भारत दौरे पर आए ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अरागची ने शुक्रवार को अपने देश के चाबहार बंदरगाह को एक सुनहरा दरवाजा और सहयोग का प्रतीक बताया। उन्होंने उम्मीद जताई कि भारत इस रणनीतिक बंदरगाह को विकसित करना जारी रखेगा।
उन्होंने इस बात पर जोर देते हुए कहा कि भारत इस क्षेत्र में एक रचनात्मक भूमिका निभा सकता है। अरागची ने ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक में शामिल होने के बाद नई दिल्ली में ईरानी दूतावास में ये बातें कहीं। वह बैठक पश्चिम एशिया में युद्ध को लेकर इस्तेमाल की जाने वाली भाषा पर आम सहमति न बन पाने के कारण बिना किसी नतीजे के समाप्त हो गई।
‘चाबहार ईरान और भारत के बीच सहयोग का प्रतीक’
अरागची विदेश मंत्री एस जयशंकर से द्विपक्षीय बैठक के लिए मुलाकात की। उन्होंने कहा कि चाबहार ईरान और भारत के बीच सहयोग का प्रतीक है। इस बंदरगाह के विकास में भारत ने एक महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई है। अमेरिका के प्रतिबंधों के कारण अब इसमें कुछ हद तक सुस्ती आ गई है, लेकिन मुझे विश्वास है कि यह बंदरगाह भारत के लिए मध्य एशिया और फिर इस पारगमन मार्ग के जरिए यूरोप तक पहुंचने का एक सुनहरा दरवाजा साबित होगा।
‘चाबहार बहुत ही रणनीतिक बंदरगाह’
उन्होंने कहा कि चाबहार बहुत ही रणनीतिक बंदरगाह है। यह हमारे और भारत- दोनों के लिए और साथ ही कई अन्य देशों के लिए भी महत्त्वपूर्ण है। यह यूरोपीय लोगों, मध्य एशियाई लोगों और अन्य लोगों के लिए हिंद महासागर तक पहुंचने का भी एक जरिया बनेगा। इसलिए मुझे उम्मीद है कि भारतीय चाबहार बंदरगाह पर अपना काम जारी रखेंगे, ताकि भारत और आसपास के अन्य देशों के हितों की सेवा के लिए इसका पूरी तरह से विकास हो सके।
‘भारत पश्चिम एशिया में शांति के लिए बड़ी भूमिका निभा सकता है’
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने शुक्रवार को कहा कि भारत पश्चिम एशिया में शांति के लिए बड़ी भूमिका निभा सकता है क्योंकि इस क्षेत्र के लगभग सभी देशों के साथ उसके मैत्रीपूर्ण संबंध हैं। अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच युद्ध के आर्थिक प्रभावों को लेकर बढ़ती वैश्विक चिंता के बीच उनका यह बयान आया है।
नई दिल्ली में संवाददाता सम्मेलन में उनकी ये टिप्पणियां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अबू धाबी में दिए गए उस बयान के कुछ ही समय बाद आईं, जिसमें उन्होंने कहा था कि भारत इस क्षेत्र में शांति के लिए हर संभव सहयोग देने को तैयार है।
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चाबहार पोर्ट को लेकर अमेरिका ने अपनी पिछली छूट को रद्द कर दिया था, लेकिन उसने भारत को 26 अप्रैल, 2026 तक वैध छह महीने की छूट प्रदान की। पूरी खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें।
