अजित पवार की मौत के बाद खाली हुई महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री की कुर्सी पर उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार बैठने जा रही हैं। राज्यसभा की सांसद सुनेत्रा पवार सक्रिय राजनीति से काफी हद तक दूर रही हैं।

सुनेत्रा पवार का जन्म 1963 में उस्मानाबाद (अब धाराशिव) में एक मराठा परिवार में हुआ था। इस परिवार की राजनीतिक जड़ें काफी मजबूत थी। उनके पिता बाजीराव पाटिल बड़े नेता थे जबकि उनके भाई पदम सिंह बाजीराव पाटिल भी इस जिले में एक प्रभावशाली नेता थे।

सुनेत्रा परिवार ने 1983 में औरंगाबाद (अब छत्रपति संभाजीनगर) के एसबी आर्ट्स एंड कॉमर्स कॉलेज से कॉमर्स में स्नातक की डिग्री पूरी की थी। दिसंबर, 1985 में सुनेत्रा के भाई ने अजित से उनकी शादी तय कर दी।

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सामाजिक मुद्दों पर किया काम

शादी के बाद लंबे समय तक सुनेत्रा औपचारिक राजनीति से दूर रहीं और बारामती में सामाजिक मुद्दों पर काम किया। उन्होंने बारामती में खुले में शौच की परेशानी को देखते हुए स्वच्छता अभियान चलाया।

स्थानीय लोगों को याद है कि सुनेत्रा पवार ने लोगों को अपने घरों में शौचालय बनाने के लिए प्रोत्साहित किया। जब काठेवाड़ी गांव खुले में शौच मुक्त हो गया तो केंद्र सरकार ने 2006 में इसे ‘निर्मल ग्राम’ का दर्जा दिया। बाद में काठेवाड़ी सौर ऊर्जा से चलने वाली स्ट्रीटलाइटों, बायोगैस संयंत्रों, जैविक खेती पद्धतियों के साथ एक आदर्श पर्यावरण गांव के रूप में विकसित हुआ। इसे संत गडगेबाबा स्वच्छता अभियान सहित कई पुरस्कार प्राप्त हुए।

सुनेत्रा पवार ने 2008 में बारामती हाई टेक टेक्सटाइल पार्क की स्थापना में अहम भूमिका निभाई थी। 65 एकड़ में फैले इस पार्क में 15,000 से अधिक कर्मचारी कार्यरत हैं, जिनमें से अधिकांश महिलाएं हैं।

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2024 में पहली बार लड़ा चुनाव

सुनेत्रा 2024 के लोकसभा चुनावों से चुनावी राजनीति में आईं। तब अजित पवार ने उन्हें एनडीए समर्थित एनसीपी उम्मीदवार के रूप में बारामती से मैदान में उतारा। उनका मुकाबला एनसीपी संस्थापक शरद पवार की बेटी और उनकी भाभी सुप्रिया सुले से था।

सुनेत्रा सुप्रिया सुले से चुनाव हार गईं। इसके बाद उन्हें राज्यसभा भेजा गया। इस कदम को अजित पवार द्वारा उन्हें राजनीति में आगे बढ़ाने की भूमिका के रूप में देखा गया। जून, 2024 में राज्यसभा जाने के बाद उनकी इस सदन में लगभग 69% उपस्थिति रही है।

सुनेत्रा के परिवार का नाम कई बार विवादों में भी आया है। उनके भाई और पूर्व विधायक को कांग्रेस नेता पवनराजे निंबालकर और उनके ड्राइवर की 2006 में हुई हत्या के मामले में मुख्य आरोपी बनाया गया था। यह मामला अभी भी अदालत में चल रहा है।

सुनेत्रा का नाम महाराष्ट्र राज्य सहकारी बैंक मामले से संबंधित शुरुआती जांच में सामने आया था क्योंकि उनके चीनी मिलों के लेन-देन में शामिल कंपनियों से संबंध थे। 2021 में ईडी ने अजित और सुनेत्रा पवार से जुड़ी फर्मों की संपत्तियों को जब्त कर लिया था लेकिन एजेंसी की चार्जशीट में दोनों में से किसी का भी नाम नहीं था।

अप्रैल 2024 में, मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने उन्हें क्लीन चिट देते हुए कहा था कि बैंक से जुड़े लोन स्वीकृत करने या चीनी मिलों की बिक्री और पट्टे में कोई अपराध नहीं मिला।

क्या हैं सुनेत्रा पवार की चुनौतियां?

सुनेत्रा पवार मृदु भाषी हैं और उनके पास सीमित राजनीतिक अनुभव है। उपमुख्यमंत्री और एनसीपी के चेहरे के रूप में उन्हें पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ तालमेल बिठाकर काम करना होगा क्योंकि पार्टी में कई ऐसे नेता हैं जो कई सालों से संगठन में और मंत्री के पदों पर रहे हैं।

अगर एनसीपी के दोनों गुट एक साथ आ जाते हैं तो सुनेत्रा पवार को अपने बेटे पार्थ पवार और जय पवार पर निर्भर रहना होगा। उनके दोनों बेटों की अभी कोई बड़ी राजनीतिक पहचान नहीं है। इसके साथ ही सुनेत्रा पवार को पार्टी के ऐसे नेताओं को भी संभालना होगा, जो अपने राजनीतिक अस्तित्व को बचाए रखने के लिए भाजपा के साथ हाथ मिला चुके हैं।

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