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केंद्रीय मंत्री बोले- बीच का रास्ता तलाश रहे थे शुजात बुखारी इसीलिए हुई हत्या

केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा,''मुझे पूरा भरोसा है कि सभी रिपोर्टों और परिस्थितियों का अध्ययन करने के बाद ही गृह मंत्रालय ने ये न्यायपूर्ण फैसला किया है। लेकिन हमें नहीं भूलना चाहिए कि फिलहाल हमारी प्राथमिकता शांतिपूर्ण ढंग से अमरनाथ यात्रा को संपन्न करवाना है।''

पीएमओ में राज्यमंत्री जितेन्द्र सिंह। Express Photo by Tashi Tobgyal

उधमपुर से भारतीय जनता पार्टी के सांसद और केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने एक अंग्रेजी अखबार को दिए इंटरव्यू में कई महत्वपूर्ण बातें कहीं हैं। उन्होंने केंद्र सरकार के जम्मू-कश्मीर में सीजफायर हटाने के फैसले का बचाव किया और इसे न्यायपूर्ण करार दिया। उन्होंने इस इंटरव्यू में पत्रकार शुजात बुखारी की हत्या से लेकर अमरनाथ यात्रा तक पर खुलकर बातें की हैं। सीजफायर की अवधि न बढ़ाने को लेकर केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा,”मुझे पूरा भरोसा है कि सभी रिपोर्टों और परिस्थितियों का अध्ययन करने के बाद ही गृह मंत्रालय ने ये न्यायपूर्ण फैसला किया है। लेकिन हमें नहीं भूलना चाहिए कि फिलहाल हमारी प्राथमिकता शांतिपूर्ण ढंग से अमरनाथ यात्रा को संपन्न करवाना है। ये सरकार की और समाज की जिम्मेदारी है। अमरनाथ यात्रा हिंदुओं के लिए सिर्फ पवित्र यात्रा भर नहीं है। ये भारत की मिली—जुली संस्कृति का प्रतीक है। हमारे सामने यात्रा को सफल बनाने की बड़ी चुनौती है। हम ये सुनिश्चित करने का वादा करते हैं कि कोई गलत हरकत इस दौरान नहीं होने दी जाएगी।

पत्रकार शुजात बुखारी और रायफलमैन औरंगजेब की हत्या से सीजफायर पर उठे सवालों पर उन्होंने कहा,” मैं नहीं मानता कि मैं इस स्थिति पर बात करने लायक हूं क्योंकि ये बेहद संवेदनशील मुद्दे हैं। गृह मंत्रालय सूचनाओं के आधार पर इसका विश्लेषण करेगा। लेकिन मुझे ये कहने में कोई संकोच नहीं है कि ये पाकिस्तान प्रायोजित लोगों ने किया है। मैं इन घटनाओं से खुद बेहद दुखी और आहत हूं।”

Shujaat Bukhari, editor Shujaat Bukhari, rising Kashmir, Pakistan, UN report on Kashmir, UN report, former Jammu Kashmir cm omar abdullah, Hindi news, News in Hindi, Jansatta शुजात बुखारी राइजिंग कश्मीर अखबार के संपादक और वरिष्ठ पत्रकार थे। (फाइल फोटो)

केंद्रीय मंत्री ने आगे कहा,”चाहें वो पत्रकार हो या फिर राजनेता हो। अगर उसने बीच का रास्ता निकालने की कोशिश की है तो उसकी यही नियति हुई है। शुजात बीच का रास्ता ढूंढने की कोशिश कर रहे थे। यही काम कुछ राजनेताओं जैसे मीरवाइज मौलवी फारुख कर रहे थे। यही काम अब्दुल गनी लोन भी कर रहे थे। मैं लंबी बात न कहते हुए पाकिस्तान की रणनीति पर बात करता हूं। जब भी कोई बीच का रास्ता निकालने और शांति की बात करता है तो वे उन्हें पूरे सीन से हटाने की कोशिश करने लगते हैं।”

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