राम मंदिर दान विवाद के बीच, श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि ने मंगलवार को द इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि काम का विकेंद्रीकरण किया जाना चाहिए था और पहले ही सभी संभावित समस्याओं का समाधान कर लिया जाना चाहिए था। उन्होंने यह भी कहा कि ट्रस्ट से जुड़े नौकरशाहों और एसबीआई अधिकारियों से भी यह अपेक्षा की जाती थी कि वे निगरानी रखें और स्थिति बिगड़ने से पहले ही कमियों को उजागर करें।

सोमवार को, ट्रस्ट ने अपने महासचिव चंपत राय और सदस्य अनिल मिश्रा का इस्तीफा स्वीकार कर लिया और आरएसएस के वरिष्ठ पदाधिकारी और भारतीय वन सेवा के सेवानिवृत्त अधिकारी कृष्ण मोहन को अंतरिम महासचिव नियुक्त किया। साथ ही, ट्रस्ट ने एक नए मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) पद के सृजन की भी घोषणा की।

इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए,गोविंद देव गिरी ने चंपत राय का बचाव किया और कहा कि उनकी ईमानदारी के बजाय उनकी कार्यशैली एक मुद्दा बन गई है। उन्होंने कहा, “यह बेईमानी की मंशा का मामला नहीं था। चंपत जी ने अपने ड्राइवर पर अत्यधिक भरोसा किया था। इतने बड़े संस्थान में काम का विकेंद्रीकरण और निरंतर निगरानी जरूरी है।” गोविंद ने यह भी बताया कि जिम्मेदारियों के विकेंद्रीकरण को लेकर पहले भी चिंताएं जताई गई थीं लेकिन चंपत राय द्वारा खुद अधिक काम संभालने के कारण उन्हें नजरअंदाज कर दिया गया।

चंपत जी ने अपने ड्राइवर पर भरोसा किया- गोविंद देव गिरी

गोविंद देव गिरी ने कहा, “जिस तरह सीता ने मारीच पर भरोसा किया, उसी तरह चंपत जी ने अपने ड्राइवर पर भरोसा किया। वह भरोसा गलत साबित हुआ।” उन्होंने आगे कहा, “हालांकि सभी को लगता है कि उन्हें इस्तीफा नहीं देना चाहिए था लेकिन यह भी सच है कि उनकी लापरवाही के कारण एक बड़ा संकट खड़ा हो गया, भले ही इसमें कोई दुर्भावना नहीं थी।”

राय के इस्तीफे को स्वीकार न करने के संबंध में ट्रस्ट के भीतर हुए विरोध के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि कई ट्रस्टी उनके चरित्र पर विश्वास के कारण उन्हें पद पर बने रहने देना चाहते थे। उन्होंने कहा, “यह सच है कि कई सदस्यों को लगा कि चंपत जी की सत्यनिष्ठा में विश्वास के कारण उनका इस्तीफा स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए था। मैं भी यही मानता हूं। हमें गहरा दुख हुआ।” उन्होंने ट्रस्ट के इस दुख की तुलना “भगवान राम को सीता से विदा होते समय हुए दर्द” से की।

ट्रस्ट के पास इस्तीफे को स्वीकार करने के अलावा कोई कानूनी विकल्प नहीं

देव गिरी ने कहा कि हालांकि, ट्रस्ट के पास इस्तीफे को स्वीकार करने के अलावा कोई कानूनी विकल्प नहीं था क्योंकि वरिष्ठ ट्रस्टी के पारासरन जिन्होंने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष राम जन्मभूमि स्वामित्व मुकदमे की पैरवी की थी, उन्होंने बताया कि ट्रस्ट के संविधान के तहत एक बार इस्तीफा दिए जाने के बाद उसे स्वीकार कर लिया जाता है।

‘नौकरशाहों और प्रशासनिक अधिकारियों की भी जिम्मेदारियां थीं’

जवाबदेही के मुद्दे पर गिरि ने कहा कि ट्रस्ट ने विभिन्न पदाधिकारियों को जिम्मेदारियां सौंपी हैं। उन्होंने कहा, “हुंडी और दान पेटियों की देखरेख अनिल मिश्रा जी करते थे। एक बार जब पैसा खजाने में आ जाता था तो यह मेरी जिम्मेदारी बन जाती थी।” उन्होंने कहा, “लेकिन एसबीआई के अधिकारियों और ट्रस्ट से जुड़े नौकरशाहों की भी जिम्मेदारियां थीं। उन्हें भी इन मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए था। अगर उन्हें कोई चिंता थी तो उन्हें मामला इस स्तर तक पहुंचने से पहले ही इसे उठाना चाहिए था।” उन्होंने कहा कि शासन व्यवस्था को मजबूत करने के लिए संतों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के साथ-साथ नौकरशाहों को भी ट्रस्ट में शामिल किया गया है।

गिरि ने कहा, “विचार यह था कि प्रत्येक व्यक्ति अपनी विशेषज्ञता के अनुसार योगदान देगा। नौकरशाहों से प्रशासनिक कमियों की पहचान करने और समय पर सुझाव देने की अपेक्षा की गई थी। ये सुझाव संकट से पहले ही आ जाने चाहिए थे।” उन्होंने स्वीकार किया कि अनियमितताओं के पहले संकेत मिलते ही ट्रस्ट को जल्द कार्रवाई करनी चाहिए थी। उन्होंने कहा, “जैसे ही किसी भी प्रकार की गड़बड़ी का संकेत मिला, उसकी सूचना दी जानी चाहिए थी। यह अपेक्षा हर संस्था में होती है।”

अपनी अगली कार्ययोजना के बारे में गोविंद देव गिरी ने कहा, “पहली प्राथमिकता विश्वास बहाल करना है। हमें मतगणना प्रक्रिया से शुरू करके पूरी व्यवस्था में सुधार करना होगा। संवेदनशील पदों पर कार्यरत प्रत्येक व्यक्ति को जिम्मेदारी सौंपे जाने से पहले बैकग्राउंड वेरिफिकेशन से गुजरना होगा।” उन्होंने कहा कि ट्रस्ट 2800 से अधिक आभूषणों, मूर्तियों और अन्य मूल्यवान वस्तुओं का रिकॉर्ड रखता है और जो कुछ हुआ है वह लापरवाही, अपर्याप्त पर्यवेक्षण और सतर्कता की कमी का परिणाम है। उन्होंने आगे कहा कि प्रस्तावित सुधारों पर 22 जुलाई को होने वाली अगली बैठक में चर्चा की जाएगी।

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श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय ने मंगलवार को कहा कि राम मंदिर के चंदे की चोरी के आरोपों पर एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट आने के बाद ही वे अपने खिलाफ लगे सभी आरोपों का जवाब देंगे। खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें