की मांग की है। उन्होंने दावा किया कि यह हत्या भवानीपुर में ममता बनर्जी की सुवेंदु अधिकारी से हार का बदला लेने के लिए की गई।

‘चंद्रनाथ की किसी से कोई दुश्मनी नही थी’

चंद्रनाथ के भाई देव कुमार ने कहा, ”कल वह हमारे साथ बैठा था और हमसे बातचीत कर रहा था। दोपहर 2 बजे के बाद वह कोलकाता के लिए निकला था। उसकी किसी से कोई दुश्मनी नहीं थी।”

जांच के लिए SIT गठित

गौर करने वाली बात है कि बुधवार देर रात मध्यमग्राम के दोहरिया इलाके में बाइक सवार हमलावरों ने चंद्रनाथ रथ की गाड़ी को रोककर उन पर गोलीबारी की थी। इस हमले में उनके सुरक्षाकर्मी बुद्धदेव भी गंभीर रूप से घायल हुए हैं। मामले की जांच के लिए पश्चिम बंगाल पुलिस ने वरिष्ठ अधिकारियों की एक हाई-लेवल एसआईटी गठित करने का फैसला किया है।

पुलिस अधिकारी ने कहा कि एक फोरेंसिक टीम गुरुवार सुबह घटनास्थल पर पहुंची और नमूने एकत्र किए। अधिकारी ने बताया कि अपराध जांच विभाग (सीआईडी) के अधिकारी भी मौके पर मौजूद थे। अधिकारी ने कहा, ”परिस्थितिजन्य साक्ष्यों को देखते हुए ऐसा लगता है कि हत्या पूर्व नियोजित थी। जांचकर्ता घटनास्थल और आसपास के इलाकों की सीसीटीवी फुटेज खंगाल रहे हैं और हमलावरों का पता लगाने के लिए पुलिस के कई दल गठित किए गए हैं।”

गोलाबारी करने के बाद फरार हुए हमलावर

जानकारी के अनुसार, मोटरसाइकिल सवार हमलावरों ने रथ की कार को रात करीब साढ़े 10 बजे डोलतला और मध्यमग्राम चौमाथा के बीच दोहरिया के पास रोका और वे गोलीबारी करने के बाद फरार हो गए। पुलिस अधिकारियों ने कहा, ”विस्तृत जांच शुरू कर दी गई है। हम कई सुरागों पर काम कर रहे हैं।” उन्होंने कहा कि निष्कर्षों से संकेत मिलता है कि हमलावरों ने रथ के वाहन को समन्वित तरीके से रोका और फिर नजदीक से कई गोलियां चलाईं। जांचकर्ताओं को संदेह है कि रथ के वाहन को पहले दोहरिया चौराहे के पास एक छोटे चारपहिया वाहन से रोका गया जिसके बाद मोटरसाइकिल सवार हमलावरों में से एक ने रथ की कार पर गोली चलाई। पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) सिद्धनाथ गुप्ता ने घटनास्थल पर पत्रकारों से कहा, ”रथ की कार को कथित तौर पर रोकने वाले एक संदिग्ध वाहन को जब्त किया गया है। हालांकि, उस पर लगी नंबर प्लेट फर्जी पाई गई।”

कौन थे चंद्रनाथ रथ

41 वर्षीय चंद्रनाथ रथ मूल रूप से पूर्व मेदिनीपुर जिले के चांदीपुर के रहने वाले थे। चंद्रनाथ रथ ने अपनी स्कूली पढ़ाई रामकृष्ण मिशन से पूरी की थी। लगभग दो दशक तक भारतीय वायुसेना में उन्होंने अपनी सेवाएं दी थीं। वॉलिंटरी रिटायरमेंट के बाद उन्होंने कुछ समय तक कॉर्पोरेट सेक्टर में भी काम किया। इसके बाद वह सक्रिय राजनीति में संगठनात्मक और प्रशासनिक काम में आ गए। मेदिनीपुर का यही इलाका बंगाल की राजनीति में अधिकारी के उभार का प्रमुख राजनीतिक गढ़ माना जाता है। स्वभाव से शांत और लो-प्रोफाइल रहने वाले रथ कई वर्षों तक सुवेंदु अधिकारी के करीबी सहयोगी होने के बावजूद सार्वजनिक रूप से ज्यादा चर्चा में नहीं रहे। अधिकारी की तरह ही उनके परिवार का भी पहले तृणमूल कांग्रेस से जुड़ाव रहा था।