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जजों की नियुक्ति पर फिर टकराव! मोदी सरकार ने लौटाए सुप्रीम कोर्ट के सुझाए नाम

समझा जाता है कि सरकार ने उच्चतम न्यायालय में न्यायाधीश के तौर पर सिफारिश किये गये उच्च न्यायालयों के दो मुख्य न्यायाधीशों के नाम कॉलेजियम को लौटा दिये हैं।

Author Updated: May 8, 2019 11:33 AM
(फाइल फोटो)

समझा जाता है कि सरकार ने उच्चतम न्यायालय में न्यायाधीश के तौर पर सिफारिश किये गये उच्च न्यायालयों के दो मुख्य न्यायाधीशों के नाम कॉलेजियम को लौटा दिये हैं। इस घटनाक्रम से जुड़े सूत्रों ने मंगलवार ( 7 मई) को यह जानकारी दी। उच्चतम न्यायलय कॉलेजियम ने झारखंड उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश अनिरूद्ध बोस और गौहाटी उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश ए एस बोपन्ना को उच्चतम न्यायालय में न्यायाधीश बनाये जाने के लिए 12 अप्रैल को उनके नामों की सिफारिश की थी। सूत्रों ने बताया कि (उनके नाम लौटा दिये जाने के) सरकार के फैसले के पीछे वरिष्ठता और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व वजह बतायी गयी है।
न्यायमूर्ति बोस न्यायाधीशों की अखिल भारतीय वरिष्ठता के क्रम में 12वें नंबर पर हैं। उनका मूल उच्च न्यायालय कलकत्ता उच्च न्यायालय रहा है। न्यायमूर्ति बोपन्ना वरिष्ठता क्रम में 36वें नंबर पर हैं। पिछले साल जब न्यायमूर्ति बोस के नाम की सिफारिश दिल्ली उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश पद के लिए की गयी थी तब भी सरकार ने उनका नाम लौटा दिया था।

गौरतलब है कि इस सिस्टम के जरिए जजों की नियुक्ति को लेकर सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस मदन बी लोकर ने कोलेजियम सिस्टम में बदलाव की मांग उठाई थी। उन्होंने फैसले को ऑनलाइन न करने पर निराशा जताई थी। जस्टिस लोकुर ने कहा था, मुझे निराशा है कि सुप्रीम कोर्ट कोलेजियम के 12 दिसंबर के फैसले को शीर्ष अदालत की वेबसाइट पर अपलोड नहीं किया गया। जस्टिस प्रदीप नंदराजोग और राजेंद्र मेनन को पदोन्नत नहीं किए जाने पर उन्होंने कहा था कि कोलेजियम में जो होता है वह गोपनीय है और भरोसा महत्वपूर्व है।

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