ताज़ा खबर
 

केंद्र ने कहा, यूपी, बिहार के मजदूरों से ज्यादा काम लेने के लिए दिए जाते हैं ड्रग्स, किसान नेता ने बताया बदनाम करने का हथकंडा

केंद्र सरकार की इस चिट्ठी पर एनडीए की पूर्व सहयोगी रही शिरोमणि अकाली दल ने कहा है कि यह चिट्ठी सिर्फ राज्य के किसानों को बदनाम करने के लिए है।

Author Edited By कीर्तिवर्धन मिश्र लुधियाना/नई दिल्ली | Updated: April 3, 2021 8:54 AM
farm laws. farmersकेंद्र सरकार की ओर से पंजाब को भेजी गई चिट्ठी पर किसान संगठनों ने नाराजगी जताई है। (एक्सप्रेस फोटो- गुरमीत सिंह)

कृषि कानूनों को लेकर केंद्र सरकार और किसान संगठनों के बीच पिछले पांच महीने से तनाव जारी है। हालांकि, अब एक विवाद के चलते किसानों के आंदोलन में नया मोड़ आ सकता है। दरअसल केंद्र सरकार ने हाल ही में बीएसएफ की एक जांच का हवाला देते हुए पंजाब सरकार से कहा है कि राज्य के खेतों में बिहार और यूपी से काम करने आए कृषि मजदूरों को ड्रग्स दिए जाते हैं, ताकि वे ज्यादा घंटे काम कर सकें। केंद्र ने पंजाब सरकार से इस जांच के आधार पर कार्रवाई करने को भी बोला है।

केंद्रीय गृह मंत्रालय की तरफ से 17 मार्च को पंजाब के मुख्य सचिव और डीजीपी को भेजी गई चिट्ठी में कहा गया है कि 2019-20 में बीएसएफ ने पंजाब के सीमाई जिलों से ऐसे 58 कृषि मजदूरों को पकड़ा था। हालांकि, केंद्र सरकार की इस चिट्ठी पर कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे किसान संगठनों की तीखी प्रतिक्रिया आई है। भारतीय किसान यूनियन (दकौंदा) के महासचिव और ऑल इंडिया किसान संघर्ष कॉर्डिनेशन कमेटी (AIKSCC) के सदस्य जगमोहन सिंह ने आरोप लगाया है कि केंद्र सरकार किसानों की छवि को खराब करना चाहती है।

पंजाब के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने नाम न उजागर करने की शर्त पर केंद्र की चिट्ठी में लिखी बातों की पुष्टि की, हालांकि उन्होंने इसमें सामने आए तथ्यों को अवास्तविक करार दे दिया। एनडीए की पूर्व सहयोगी रही शिरोमणि अकाली दल ने कहा है कि यह चिट्ठी सिर्फ राज्य के किसानों को बदनाम करने के लिए है।

चिट्ठी में पंजाब सरकार को केंद्र के निर्देश: केंद्र सरकार ने पंजाब के मुख्य सचिव को लिखे पत्र में केंद्रीय गृह मंत्रालय ने कहा कि सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) को पता चला है कि इन 58 लोगों को अच्छी पगार के वादे के साथ पंजाब लाया गया था लेकिन इनका शोषण किया गया और इन्हें नशीले पदार्थ देकर अमानवीय स्थितियों में काम करने को बाध्य किया गया।

गृह मंत्रालय ने बताया कि बीएसएफ ने सूचित किया है कि इन श्रमिकों को 2019 और 2020 में पंजाब के सीमावर्ती इलाकों गुरदासपुर, अमृतसर, फिरोजपुर और अबोहर से बचाया गया। पत्र की प्रति के अनुसार, “पूछताछ के दौरान पता चला कि अधिकतर श्रमिक मानसिक रूप से कमजोर थे और पंजाब के सीमावर्ती गांवों में किसानों के साथ बंधुआ मजदूरों की तरह काम कर रहे थे।” चिट्ठी के मुताबिक, “छुड़ाये गये लोग गरीब पारिवारिक पृष्ठभूमि के थे और बिहार तथा उत्तर प्रदेश के सुदूर इलाकों के रहने वाले थे।”

गृह मंत्रालय ने कहा कि इस बारे में सूचना मिली है कि मानव-तस्करी करने वाले गिरोह पंजाब में काम करने के लिए ऐसे मजदूरों को अच्छी पगार का वादा करके उनके पैतृक स्थानों से काम करने के लिए बुलाते हैं, लेकिन वहां पहुंचने के बाद उनका शोषण किया जाता है, बहुत कम वेतन दिया जाता है और उनके साथ अमानवीय बर्ताव किया जाता है। पंजाब सरकार से इस मामले में की गई कार्रवाई के बारे में भी प्राथमिकता से सूचित करने को कहा गया है।

Next Stories
1 भाजपा सांसद ने ईवीएम को बताया ‘होलसेल फ्रॉड’, दिग्विजय सिंह बोले- क्या आप हमारे साथ आएंगे?
2 शुक्रवार को कोरोना के एक दिन में रिकॉर्ड 88 हजार से अधिक मामले आए
3 संकट: कोरोना की दूसरी लहर इस महीने होगी चरम पर
ये पढ़ा क्या?
X