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घेरे में रामविलास पासवान, धर्मेंद्र प्रधान का मंत्रालय, नहीं दिए SC/ST के लिए पैसे; नीति आयोग का सुझाव दरकिनार

एक अधिकारी ने बताया कि जनवरी 2019 में दिशा निर्देशों को अंतिम रूप दिया गया, जिसका मतलब है कि इसका पूर्ण रूप से अनुपालन इस वित्तीय वर्ष में सुनिश्चित नहीं हो सकता।

Author नई दिल्ली | June 26, 2019 6:29 PM
पीएम मोदी और रामविलास पासवान। फोटो: इंडियन एक्सप्रेस

सात केंद्रीय मंत्रालयों एवं विभागों ने 2019-20 के बजट में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (एससी/एसटी) के लिए धन आवंटित नहीं किया है तथा 12 मंत्रालयों ने नीति आयोग द्वारा प्रस्तावित रकम से कम धन आवंटन का प्रावधान किया। खाद्य एवं जन वितरण प्रणाली मंत्रालय और पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय उन मंत्रालयों एवं विभागों में शामिल हैं, जिन्होंने एससी/एसटी के कल्याण वाली योजनाओं के लिए धन आवंटित नहीं किया, जबकि इन दोनों मंत्रालयों के मंत्री दलित और ओबीसी चेहरे हैं।

बता दें कि रामविलास पासवान मोदी सरकार एक और दो में खाद्य एवं जन वितरण प्रणाली मंत्रालय संभालते रहे हैं। पासवान बड़े दलित नेता माने जाते रहे हैं और दलित हितों के लिए आवाज उठाते रहे हैं मगर उनके मंत्रालय ने एससी-एसटी के लिए धन आवंटित करने में कोताही बरती। ओडिशा के बड़े ओबीसी नेता धर्मेंद्र प्रधान पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के मंत्री हैं लेकिन उनके मंत्रालय ने भी नीति आयोग के सुझाव को दरकिनार कर अनुसूचित जाति-जनजाति के लिए धन आवंटित नहीं किया है।

नीति आयोग के सुझाए स्तर से कम प्रावधान करने वालों में पर्यावरण, ग्रामीण विकास, महिला एवं बाल विकास और आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय शामिल हैं। गौरतलब है कि 2017 में नीति आयोग ने एक नया दिशा निर्देश तैयार कर 41 मंत्रालयों एवं विभागों को अनुसूचति जनजाति के विकास कार्य योजना और अनुसूचित जाति के विकास कार्य योजना के लिए धन आवंटित करने का दायित्व दिया था। एक अधिकारी ने बताया कि जनवरी 2019 में दिशा निर्देशों को अंतिम रूप दिया गया, जिसका मतलब है कि इसका पूर्ण रूप से अनुपालन इस वित्तीय वर्ष में सुनिश्चित नहीं हो सकता।

अधिकारी ने कहा कि चूंकि मंत्रालय नवंबर-दिसंबर तक विभिन्न योजनाओं के लिए अपने आवंटन पर फैसला कर सकते हैं और दिशा निर्देशों को (अगले साल) जनवरी में अंतिम रूप दिया जा सकता है। ऐसे में कोई भी सुधारात्मक कार्य सिर्फ अगले साल ही संभव है। दिशा निर्देश में कहा गया है कि पहचान किए गए 41 मंत्रालयों और विभागों को कोष का कम से कम 4.3 फीसदी एसटी के विकास योजनाओं और कम से कम 8.3 फीसदी एससी के विकास योजनाओं के लिए आवंटित करना होगा।

अधिकारी के मुताबिक जनवरी में आर्थिक मामलों के विभाग (वित्त मंत्रालय) ने आदिवासी मामलों के मंत्रालय और सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय को पत्र लिख कर कहा था कि सात मंत्रालयों/ विभागों ने इन योजनाओं के लिए कोष आवंटित नहीं किया है तथा 12 ने नीति आयोग द्वारा सुझाए गए स्तर से कम प्रावधान किया है। विभाग ने संबद्ध मंत्रालयों और विभागों को इसे दुरूस्त करने को कहा है।

(भाषा इनपुट्स के साथ)

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