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375 रुपये न्यूनतम मजदूरी की सिफारिश मोदी सरकार ने ठुकराई, नई कमेटी बनाने पर विचार: रिपोर्ट

वर्तमान में अधिकतर राज्यों में न्यूनतम मजदूरी 200 रुपये के करीब है। केंद्र सरकार की तरफ से हर दूसरे साल राष्ट्रीय न्यूनतम मानक मजदूरी अधिसूचित की जाती है।

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केंद्र की मोदी सरकार की तरफ से 375 रुपये की न्यूनतम दैनिक दिहाड़ी की सिफारिश को ठुकरा दिया है। टेलीग्राफ की खबर के अनुसार समिति की सिफारिश को ठुकराने के बाद केंद्र ने न्यूनतम दिहाड़ी तय करने के लिए नई समिति भी गठित की है। हाल में पारित हुए मजदूरी एक्ट के तहत सरकार को मानक मजदूरी (Floor wage) अधिसूचित कर सकती है।

कोई भी राज्य सरकार इस मानक मजदूरी से नीचे न्यूनतम मजदूरी तय नहीं कर सकता है। अधिकारियों का कहना है कि श्रम और रोजगार मंत्रालय ने मानक मजदूरी को 200 से 225 रुपये के बीच में रखने के संकेत दिये है। सरकार की तरफ से इस उक्त मजदूरी को स्वीकार किया जा सकता है।

खबर के अनुसार अधिकारियों का नई समितियों को सिफारिशों अगले सप्ताह तक अधिसूचित किए जाने की संभावना है। इस बारे में राज्यों से फीडबैक मांगा जाएगा। इसके बाद सेंट्रल एडवाइजरी बोर्ड की बैठक आयोजित की जाएगी। बैठक में नियोक्ता के साथ कर्मचारियों को भी शामिल किया जाएगा।

उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार के इस निर्णय के पीछे वजह है कि नई समिति पुरानी समिति की सिफारिशों को दरकिनार कर नया प्रस्ताव रखे। इससे पहले अर्थशास्त्री अनूप सतपती की अध्यक्षता विशेषज्ञ समिति ने 375 रुपये न्यूनतम मजदूरी करने का सुझाव दिया था। इसमें अलग-अलग राज्यों में 342 रुपये से लेकर 447 तक हो सकती है।

वर्तमान में अधिकतर राज्यों में न्यूनतम मजदूरी 200 रुपये के करीब है। केंद्र सरकार की तरफ से हर दूसरे साल राष्ट्रीय न्यूनतम मानक मजदूरी अधिसूचित की जाती है। हालांकि, राज्य इसे लागू करने के लिए बाध्य नहीं हैं। साल 2017 में यह दर 176 रुपये अधिसूचित की गई थी।

इस साल जुलाई में मजदूरी की नई दर अधिसूचित की जानी है। सीपीएम की मजदूर इकाई सीआईटीयू के उपाध्यक्ष एके पद्मनाभन ने कहा कि वह सरकार के निर्णय से हैरान नहीं है। श्रम अर्थशास्त्री रवि श्रीवास्तव ने कहा कि सरकार को नई दरों की अधिसूचना मानक वेतन के लिए समिति के गठन से पहले मजदूरी एक्ट कोड के तहत करनी चाहिए थी।

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