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मोदी सरकार और सुप्रीम कोर्ट कोलेजियम में फिर टकराव? इलाहाबाद HC में 13 जजों की नियुक्ति पर केंद्र की रोक

हाईकोर्ट जज बनने के लिए कोलेजियम की सिफारिश से पहले एक एडवोकेट की पिछले पांच साल की शुद्ध औसत प्रोफेशनल आय 7 लाख रुपये सालाना होनी चाहिए। सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि सिफारिश किए गए नामों में से तीन की वार्षिक आय करीब 4-4.5 लाख रुपये सालाना ही है।

Author नई दिल्ली | Updated: September 9, 2019 9:49 AM
केंद्र ने हाल ही आंध्र प्रदेश के एक जज को हाईकोर्ट का चीफ जस्टिस बनाए जाने की सिफारिश वाली फाइल लौटा दी थी। (फाइल फोटो)

क्या मोदी सरकार और सुप्रीम कोर्ट कोलेजियम में एक फिर टकराव की स्थिति में पहुंच गए हैं? हालिया मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट में 13 जजों की नियुक्ति से जुड़ा हुआ है। मोदी सरकार ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में 13  वकीलों की जजों के रूप में नियुक्ति को लेकर सुप्रीम कोर्ट कोलेजियम की सिफारिश पर फिलहाल रोक लगा दी है।

टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के अनुसार इन 13 में से 10 नाम उच्च न्यायपालिका में भर्ती होने संबंधी न्यूनतम आय योग्यता को पूरा नहीं करते हैं। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने सरकार से संभी लंबित सिफारिशों पर फैसला लेने की बात कही थी। वहीं, केंद्र सरकार ने उन सिफारिशों पर रोक लगाने का फैसला किया है जिनमें उम्मीदवार निर्धारित योग्यताओं को पूरा नहीं कर पा रहे हैं।

खबर के अनुसार सूत्रों का कहना है कि वर्तमान में केंद्र सरकार के पास इलाहाबाद हाईकोर्ट में नियुक्ति संबंधी कम से कम 13 सिफारिशें लंबित पड़ी हैं। इनमें से कम से कम 10 लोग न्यूनतम आय की योग्यता को पूरा नहीं कर रहे हैं। सरकार ने तीन अन्य सिफारिशों पर भी फिलहाल रोक लगा रखी हैं जिनमें वकील योग्यता पूरी नहीं कर पा रहे हैं।

मालूम हो कि हाईकोर्ट जज बनने के लिए कोलेजियम की सिफारिश से पहले एक एडवोकेट की पिछले पांच साल की शुद्ध औसत प्रोफेशनल आय 7 लाख रुपये सालाना होनी चाहिए। खबर में सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि सिफारिश किए गए नामों में से तीन की वार्षिक आय करीब 4-4.5 लाख रुपये सालाना ही है। जबकि शेष सात लोगों की वार्षिक आय 7 लाख रुपये सालाना से कम है।

खबर के अनुसार सुप्रीम कोर्ट की कोलेजियम ने जिन नामों की सिफारिश की है उनमें एक शीर्ष न्यायालय के जज का साला/बहनोई है। जबकि एक वकील पूर्व हाईकोर्ट जज का बेटा है। इसके अलावा अन्य नामों में प्रक्रिया से जुड़ी खामियां हैं। क्योंकि सुप्रीम कोर्ट की कोलेजियम वाले फैसले में आय वाले क्राइटेरिया को नजरंदाज कर दिया गया है। यह पहली बार नहीं है कि केंद्र सरकार ने कोलेजियम की सिफारिश पर रोक लगाई है।

हाल ही में मोदी सरकार ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक जज को प्रमोट करके आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट का चीफ जस्टिस बनाए जाने की सुप्रीम कोर्ट कोलेजियम की सिफारिश पर उससे दोबारा विचार करने के लिए कहा था। सूत्रों के अनुसार पिछले महीने जस्टिस विक्रम नाथ की फाइल लौटाते हुए केंद्र सरकार ने कोई वजह नहीं बताई थी।

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