झारखंड के एक 40 साल के व्यक्ति 10 जनवरी से सऊदी अरब में लापता है। परिवार ने बताया कि उस दिन वह अपने आवास से निकलकर भारत लौटने के लिए जेद्दा एयरपोर्ट की तरफ जा रहा था। परिवार को शक है कि एयरपोर्ट तक पहुंचा ही नहीं। झारखंड के सिंदरी के रहने वाले चंदेशर कुमार जुलाई 2025 में गुजरात स्थित एक एजेंट के माध्यम से काम के लिए सऊदी अरब गए थे। उनके भतीजे साहिल कुमार ने बताया कि चंदेशर पहले सऊदी अरब और दुबई में काम कर चुके थे और उस क्षेत्र से अच्छी तरह परिचित थे।

साहिल कुमार के अनुसार, चंदेशर 24 जुलाई 2025 को मुंबई से रवाना हुए और अल जमिल मेटल वर्क्स फैक्ट्री में कॉन्ट्रैक्ट के आधार पर काम करने लगे। शुरुआत में कंपनी ने उन्हें तीन महीने का वीजा जारी किया, जिसे बाद में यह भरोसा देकर बढ़ा दिया गया कि उनका रोजगार जारी रहेगा।

साहिल ने बताया कि 8 जनवरी को चंदेशर ने परिवार को जानकारी दी कि उन्हें सर्दी-खांसी हो गई है। उन्होंने बताया कि कंपनी ने उन्हें अपने खर्च पर भारत लौटने के लिए कहा है और ईद के बाद टिकट की रकम वापस करने का वादा किया है। इसके बाद परिवार ने 10 जनवरी को जेद्दा से अहमदाबाद के लिए इंडिगो की फ्लाइट से उनकी वापसी का टिकट बुक कराया और आगे वाराणसी और धनबाद के लिए ट्रेन से यात्रा की योजना बनाई।

क्या था चंदेशर का लास्ट मैसेज?

साहिल कुमार ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया, “10 जनवरी को दोपहर करीब 3:30 बजे, मेरे मामा ने हमें अपना आखिरी मैसेज भेजा जिसमें उन्होंने बताया कि वे एयरपोर्ट के लिए निकल रहे हैं। उन्होंने लिखा, ‘मैं एयरपोर्ट जा रहा हूं, जय माता दी।’ इसके बाद उनका फोन बंद हो गया। वे अपने आवास और एयरपोर्ट के बीच में ही गायब हो गए।”

साहिल ने बताया कि परिवार ने पहले सोचा कि चंदेशर के पास एयरपोर्ट पर इंटरनेट की सुविधा नहीं होगी। उन्होंने रात भर उड़ान की स्थिति पर नजर रखी और अहमदाबाद में उड़ान के उतरने की पुष्टि होने के बाद, उनके मोबाइल नंबर को रिचार्ज किया। हालांकि, उनका फोन बंद रहा और व्हाट्सएप पर सिर्फ एक टिक मार्क दिखाई दे रहा था।

परिवार ने इंडिगो एयरलाइंस से किया संपर्क

बाद में परिवार ने इंडिगो एयरलाइंस से संपर्क किया और उन्हें पीएनआर नंबर और रजिस्टर्ड डिटेल दी। साहिल ने बताया, “एयरलाइन ने हमें बताया कि उसने फ्लाइट के लिए चेक-इन नहीं किया था, जिसका मतलब है कि वह विमान में सवार ही नहीं हुआ।” उन्होंने आगे कहा कि परिवार का मानना ​​है कि चंदेशर अपने कमरे से एयरपोर्ट के लिए निकला था लेकिन वहां पहुंचा ही नहीं।

साहिल ने बताया कि एंप्लोयर से स्पष्टीकरण मांगने के प्रयास विफल रहे। उन्होंने कहा, “कंपनी और उसके कर्मचारियों ने कहा कि उन्होंने टिकट या परिवहन की व्यवस्था नहीं की थी और उन्हें नहीं पता कि वह कहां गया है।”

लापता होने के बाद परिवार ने सांसद और विधायक से किया संपर्क

लापता होने के बाद परिवार ने धनबाद सांसद धुलू महतो, झरिया विधायक रागिनी सिंह और धनबाद के डीसी सहित कई अधिकारियों से संपर्क किया, जिन्होंने मामले को झारखंड श्रम विभाग को भेज दिया। इसके बाद मामले को स्टेट माइग्रेंट कंट्रोल रूम ने अपने हाथ में लिया और सऊदी अरब स्थित भारतीय दूतावास को सौंप दिया गया।

स्टेट माइग्रेंट कंट्रोल रूम की एक अधिकारी शिखा लकरा ने कहा कि जेद्दा स्थित भारतीय वाणिज्य दूतावास ने डिटेंशन सेंटरों और जेलों में जांच सहित कई पूछताछ की थी, लेकिन चंदेशर कुमार किसी भी जेल में बंद नहीं पाया गया। लकरा ने कहा कि उनके साथ शेयर किए गए लिखित जवाब में भारतीय दूतावास ने कहा कि इस मामले को सऊदी अधिकारियों के सामने उठाया गया था, लेकिन अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली है।

भारतीय दूतावास ने राज्य अधिकारियों के साथ शेयर किए गए जवाब में कहा, “जेद्दा स्थित भारतीय वाणिज्य दूतावास ने इस मामले को संबंधित जेल अधिकारियों के समक्ष तुरंत उठाया। कुमार किसी जेल में बंद नहीं हैं। कुमार के ठिकाने का पता लगाने के लिए सऊदी अधिकारियों से भी संपर्क किया गया है। हालांकि, स्थानीय अधिकारियों से अभी तक कोई जवाब नहीं मिला है।” लकरा ने कहा कि दूतावास ने परिवार को आश्वासन दिया है कि इस मामले से संबंधित कोई भी जानकारी उन्हें तुरंत दी जाएगी।

चंदेशर के परिवार में कौन-कौन हैं?

चंदेशर के परिवार में उनकी बुजुर्ग मां, तीन अविवाहित बहनें और एक अलग रह रही पत्नी शामिल हैं। उनकी एक बेटी भी है। उसके लापता होने के लगभग एक महीने बाद परिवार ने कहा कि उन्हें उसके लापता होने के बारे में कोई जानकारी नहीं मिली है और उन्होंने सरकार से तत्काल हस्तक्षेप करने की अपील की है। बता दें कि इससे पहले भी सऊदी अरब में फंसे भारतीय मजदूर ने पीएम नरेंद्र मोदी से लगाई मदद की गुहार थी। पढ़ें पूरी खबर…