Madhya Pradesh News: मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बातचीत और मंत्रियों की एक कमेटी बनाकर अपने कार्यकाल के सबसे बड़े किसान आंदोलनों में से एक को शांत करने की कोशिश की। हालांकि, केंद्र सरकार ने बुधवार को मध्य प्रदेश सरकार के उस दावे को सार्वजनिक रूप से खारिज कर दिया कि मूंग की खरीद का संकट दिल्ली से अपर्याप्त मंजूरी मिलने की वजह से पैदा हुआ था।
मुख्यमंत्री मोहन यादव को लिखे गए एक पत्र में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने केंद्र की खरीद नीति का बचाव किया और तर्क दिया कि तत्काल चुनौती केंद्र द्वारा मंजूर की गई मात्रा के साथ नहीं, बल्कि राज्य की खरीद की गति के साथ थी।
शिवराज सिंह चौहान ने आंकड़ों का दिया हवाला
29 जुलाई तक केंद्र के पास उपलब्ध आंकड़ों का हवाला देते हुए चौहान ने कहा कि मध्य प्रदेश ने मंजूर की गई बहुत बड़ी मात्रा के बावजूद केवल 60,000 मीट्रिक टन मूंग की खरीद की थी। चौहान ने लिखा, “किसानों के व्यापक हित को ध्यान में रखते हुए, राज्य सरकार से अनुरोध है कि वह यह सुनिश्चित करे कि मूंग की खरीद में जल्द से जल्द तेजी लाई जाए।”
राज्य के कृषि मंत्री ऐदल सिंह कंसाना ने शिवराज सिंह चौहान को पत्र लिखा था। इसमें उन्होंने 2025-26 के ग्रीष्मकालीन सीजन के लिए मूल्य समर्थन योजना के तहत खरीदी जा सकने वाली मूंग की मात्रा में बढ़ोतरी की मांग की थी।
शिवराज सिंह चौहान ने राज्य के कृषि मंत्री को दिया जवाब
इसके एक दिन बाद केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बिंदुवार जवाब दिया। चौहान ने कहा कि मध्य प्रदेश को इस योजना के तहत देश का सबसे बड़ा आवंटन पहले ही मिल चुका है। उन्होंने कहा, “2025-26 के ग्रीष्मकालीन सीजन के लिए, पीएसएस के तहत मध्य प्रदेश के लिए 4,54,580 मीट्रिक टन तक मूंग की खरीद को पहले ही मंजूरी दी जा चुकी है। यह मौजूदा सीजन के दौरान सभी राज्यों में खरीद के लिए मंजूर किए गए कुल 5,23,243 मीट्रिक टन का 87% है, जिससे मध्य प्रदेश देश का सबसे बड़ा लाभार्थी बन गया है।”
कृषि मंत्री ऐदल सिंह कंसाना के पत्र में कहा गया है कि केंद्र ने राज्य को 4.54 लाख मीट्रिक टन खरीद का लक्ष्य दिया है। चौहान ने लिखा, “हालांकि, असलियत यह है कि केंद्र सरकार राज्यों को खरीद का कोई टारगेट नहीं देती है।”
केंद्र का पक्ष रखते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि खरीद की मंजूरी पीएम-आशा स्कीम के तहत दी जाती है, न कि तय टारगेट के आधार पर। चौहान ने कहा, “पीएम-आशा स्कीम के तहत, पीएसएस के अंतर्गत मंजूरी स्कीम की गाइडलाइंस के अनुसार दी जाती है, जिसमें अनुमानित उत्पादन का 25% तक खरीद करने का प्रावधान है।”
केंद्र किसी राज्य के उत्पादन का केवल 25% तक ही खरीद कर सकता है- चौहान
स्कीम के प्रावधानों का जिक्र करते हुए चौहान ने लिखा, “स्कीम में साफ तौर पर कहा गया है कि केंद्र किसी राज्य के उत्पादन का केवल 25% तक ही खरीद कर सकता है, जबकि इस सीमा से ज्यादा की कोई भी खरीद राज्य सरकार को करनी होगी।” उन्होंने आगे कहा कि केंद्र ने पीएसएस के तहत मध्य प्रदेश को हमेशा ज्यादा से ज्यादा संभव मदद दी है।
अपनी बात को मजबूत करने के लिए चौहान ने पिछले कुछ सालों में खरीद की मंजूरी में लगातार हुई बढ़ोतरी की ओर इशारा किया। उन्होंने कहा कि केंद्र ने 2021-22 और 2022-23 में 2.75 लाख मीट्रिक टन, 2023-24 में 3.30 लाख मीट्रिक टन, 2024-25 में 4.19 लाख मीट्रिक टन और इस साल 4.54 लाख मीट्रिक टन खरीद को मंज़ूरी दी थी। उन्होंने लिखा, “बाकी बची अतिरिक्त मात्रा राज्य सरकार द्वारा खरीदी गई थी और किसानों की मूंग की समय पर खरीद सुनिश्चित की गई थी।”
किसानों ने खत्म किया धरना
कंसना, राज्य के सहकारिता मंत्री विश्वास सारंग और राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कृष्णा गौर ने मंत्रालय में संयुक्त किसान मोर्चा के 15 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल के साथ बातचीत की। इसके बाद भोपाल में दो दिन से डेरा डाले हजारों किसानों ने बुधवार देर रात धरना समाप्त कर दिया। बैठक के बाद राज्य ने कहा कि वह हर पात्र किसान की मूंग की उपज की खरीद 25% से बढ़ाकर 60% करेगा। इस कदम से नर्मदापुरम, सीहोर और हरदा जैसे जिलों में प्रति एकड़ लगभग तीन क्विंटल उपज की खरीद होगी।
सरकार ने कहा कि यह फैसला तुरंत लागू होगा। आंदोलन की दूसरी बड़ी मांग पर सरकार ने घोषणा की कि उर्वरक वितरण के लिए ई-टोकन सिस्टम को सुधार होने तक तुरंत प्रभाव से रोक दिया जाएगा। ऑनलाइन सिस्टम को एक अम सुधार बताते हुए कंसना ने इसके शुरुआती दौर में आई व्यावहारिक दिक्कतों को भी स्वीकार किया। सरकार ने खरीद के लिए स्लॉट बुकिंग की अवधि भी 10 दिन बढ़ा दी।
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अनाज की बोरियां, बिस्तर, खाना बनाने के बर्तन और एक हफ्ते का राशन लेकर लगभग 2000 किसान मंगलवार को भोपाल के बाहरी इलाकों में पहुंच गए। उन्होंने शहर के दक्षिणी छोर पर पुलिस की बैरिकेडिंग को तोड़ दिया। फसल खरीद को लेकर चल रहा यह विवाद अब मुख्यमंत्री मोहन यादव की सरकार के लिए इस साल के सबसे बड़े राजनीतिक टकरावों में से एक बन गया है। यहां क्लिक कर पढ़ें पूरी खबर…
