बदरीनाथ धाम में हाल में सांस्कृतिक महोत्सव के दौरान हुए शोर-शराबे वाले संगीत और नाच-गाने के कार्यक्रम का भारी विरोध शुरू हो गया है। इसके बाद चमोली जिला प्रशासन ने भारतीय सेना की स्थानीय बटालियन गढ़वाल स्काउट्स को कारण बताओ नोटिस भेजा है।
भाजपा के वरिष्ठ नेता डॉ. मुरली मनोहर जोशी ने ऐसे कार्यक्रमों को सांस्कृतिक मर्यादाओं का उल्लंघन बताया था।
चमोली के डीएम गौरव कुमार ने गढ़वाल स्काउट के ‘कमांडिंग ऑफिसर’ को भेजे नोटिस में कहा है कि बदरीनाथ धाम में इस प्रकार के सामूहिक आयोजन और उसमें ऊंची ध्वनि का इस्तेमाल इसकी गरिमा के खिलाफ है। नोटिस में कहा गया है कि इससे वहां हर दिन होने वाले पूजा कार्यक्रमों पर प्रतिकूल असर पड़ता है।
ऊंची आवाज को लेकर सवाल
नोटिस में यह भी कहा गया है कि इस प्रकार के आयोजनों से स्थानीय प्रशासन की छवि भी प्रभावित होती है। चमोली के डीएम गौरव कुमार ने इस प्रकार के आयोजनों पर सवाल उठाते हुए पूछा, ”क्या बदरीनाथ धाम में सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाने के संबंध में कोई अनुमति सक्षम स्तर से प्राप्त की गयी थी। कार्यक्रम में ऊंची आवाज का इस्तेमाल किन वजहों से किया गया?”
डीएम ने यह भी कहा कि भविष्य में बदरीनाथ धाम में इस प्रकार के कार्यक्रम फिर से नहीं हों। इस बारे में सेना के प्रवक्ता ने कहा, ”इस संबंध में आधिकारिक बयान आने पर उसे मीडिया के साथ साझा किया जाएगा।”
क्या कहा था मुरली मनोहर जोशी ने?
बीजेपी के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. मुरली मनोहर जोशी ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में बदरीनाथ में शोर-शराबे वाले संगीत समारोह के आयोजन को अनुमति दिए जाने पर सवाल उठाया था। जोशी ने इसे न केवल सांस्कृतिक मर्यादाओं का उल्लंघन बल्कि धाम की पवित्रता पर भी सीधा हमला बताया था। नाराजगी व्यक्त करते हुए जोशी ने कहा था, “इस जगह पर शंख बजाना भी मना है परंतु हम उसे भूलकर शोर-शराबे वाले संगीत कार्यक्रमों का आयोजन कर भारतीय आध्यात्मिक, सांस्कृतिक, पर्यावरणीय मूल्यों की घोर उपेक्षा कर रहे हैं।”
जोशी ने केंद्र एवं राज्य सरकारों से भी आग्रह किया था कि वे ऐसे आयोजनों पर प्रतिबंध लगाकर देवभूमि की मर्यादा को बनाये रखें।
क्या हुआ था बदरीनाथ धाम में?
बदरीनाथ धाम में 19 और 20 सितंबर को ‘देवभूमि सांस्कृतिक महोत्सव-2026’ का आयोजन किया गया था जिसका उद्देश्य उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत, लोक परंपरा और सीमांत क्षेत्र के स्थानीय उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने के साथ ही महिलाओं और युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए उद्यमिता और पर्यटन को बढ़ावा देना बताया गया था। महोत्सव के समापन समारोह में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए थे।
पुरोहित महापंचायत ने भी किया विरोध
उत्तराखंड चार धाम तीर्थ पुरोहित महापंचायत ने आरोप लगाया कि आयोजकों ने बताए गए मकसद के बजाय धाम की धार्मिक परपंराओं और मान्यताओं के खिलाफ नाच-गाने और शोर-शराबे वाले कार्यक्रम किए। यह कार्यक्रम बदरीनाथ धाम में स्थित अराइवल प्लाजा में हुआ था।
उत्तराखंड चार धाम तीर्थ पुरोहित महापंचायत के महासचिव डॉ. बृजेश सती ने कहा, ”हमारा विरोध सांस्कृतिक महोत्सव के आयोजन को लेकर नहीं बल्कि उसके स्वरूप और प्रस्तुति को लेकर है। यहां बदरीनाथ की धार्मिक और पौराणिक मर्यादाओं के अनुरूप कार्यक्रम होने चाहिए।”
आयोजन धार्मिक मर्यादा का उल्लंघन
आदि गुरु शंकराचार्य द्वारा स्थापित ज्योतिर्मठ बदरिकाश्रम के शंकराचार्य मठ ने भी इस आयोजन को परंपरा-विरुद्ध, सांस्कृतिक फूहड़ता एवं धार्मिक मर्यादा का उल्लंघन बताते हुए इस पर घोर आपत्ति जतायी। शंकराचार्य स्वामी अवधेशानंद के शिष्य और मठ के प्रभारी स्वामी प्रत्यक्चैतन्यमुकुन्दानन्द गिरि ने कहा कि बदरिकाश्रम वह पावन क्षेत्र है जहां ऋषियों-मुनियों ने अत्यंत शांति और संयम के नियम तय किए हैं।
स्वामी प्रत्यक्चैतन्यमुकुन्दानन्द गिरि ने मुख्यमंत्री से इस मामले में दखल देने का आग्रह करते हुए परंपराओं के उल्लंघन, मर्यादाहीन कृत्यों और फूहड़ आयोजनों के जिम्मेदार आयोजकों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने बदरीनाथ धाम एवं अन्य तीर्थ क्षेत्रों में संगीत कार्यक्रम, फूहड़ प्रदर्शन और शोर-शराबे वाले आयोजनों पर तुरंत पूर्ण प्रतिबंध लगाने और किसी बड़े आयोजन से पूर्व शंकराचार्य जी से परामर्श एवं मार्गदर्शन लेने की अनिवार्य व्यवस्था बनाए जाने का अनुरोध किया।
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