केंद्र सरकार की ओर दी जाने वाली बुजुर्गों के लिए मासिक वृद्धावस्था पेंशन काफी कम है। केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय की ओर की गए मूल्यांकन में यह पाया गया कि राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम (NSAP) के तहत मासिक वृद्धावस्था पेंशन में केंद्र का योगदान महंगाई के कारण काफी कम हो गया है। यह अभी प्रति लाभार्थी 200 से 500 रुपये है, जो 2012 से ही नहीं बढ़ाई गई है।
रिपोर्ट के मुताबिक, महंगाई ने इन नकद हस्तांतरणों के वास्तविक मूल्य को करीब 45 प्रतिशत तक कम कर दिया है। अगर मौजूदा उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) के हिसाब से देखें तो 200 रुपये की पेंशन को अपनी मूल खरीदने की शक्ति बनाए रखने के लिए अब लगभग 353 रुपये का होना जरूरी होगा।
मंत्रालय ने जारी किया रिपोर्ट
हाल ही में मंत्रालय ने राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम (NSAP) का प्रभाव आकलन और मूल्यांकन नामक एक रिपोर्ट जारी की, इसी रिपोर्ट में इसकी जिक्र किया गया। यह मूल्यांकन अध्ययन असम, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश, बिहार, हरियाणा, गुजरात, जम्मू और कश्मीर और छत्तीसगढ़ में किया गया था।
अध्ययन में बताया गया है कि साल 2012 में मासिक पेंशन की राशि को संशोधित करके 60 से 79 वर्ष की आयु के बुजुगों के लिए 200 रुपये, विधवाओं (40 से 79 वर्ष) और दिव्यांग व्यक्तियों (18-79 वर्ष) के लिए 300 रुपये और 80 वर्ष और उससे अधिक आयु के लाभार्थियों के लिए 500 रुपये कर दिया गया था।
2012 से नहीं की गई बढ़ोतरी
दिल्ली स्थित एक रिसर्च और कंसल्टिंग फर्म, एकेडमी ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज की ओर से किए गए एक अध्ययन में कहा गया, “2012 से इस राशि में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है, हालांकि पिछले कुछ सालों में उपयोग खर्च में काफी बढ़ोतरी हुई है और यह ऐसे समय में हुआ है जब भारत आर्थिक मोर्चे पर तेजी से प्रगति कर रहा है और हाल ही में दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है।”
2012 में सीपीआई 100 पर था, वहीं 2024 में बढ़कर यह 191 हो गया, जो कुल मिलाकर 91 फीसदी की बढ़ोतरी दिखाता है। इस बढ़ोतरी के आधार पर पेंशन की राशि भी बढ़कर 200 रुपये और 500 रुपये के 382 रुपये और 955 रुपये हो जानी चाहिए थी।
आगे कहा गया, “सालाना करीब पांच फीसदी की औसत महंगाई (2010-2024) ने तय कैश ट्रांसफर की असली कीमत को काफी कम कर दिया है। हर माह 200 से 500 रुपये वाला सेंट्रल पेंशन का हिस्सा 2012 से अब तक नहीं बदला है। मौजूदा सीपीआई के हिसाब से देखें, तो 200 रुपये की कीमत अब 353 रुपये होनी चाहिए ताकि उसकी पुरानी खरीदने की ताकत बनी रहे। ऐसे में इसका असली फायदा करीब 45 फीसदी कम हो गया है।”
अध्ययन में NFP की अनुशंसा
इस अध्ययन ने श्रम और रोजगार मंत्रालय की ओर से निर्धारित राष्ट्रीय न्यूनतम वेतन स्तर (National Floor Level Minimum Wage) की तर्ज पर एक राष्ट्रीय न्यूनतम पेंशन (NFP) की अनुशंसा की है।
रिपोर्ट में कहा गया, “इससे सभी राज्यों में एक समान रूप से वित्तीय सहायता का न्यूनतम स्तर सुनिश्चित होगा। NFP को उपभोक्ता मूल्य सूचकांक से जोड़ा जाना चाहिए ताकि यह महंगाई के साथ अपने समायोजित हो सके और जीवन-यापन की लागत के आधार पर इसमें हर साल संशोधन किया जा सके। इसके अलावा, राज्यों को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए कि वे लाभ के स्तर में क्षेत्रीय असमानताओं को कम करने के लिए केंद्र के हिस्से में एक समान और पारदर्शी तरीके से अतिरिक्त सहायता दें।”
स्टडी में आगे कहा गया है, “आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और हरियाणा जैसे राज्य, जो अधिक टॉप-अप देते हैं, उन्होंने आय में स्थिरता और खुशहाली के मामले में बेहतर नतीजे दिखाए हैं। इसलिए, पेंशन की रकम में बदलाव करने से यह पक्का करने में मदद मिलेगी कि NSAP कमजोर नागरिकों को सम्मान, सुरक्षा और सही मायने में मदद देने के अपने मकसद को पूरा करता रहे।”
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दिवंगत स्वतंत्रता सेनानी की 92 साल की पत्नी ने कर्नाटक हाई कोर्ट में एक याचिका दाखिल की है। जिसमें उसने कहा कि उसके स्वतंत्रता सेनानी पति के योगदान के सम्मान में भारत सरकार द्वारा उन्हें दी जा रही पेंशन को 2019 में रोक दिया गया था। जस्टिस सचिन शंकर मगदुम ने बुधवार को इस मामले में केंद्र सरकार, राज्य सरकार और यूनियन बैंक ऑफ इंडिया से जवाब मांगा। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
