Central Vista Project Update: दिल्ली हाई कोर्ट ने साल 2024 में दिल्ली वक्फ बोर्ड की उस पिटीशन को खारिज कर दिया था जिसमें सेंट्रल विस्टा एरिया में रीडेवलपमेंट के दौर से गुजर रही छह मस्जिदों को बचाने की मांग की गई थी। कोर्ट ने यह फैसला तब लिया था जब सरकार ने 2021 में बताया कि उस समय इन स्ट्रक्चर को प्रभावित करने का कोई प्लान नहीं था।
100 साल से भी पुरानी है कदीमी मस्जिद
हालांकि, अब सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट से जुड़ा एक बड़ा अपडेट सामने आया है। परियोजना के तहत पिछले महीने, सेंट्रल पब्लिक वर्क्स डिपार्टमेंट ने कृषि भवन और शास्त्री भवन के रीडेवलपमेंट के लिए एक टेंडर निकाला, जिसमें उन मस्जिदों में से एक पर सवालिया निशान लगा दिया गया : कृषि भवन के खुले परिसर में स्थित 100 साल से भी पुरानी कदीमी मस्जिद।
यह मस्जिद हटाए जाने वाले स्ट्रक्चर की लिस्ट में नहीं है। लेकिन टेंडर के साथ अटैच डिटेल्ड ड्रॉइंग में, यह मस्जिद बनने वाली नई बिल्डिंग के मैप में अपनी जगह पर नहीं दिखती है।
गौरतलब है कि कदीमी मस्जिद का इस्तेमाल मुख्य रूप से सेंट्रल गवर्नमेंट के कर्मचारी नमाज पढ़ने के लिए करते हैं। ऐसा मस्जिद के इमाम ने कहा। यह मस्जिद आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया के तहत कोई सुरक्षित स्मारक नहीं है, लेकिन दिल्ली एडमिनिस्ट्रेशन के 1970 के गजट में छपी वक्फ प्रॉपर्टीज की लिस्ट में इसका नाम है।
केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय (MoHUA) के तहत CPWD ने 19 जनवरी को कृषि भवन और शास्त्री भवन की जगह पर कॉमन सेंट्रल सेक्रेटेरिएट (CCS) बिल्डिंग 4 और 5 बनाने के लिए एक टेंडर निकाला। बड़े सेंट्रल विस्टा रीडेवलपमेंट प्लान के तहत, मौजूदा सरकारी ऑफिस ब्लॉक को गिराकर 10 CCS बिल्डिंग बनाई जानी हैं।
महिलाओं के नमाज पढ़ने के लिए खास जगह
अब तक, तीन बिल्डिंग बन चुकी हैं और बाकी या तो बन रही हैं या प्लानिंग/टेंडरिंग स्टेज में हैं। फिलहाल, इस मामले में MoHUA ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। वहीं, जब इंडियन एक्सप्रेस ने मस्जिद का दौरा किया तब पाया कि लंच के समय लगभग 30-40 नामाजी वहां मौजूद थे। मस्जिद के बेसमेंट में महिलाओं के नमाज पढ़ने के लिए एक खास जगह है।
वैसे, सेंट्रल विस्टा रीडेवलपमेंट के दौरान किसी धार्मिक स्ट्रक्चर को हटाना कोई नई बात नहीं है। 6, मौलाना आजाद रोड पर वाइस-प्रेसिडेंट के पहले के ऑफिशियल घर की जगह पर बनी एक मस्जिद और एक मंदिर को सेंट्रल विस्टा रीडेवलपमेंट के हिस्से के तौर पर हटा दिया गया था।
दिल्ली वक्फ बोर्ड ने 2021 में हाई कोर्ट में छह वक्फ प्रॉपर्टीज की सुरक्षा की मांग की थी, जो सेंट्रल विस्टा रीडेवलपमेंट प्रोजेक्ट से प्रभावित हो सकती हैं : मानसिंह रोड पर मस्जिद जब्ता गंज; पार्लियामेंट के पास रेड क्रॉस रोड पर जामा मस्जिद; सुनहरी बाग रोड पर मस्जिद; सुनहरी बाग रोड पर मजार; कृषि भवन के अंदर मस्जिद और 6, मौलाना आजाद रोड के अंदर मस्जिद।
आखिरी दो के अलावा, बाकी मस्जिदें/मजार प्रस्तावित नई बिल्डिंग्स के प्लॉट्स के अंदर नहीं हैं। कृषि भवन मस्जिद के बारे में, वक्फ बोर्ड ने कहा कि यह “100 साल से ज्यादा पुरानी, चालू और अच्छी हालत में है” और यह “उस सरकारी बिल्डिंग से भी पुरानी है”।
वक्फ बोर्ड की याचिका में कहा गया, “यह याचिका एक सीमित मकसद से दायर की गई है ताकि यह पक्का किया जा सके कि धार्मिक/वक्फ प्रॉपर्टी, जो ऐतिहासिक रूप से भी महत्वपूर्ण हैं, इस याचिका का विषय हैं, उन्हें रीडेवलपमेंट प्रोसेस में सुरक्षित रखा जाए। यह कहना गलत नहीं होगा कि याचिकाकर्ता को यह याचिका सिर्फ इसलिए दायर करनी पड़ रही है क्योंकि उसने रेस्पोंडेंट से सफाई और भरोसा मांगने के लिए कई रिप्रेजेंटेशन दिए थे, लेकिन उन पर कोई सुनवाई नहीं हुई और कोई जवाब नहीं मिला।”
दिल्ली हाईकोर्ट ने क्या कहा था?
सुनवाई के दौरान, सरकार ने कोर्ट को बताया कि उस समय छह धार्मिक ढांचों के संबंध में कोई कार्रवाई नहीं की जा रही थी। सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने 1 दिसंबर, 2021 को कहा कि यह एक लंबे समय का प्रोजेक्ट है। उन्होंने कहा, “इन प्रॉपर्टीज का कुछ नहीं हो रहा है। हम आपके सामने हैं। यह (प्रोजेक्ट) एक बहुत लंबा प्लान है और हम अभी तक इसके आस-पास भी नहीं पहुंचे हैं।”
हालांकि, जब प्रतिक्रिया के लिए संपर्क किया गया तो मेहता ने कोई जवाब नहीं दिया। आखिरकार कोर्ट ने 22 जुलाई, 2024 को वक्फ बोर्ड की पिटीशन खारिज कर दी, यह कहते हुए कि वह फिर से अप्रोच कर सकता है “अगर पिटीशनर को सेंट्रल विस्टा रीडेवलपमेंट प्रोजेक्ट में वक्फ प्रॉपर्टी को कोई खतरा महसूस होता है”।
पिछले वक्फ बोर्ड का टर्म 2023 में खत्म हो गया था और उसके बाद इसे फिर से नहीं बनाया गया है। हाई कोर्ट की सुनवाई के समय दिल्ली वक्फ बोर्ड के चेयरमैन अमानतुल्लाह खान ने द इंडियन एक्सप्रेस को बताया: “सरकार ने कोर्ट में कहा था कि मस्जिदों पर कोई असर नहीं पड़ेगा। अगर वे अब इसे गिराने जा रहे हैं, तो यह गलत है।”
CCS 4 और 5 प्रोजेक्ट पर लगभग 3,006.07 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है और इसमें 24 महीने लगेंगे। CPWD ने 13 फरवरी तक बिड मंगाई हैं। CCS 4 और 5 बिल्डिंग 3.04 लाख sq m में फैली होंगी, जिनमें से हर एक में सात फ्लोर होंगे। बोली दस्तावेज में कहा गया है, “मौजूदा इमारतों को गिराने के बाद, यह काम प्लॉट संख्या 120 डॉ. राजेंद्र प्रसाद रोड, नई दिल्ली में स्थित शास्त्री भवन और कृषि भवन की इमारतों वाले निर्दिष्ट भूमि पार्सल के भीतर किया जाएगा।”
