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कोरोना का डबल म्यूटेंट फैला रहा तबाही, सरकार को यह बात मानने में लग गए 6 हफ्ते

NCDC प्रमुख ने बताया कि टॉप-10 सरकारी लैब्स दिसंबर से ही कोरोना की जीनोम सिक्वेंसिंग के काम में लगी हैं। अब तक 18 हजार से ज्यादा सैंपल्स की सीक्वेंसिंग की जा चुकी है।

Edited By कीर्तिवर्धन मिश्र नई दिल्ली | Updated: May 6, 2021 10:37 AM
कोरोनावायरस के डबल म्यूटेंट वैरिएंट को सरकार ने चिंता वाले वैरिएंट की श्रेणी में डाल दिया है। (एक्सप्रेस फोटो- Ganesh Shirsekar)

देश में कोरोनावायरस के केस तेजी से बढ़ते जा रहे हैं। इस बीच कई वैज्ञानिक दावा कर चुके हैं कि भारत में कोरोना में तेज उभार के पीछे वायरस के अलग-अलग वैरिएंट हैं। अब इन दावों के बीच केंद्र सरकार ने भी माना है कि कुछ राज्यों में संक्रमण के मामले बढ़ने के पीछे डबल म्यूटेंट वायरस एक कारण है। केंद्र की तरफ से यह तथ्य तकरीबन एक महीने से भी ज्यादा समय बाद स्वीकार किया गया है, जबकि इससे पहले सरकार लगातार कह रही थी कि उसे B.1.617 वैरिएंट के इतने केस नहीं मिले हैं कि इसे मौजूदा बढ़ोतरी से जोड़कर देखा जा सके।

अब केंद्र ने कहा है कि पिछले डेढ़ महीने में भारत में कोरोना केसों में जो तेजी देखी गई है, उसका B.1.617 कोरोना वैरिएंट से जुड़ाव है। हालांकि, केंद्र ने यह भी तर्क दिया कि इस वैरिएंट का महामारी के तेजी से उभरने से अब तक पूरी तरह संबंध स्थापित नहीं हुआ है। इस बीच सरकार ने इस वैरिएंट को ‘वैरिएंट ऑफ कंसर्न’ यानी चिंता वाले प्रकार में शामिल कर लिया है।

डेटा में भी कोरोना वैरिएंट्स का पैटर्न सामने आया है। इसके मुताबिक, 13 हजार सैंपल्स जिनकी जीनोम सीक्वेंसिंग की गई थी, उनमें 3532 चिंताजनक वैरिएंट्स पाए गए थे। इनमें 1527 डबल म्यूटेशन वाले B.1.617 वैरिएंट पाए गए थे। डबल म्यूटेंट वैरिएंट के सबसे ज्यादा सैंपल्स महाराष्ट्र (761), पश्चिम बंगाल (124), दिल्ली (107) और गुजरात (102), छत्तीसगढ़ (75), झारखंड (61) और मध्य प्रदेश (53) में मिले हैं।

B.1.617 वैरिएंट के 1527 सैंपल्स में सिर्फ 23 ही अंतरराष्ट्रीय यात्रा से जुड़े मिले। इसके अलावा बाकी सभी कम्युनिटी स्प्रेड से जुड़े थे। यानी सभी स्थानीय जनसंख्या में एक-दूसरे से फैले थे। नेशनल केयर फॉर डिजीज कंट्रोल (NCDC) के प्रमुख सुजीत सिंह के मुताबिक, शुरुआत में इस वैरिएंट की वंशावली का केंद्र महाराष्ट्र में पाया गया था। हालांकि, जब तक इसका महामारी और नैदानिक संबंध पूरी तरह स्थापित नहीं हो जाता, तब केसों के बढ़ने को इस वैरिएंट से जोड़कर नहीं देखा जा सकता।

NCDC प्रमुख ने बताया कि टॉप-10 सरकारी लैब्स दिसंबर से ही कोरोना की जीनोम सिक्वेंसिंग के काम में लगी हैं। अब तक 18 हजार से ज्यादा सैंपल्स की सीक्वेंसिंग की जा चुकी है। सिंह के मुताबिक, सीक्वेंसिंग से जुड़ी जानकारी पहले फरवरी में दो बार राज्यों के साथ साझा की गई। इसके बाद चार बार मार्च में और चार बार अप्रैल में भी उन्हें कोरोना के नए वैरिएंट्स के बारे में चेताया गया। इसके अलावा स्वास्थ्य मंत्रालय ने भी राज्यों को नए वैरिएंट्स के बारे में जानकारी देते हुए कड़े कदम उठाने के निर्देश दिए थे।

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