राम मंदिर ट्रस्ट के पूर्व सदस्य अनिल मिश्रा पर शिकंजा कसता जा रहा है। ताजा घटनाक्रम में विश्व हिंदू परिषद के उपाध्यक्ष और ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय ने दावा किया है कि मानक संचालन प्रक्रियाएं (SOP) फरवरी 2025 में अनिल मिश्रा और भारतीय स्टेट बैंक के अधिकारियों द्वारा उनकी जानकारी या अनुमोदन के बिना संयुक्त रूप से तैयार की गई थीं।
चंपतय राय द्वारा यूपी एसआईटी को लिखा पत्र 7 जुलाई को वायरल हो गया था। चंपत राय ने कुप्रबंधन के लिए अनिल मिश्रा को दोषी ठहराया है। चंपत राय के अनुसार एसबीआई से जुड़े प्रशासनिक और वित्तीय मामलों को संभालने के अधिकार अनिल मिश्रा के पास थे। यह पत्र उस समय का है, जब चंपत राय राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव थे। पत्र पर उनके हस्ताक्षर हैं।
चंपत राय ने एसबीआई की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कैश रजिस्टर में नोटों के बंडलों को गिनने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले सामान्य नियमों का पालन बैंक द्वारा निजी एजेंसी के माध्यम से नियुक्त आउटसोर्स कैश-काउंटिंग कर्मचारियों द्वारा नहीं किया गया होगा।
पत्र से यह भी स्पष्ट है कि महाकुंभ के दौरान, जब राम मंदिर में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी थी, तब अनिल मिश्रा ने एसबीआई की अयोध्या शाखा के मुख्य प्रबंधक गोविंद मिश्रा के साथ एक समझौता किया था।
महाकुंभ के दौरान दान की राशि पिछले महीनों की तुलना में कई गुना बढ़ गई। इसके चलते ट्रस्ट को नकदी गिनने की प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए मजबूर होना पड़ा, जिसके बाद एसबीआई के साथ एक नया समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए।
राय ने आगे बताया कि मिश्रा और बैंक के बीच हस्ताक्षरित दस्तावेज़ के अलावा, अगस्त 2020 के बाद से एसबीआई के साथ सभी पत्राचार उन्होंने स्वयं किया था।
फरवरी में हुए समझौता ज्ञापन के कारण नकदी गिनने की प्रक्रिया में आई खामी की ओर इशारा करते हुए राय ने कहा कि इस मामले की जांच के लिए वरिष्ठ प्रबंधन और बैंक अधिकारियों को शामिल करने की आवश्यकता है, क्योंकि ऐसा समझौता नकदी गिनने वाले कर्मचारियों और निजी एजेंसियों द्वारा पालन किए जाने वाले सामान्य नियमों और संहिता के अनुरूप नहीं लगता है।
राम मंदिर चढ़ावा चोरी विवाद: कैसे शुरू हुआ मामला, अब तक क्या-क्या हुआ? पढ़िए पूरी टाइमलाइन
अयोध्या में श्री राम मंदिर एक बार फिर सुर्खियों में है। हालांकि इस बार मामला भूमि विवाद या मंदिर निर्माण का नहीं बल्कि मंदिर में श्रद्धालुओं के चढ़ावे की चोरी और उससे जुड़ी जांच का है। नियमित ऑडिट के दौरान सामने आई कथित अनियमितताओं से शुरू हुआ यह मामला अब एसआईटी जांच, गिरफ्तारियों, ट्रस्ट पदाधिकारियों के इस्तीफों और राजनीतिक बयानबाजी तक पहुंच चुका है। पढ़ें पूरी खबर।
