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मंदिर पर घमासान तेज: संतों के सम्मेलन में पहुंचे श्रीश्री, मोदी के मंत्री बोले- SC के पास बस आतंकियों के लिए वक्त

केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा,''दुनिया की कोई भी ताकत राम मंदिर को बनने से नहीं रोक सकती है। सरकार और न्यायालय को आगे आकर इस मामले को सुलझा लेना चाहिए।"

आर्ट ऑफ लिविंग के प्रणेता श्री श्री रविशंकर। Express photo by Jasbir Malhi

साल 2019 के लोकसभा चुनावों से पहले राम मंदिर के निर्माण के लिए केंद्र सरकार पर दबाव बढ़ने लगा है। नई दिल्‍ली के तालकटोरा स्टेडियम मेें चल रहे साधु-संत सम्‍मेलन ‘धर्मादेश’ में संतों ने एक मत से राम मंदिर निर्माण के लिए सरकार से कानून बनाने का आग्रह किया है। वहीं धर्मादेश सम्मेलन के दूसरे दिन आध्यात्मिक गुरु श्रीश्री रविशंकर ने कहा कि देश के लाखों-लाख लोगों की इच्छा है कि अयोध्या में राम मंदिर बनना चाहिए।

वहीं श्रीश्री ने सम्मलेन को संबोधित करते हुए सबरीमाला पर दिए सुप्रीमकोर्ट के फैसले के बारे में भी बात की। उन्होंने कहा, ”सुप्रीम कोर्ट ने सबरीमाला पर जो फैसला दिया है उससे भी लोगों को दुख पहुंचा है। जबकि अयोध्या पर फैसला नहीं दिया है उससे भी लोगों को दुख पहुंचा है।”

श्रीश्री ने आगे कहा कि मंदिर की जरूरत संतों को नहीं होती हैं संत की मौजूदगी वाला स्थान ही मंदिर बन जाता है। लेकिन ये आम जनता की इच्छा है कि भगवान राम के जन्मस्थान पर उनका भव्य मंदिर बनाया जाए। श्रीश्री का कहना है कि राम मंदिर के लिए हमारे पास सभी विकल्प हैं। हम प्रयत्न और प्रार्थना दोनों का रास्ता अपनाने के लिए तैयार हैं। श्री श्री ने बताया कि हमारा विश्वास है कि सर्वोच्च न्यायालय रिव्यू पिटिशन को स्वीकार करेगा।

वहीं राममंदिर के बारे में केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने भी बड़ी बात कही है। गिरिराज सिंह रविवार (4 नवंबर) को अपने गृह क्षेत्र नवादा में पत्रकारों से बात कर रहे थे। उन्होंने कहा,”भाजपा के राज्यसभा में सांसद राकेश सिन्हा प्राइवेट बिल लेकर आ रहे हैं और यह देखना दिलचस्प होगा कि देश सौ करोड़ हिंदू आबादी की भावना का ख्याल रखने के लिए कांग्रेस पार्टी किसी ढंग से आगे आती है और अन्य दल किस रूप में इसे लेते हैं।”

वहीं सुप्रीम कोर्ट द्वारा मामले की सुनवाई जनवरी तक के लिए टाले जाने पर केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा,”दुनिया की कोई भी ताकत राम मंदिर को बनने से नहीं रोक सकती है। सरकार और न्यायालय को आगे आकर इस मामले को सुलझा लेना चाहिए क्योंकि मंदिर निर्माण में हो रही देरी को लेकर लोगों में आक्रोश है। न्यायालय के पास आतंकवादियों के लिए समय है लेकिन राम मंदिर पर सुनवाई के लिए वक्त नहीं है।

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