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CMIE Unemployment Rate: मंदी का असर? चार महीने में सबसे ज्‍यादा रही फरवरी में बेरोजगारी दर, CMIE ने द‍िया ताजा आंकड़ा

CMIE Unemployment Rate: विश्लेषकों ने अनुमान लगाया कि एशिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था में मंदी की एक वजह वैश्विक स्तर पर कोरोनोवायरस का प्रकोप भी है।

चार महीने में सबसे ज्‍यादा बेरोजगारी दर फरवरी महीने में रही। (प्रतीकात्मक तस्वीर फाइल फोटो)

Centre for Monitoring Indian Economy CMIE Unemployment Rate: भारत में बेरोजगारी दर फरवरी महीने में पिछले चार महीने में सबसे ज्यादा रही। सीएमआईई के ताजा आंकड़ों से यह जानकारी सामने आयी है। अर्थव्यवस्था में मंदी के प्रभाव को दिखाते हुए सोमवार (2 मार्च) को सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (सीएमआईई) ने आकड़ा जारी किया है। आकड़ों के अनुसार, फरवरी में भारत की बेरोजगारी दर बढ़कर 7.78% हो गई, जो अक्टूबर 2019 के बाद से सबसे अधिक है। जनवरी में यह दर 7.16% थी।

2019 के अंतिम तीन महीनों में भारत की अर्थव्यवस्था पिछले छह साल में सबसे कम गति से आगे बढ़ी। विश्लेषकों ने अनुमान लगाया कि एशिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था में मंदी की एक वजह वैश्विक स्तर पर कोरोनोवायरस का प्रकोप भी है।

ग्रामीण क्षेत्रों में बेरोजगारी दर फरवरी में बढ़कर 7.37% हो गई, जो पिछले जनवरी महीने में 5.97% थी। वहीं शहरी क्षेत्रों में यह 9.70% से कम हो कर 8.65% हो गई। सीएमईआई मुंबई स्थित एक थिंक-टैंक है।

दूसरी ओर फिच सोल्यूशंस ने सोमवार को भारत की चालू वित्त वर्ष के आर्थिक वृद्धि के अपने पहले के अनुमान को घटाकर 4.9 प्रतिशत कर दिया। पहले उसने इसे 5.1 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया था। एजेंसी ने कहा है कि कोरोना वायरस के प्रभाव से आपूर्ति श्रृंखला गड़बड़ाने और घरेलू मांग कमजोर पड़ने से उसने वृद्धि का अनुमान घटाया है।

एजेंसी ने भारत की वित्त वर्ष 2020-21 की वृद्धि के अनुमान को भी 5.9 प्रतिशत से घटाकर 5.4 प्रतिशत कर दिया गया है।
फिच सोल्यूशंस ने भारत के परिदृश्य पर अपनी ताजा रपट में कहा है, ‘‘फिच सोल्यूशंस वित्तीय वर्ष 2019- 20 के लिये भारत के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि के अनुमान को पहले घोषित 5.1 प्रतिशत से घटाकर 4.9 प्रतिशत कर रहा है। वहीं वित्त वर्ष 2020- 21 के लिये भी इसे पहले के 5.9 प्रतिशत से घटाकर 5.4 प्रतिशत कर दिया गया है।’’

भारत की जीडीपी वृद्धि चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही (अक्टूबर- दिसंबर) के दौरान घटकर 4.7 प्रतिशत रही । दूसरी तिमाही के संशोधित अनुमानों में यह 5.1 प्रतिशत बतायी गयी। हालांकि प्रारंभिक अनुमान में दूसरी तिमाही की वृद्धि दर 4.5 प्रतिशत बतायी गयी थी। सरकार के स्तर पर खपत धीमी रहने, सकल सथायी पूंजी निर्माण में बड़ी गिरावट आने और शुद्ध निर्यात योगदान मामूली रहने से जीडीपी वृद्धि धीमी पड़ी है। (भाषा इनपुट के साथ)

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