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पुलिस की हिम्मत है कि ट्रैक्टर रोक ले? राकेश टिकैत बोले- ट्रैक्टर ही तो तोड़ते हैं बैरियर

टिकैत का कहना था कि किसानों की लड़ाई सरकार से नहीं है, बल्कि देश के लुटेरों से है। ये बहुत बड़े लुटेरे हैं। ये भूख का व्यापार करने जा रहा हैं, लेकिन हम उन्हें ऐसा नहीं करने देंगे।

Rakesh Tikait, BKU, National NewsBKU प्रवक्ता और किसान नेता राकेश टिकैत। (फोटो सोर्सः PTI)

राकेश टिकैत का कहना है कि ट्रैक्टर बैरियर तोड़ने के लिए ही होते हैं। पुलिस की हिम्मत नहीं है कि वो किसानों के ट्रैक्टर रोक ले। उनका कहना था कि किसानों की लड़ाई सरकार से नहीं है, बल्कि देश के लुटेरों से है। ये बहुत बड़े लुटेरे हैं। ये भूख का व्यापार करने जा रहा हैं, लेकिन हम उन्हें ऐसा नहीं करने देंगे।

टिकैत ने कहा कि ये लोग रोटी को तिजोरी में बंद करने की साजिश कर रहे हैं। उनकी लड़ाई उस किसान के लिए भी है, जिसके पास जमीन नहीं है। उनका कहना था कि ये नए तरह के लुटेरे हैं। इनसे देश को बचाना है। टिकैत ने कहा कि दिल्ली को चारों तरफ से किसानों ने घेरा हुआ है, लेकिन ये लुटेरे फिर भी नहीं मान रहे। ये पहले कहते थे कि आंदोलन केवल पंजाब के किसानों का है। फिर इसे जाटों को बताया। अब इसे जाति में बांट रहे हैं।

टिकैत ने कहा कि आप लोग अपनी फसल काट लो। अप्रैल में आपको फिर से आंदोलन के लिए दिल्ली आना पड़ेगा। अपने ट्रैक्टर में डीजल भरवाकर खड़े कर लो। जब भी बुलाया जाए दिल्ली की तरफ कूच कर देना। उनका कहना था कि आपको अपनी जमीन बचानी है तो आंदोलन में शिद्दत से जुटना होगा। उनका कहना था कि अब दिल्ली के वोट क्लब पर ट्रैक्टर चलेगा।

किसान नेता ने का कि आज पेट्रोल और डीजल के दाम कितनी तेजी से बढ़ा रहा है पर सरकार कुछ भी नहीं कर रही। टिकैत ने कहा कि एमएसपी किसानों को नहीं दिया जा रहा है। किसान यहां बाजरे को 11 रुपए किलो बेचता है और दिल्ली के माल में वही बाजरा दोगुने दाम पर बिक रहा है। टिकैत ने कहा कि ये पूंजीवादी लोग छोटे-छोटे दुकानदारों को मारने की साजिश में जुटे हैं।

उनका कहना था कि इन बड़ी-बड़ी कंपनियों का मुकाबला करना होगा। आप लोग कमजोरी मत दिखाना। आपका ट्रैक्टर कहीं नहीं रुकेगा। उन्बोंने आह्वान किया कि जब दिल्ली आना तो खेत की मिट्टी को साथ लेकर आना। टिकैत ने सरकार को आड़ं हाथ लेते हुए कहा कि ये लोग ट्रैक्टर की सब्सिडी छुड़वा सकते हैं तो सांसद और विधायकों से क्यों नहीं कहते कि अपनी पेंशन छोड़ दो।

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