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भाजपा छोड़ी तो केंद्र ने वापस ले ली मुकुल रॉय की VIP सुरक्षा, खुद पत्र लिखकर की थी अपील

मुकुल रॉय ने कांग्रेस पार्टी के साथ अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत की थी। ममता बनर्जी ने जब कांग्रेस से अलग होकर तृणमूल कांग्रेस पार्टी का गठन किया, उस वक्त मुकुल रॉय भी पार्टी के प्रमुख संस्थापक सदस्यों में से एक थे।

भाजपा छोड़ी तो केंद्र ने वापस ले ली मुकुल रॉय की VIP सुरक्षा (फोटोः एजेंसी)

पश्चिम बंगाल के नेता मुकुल रॉय को प्रदत्त जेड श्रेणी की वीआईपी सुरक्षा उनसे वापस ले ली गई है। रॉय कुछ दिन पहले भाजपा छोड़कर तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) में वापस आ गए थे। इससे पहले केंद्र ने उनके बेटे का सुरक्षा कवर हटा दिया था। तब से माना जा रहा था कि मुकुल की सुरक्षा भी जल्द वापस हो सकती है।

पिछले सप्ताह ही मुकुल राय अपने बेटे शुभ्रांगशु के साथ ममता बनर्जी के पास वापस आ गए थे। 2017 में ममता को छोड़कर बीजेपी में आने के बाद मुकुल को गृह मंत्रालय ने सुरक्षा कवर दिया था जिसे 2021 के चुनाव के पहले अपग्रेड कर दिया गया था। टीएमसी में वापस लौटने के बाद मुकुल ने पत्र लिखकर कहा था कि उनकी सुरक्षा वापस ले ली जाए। सूत्रों के अनुसार, सुरक्षा वापस लेने का आदेश कल जारी किया गया था और फिलहाल सीआरपीएफ सुरक्षा वापस लेने की प्रक्रिया में है। मुकुल रॉय के बेटे सुभ्रांशु की केंद्रीय सुरक्षा पिछले शनिवार को ही वापस ले ली गई थी।

सूत्रों ने बताया कि केंद्रीय गृह मंत्रालय ने केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) को 67 वर्षीय रॉय की सुरक्षा में तैनात जवानों को वापस बुलाने का निर्देश दिया है। 2017 में तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव के पद से हटाए जाने के बाद रॉय ने पार्टी छोड़ दी थी और नवंबर 2017 में भाजपा में शामिल हो गए थे।

उन्हें भाजपा का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया गया था। इसके बाद उन्हें केंद्रीय अर्द्धसैनिक बल सीआरपीएफ की वाई प्लस श्रेणी की सुरक्षा दी गई थी जो इस साल मार्च-अप्रैल में पश्चिम बंगाल में विधानसभा से ठीक पहले बढ़ाकर जेड श्रेणी की कर दी गई थी। रॉय जब भी पश्चिम बंगाल में कहीं जाते थे तो हर बार उनके साथ सीआरपीएफ के 22-24 सशस्त्र कमांडो का जत्था होता था। सूत्रों ने बताया कि रॉय के पुत्र को सीआईएसएफ की कम श्रेणी की सुरक्षा दी गई थी, वह भी वापस ले ली गई है। अब रॉय और उनके बेटे को राज्य पुलिस सुरक्षा दे रही है।

मुकुल रॉय ने कांग्रेस पार्टी के साथ अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत की थी। ममता बनर्जी ने जब कांग्रेस से अलग होकर तृणमूल कांग्रेस पार्टी का गठन किया, उस वक्त मुकुल रॉय भी पार्टी के प्रमुख संस्थापक सदस्यों में से एक थे। टीएमसी ने मुकुल रॉय को साल 2006 में राज्यसभा भेजा। इसके बाद वे साल साल 2012 में लगातार दूसरी बार राज्यसभा सांसद बने। मनमोहन सरकार के दूसरे कार्यकाल में वो जहाजरानी मंत्री और फिर रेल मंत्री बने।

कुछ समय के बाद मुकुल रॉय और पार्टी चीफ ममता बनर्जी के बीच अनबन होनी शुरू हो गई। साल 2017 में मुकुल को बीजेपी के बड़े नेताओं के साथ मुलाकात करने की वजह से टीएमसी ने 6 साल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया। पार्टी के इस रवैये को देखते हुए मुकुल रॉय ने टीएमसी के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया। इतना ही नहीं, उन्होंने राज्यसभा से भी इस्तीफा दे दिया। टीएमसी छोड़ने के बाद मुकुल रॉय ने 2017 में ही बीजेपी जॉइन कर ली। 2020 में उन्हें बीजेपी का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष नियुक्त कर दिया गया।

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