सरकार ने बताई अनलॉक करने की शर्त, कहा- पहले ’70 फीसदी आबादी’ का करें टीकाकरण

स्वास्थ्य मंत्रालय के डेटा के मुताबिक, 13 मई तक देश में 45+ की 32 फीसदी आबादी को ही पहली डोज लग पाई है।

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कोरोना के केस कम होने के साथ ही कुछ जिलों में लॉकडाउन की छूटों को बढ़ाया गया है, जिससे संक्रमण बढ़ने का खतरा है। मंगलवार को ठाणे में भी इन छूटों के बाद बाजार में भीड़ जुट गई। (एक्सप्रेस फोटो- दीपक जोशी)

भारत में कोरोना के बढ़ते केसों के बीच अब तक कई राज्यों ने सख्त लॉकडाउन लगा रखा है। हालांकि, कुछ राज्यों ने महीनों तक चली बंदी के बाद आखिरकार लॉकडाउन की शर्तों में छूट देना भी शुरू कर दिया है। इस बीच केंद्र सरकार ने लॉकडाउन खोलने की कुछ शर्तें सामने रखी हैं। इसमें कहा गया है कि किसी भी जिले में अनलॉक करने के लिए वहां 5 फीसदी से कम पॉजिटिविटी रेट और कोरोना की चपेट में आ सकने वाली 70 फीसदी संवेदनशील आबादी का टीकाकरण तय होना चाहिए।

केंद्र ने कहा कि तीसरी लहर से बचाव और शहरों को ठीक ढंग से अनलॉक करने के लिए यह शर्तें पूरी करना अनिवार्य है। इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) के महानिदेशक डॉक्टर बलराम भार्गव ने कहा कि कोविड-19 उपयुक्त व्यवहार के लिए सामुदायिक स्तर पर जागरुकता होनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि प्रतिबंधों को धीरे-धीरे खत्म करने से कोरोना केसों में अचानक बढ़ोतरी नहीं होगी।

‘पहले वैक्सीन लगाएं, फिर जिलों को खोलने का सोचें’: डॉक्टर भार्गव ने कहा, “तीसरी लहर से बचाव के लिए सही यह होगा कि जिन जिलों में 5 फीसदी से कम संक्रमण दर है, उन्हें थोड़ा और धीरे-धीरे खुलने की इजाजत दी जाए। उन्हें यह भी सुनिश्चित करना होगा कि कम से कम 70 फीसदी संवेदनशील आबादी को टीका मिला हो। डॉक्टर भार्गव ने कहा कि संवेदनशील आबादी यानी 60 साल से ऊपर के बुजुर्ग और पहले से किसी बीमारी की चपेट में आ चुके 45 साल से ऊपर के लोगों का टीकाकरण बेहद जरूरी है। अगर यह लक्ष्य पूरा न हुआ हो, तो उन्हें लोगों को टीका लगाना चाहिए और फिर खुलना चाहिए।” स्वास्थ्य मंत्रालय के डेटा के मुताबिक, 13 मई तक देश में 45+ की 32 फीसदी आबादी को ही पहली डोज लग पाई है।

देश में घटते प़ॉजिटिविटी दर पर आईसीएमआर प्रमुख ने कहा, “हम इस वक्त भीषण दूसरी लहर की चपेट में हैं। हालांकि, अब यह धीरे-धीरे कमजोर हो रही है। हमारे पास 200 से भी कम जिले हैं, जहां 10 फीसदी से ज्यादा संक्रमण दर है, जबकि अप्रैल के आधिकरी हफ्ते में 10 फीसदी से ज्यादा पॉजिटिविटी रेट वाले 600 जिले थे।”

फिलहाल भारत में 239 जिले ऐसे हैं, जहां पॉजिटिविटी रेट 10 फीसदी से ज्यादा है। वहीं 145 जिलों में यह दर 5 से 10 फीसदी है। सुकून की बात यह है कि आधे भारत यानी करीब 350 जिलों में फिलहाल पॉजिटिविटी रेट 5 फीसदी से नीचे है। डॉक्टर भार्गव ने कहा कि यह आंकड़े बताते हैं कि हम सही राह पर हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी बताया कि बाकी राज्यों के मुकाबले सिक्किम, मिजोरम, मणिपुर और लद्दाख में एक्टिव केसों की संख्या बढ़ रही है।

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