कोरोना संकटः 10 दिन के भीतर जारी करें ऑक्सीजन पर डेटा- मोदी सरकार को CIC की डेडलाइन

कोरोना की दूसरी लहर के दौरान दिल्ली के अस्पतालों में ऑक्सीजन की कमी से बड़ी संख्या में लोगों की जान जाने की घटनाएं सामने आई थीं, इस दौरान सरकार पर ऑक्सीजन की आपूर्ति ठीक ढंग से नहीं करने के आरोप भी लगे।

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कोरोना की दूसरी लहर के दौरान देशभर में मरीजों को करना पड़ा था ऑक्सीजन की कमी का सामना। (एक्सप्रेस फोटो)

केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) ने ऑक्सीजन के रिकॉर्ड्स सार्वजनिक तौर पर साझा न करने के लिए मोदी सरकार पर निशाना साधा है। आयोग ने केंद्र के फैसले को गलत करार देते हुए कहा है कि सरकार के ये तर्क कि इससे राष्ट्रहित पर खतरा पैदा होगा, इस तरह की बातें पूरी तरह अवास्तविक और अनुचित हैं।

2005 के सूचना के अधिकार (आरटीआई एक्ट) कानून के तहत बनाई गई संवैधानिक एजेंसी सीआईसी ने अब केंद्र को 10 दिन के अंदर ऑक्सीजन के मामलों से जुड़ी एम्पावर्ड ग्रुप सबकमेटी का डेटा रिलीज करने की हिदायत दी है। बता दें कि इस सबकमेटी में शामिल अधिकारी और एक्सपर्ट्स कोरोना केसों के बढ़ने के दौरान मेडिकल ऑक्सीजन की आपूर्ति और तैयारियों पर नजर रख रहे थे।

केंद्रीय वाणिज्य मंत्रालय के उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) के अंतर्गत आने वाली इस सबकमेटी को ही कोरोना महामारी के दौरान मेडिकल ऑक्सीजन की सप्लाई और उससे जुड़े प्रबंधन करने की जिम्मेदारी दी गई थी। बताया गया है कि सीआईसी का यह आदेश मेडिकल ऑक्सीजन के डेटा की मांग वाली एक आरटीआई के बाद आया। इस रिकॉर्ड की मांग दिल्ली के एक ट्रांसपेरेंसी एक्टिविस्ट और खोजी पत्रकार सौरव दास ने की थी।

बताया गया है कि दास ने आरटीआई एक्ट के तहत जानकारी मांगी कि ऑक्सीजन सबकमेटी कौन सी तारीखों को मिली और इन बैठकों का एजेंडा क्या रहा, इसके अलावा उन्होंने मीटिंग में किए गए प्रेजेंटेशन की कॉपी मांगी और ऑक्सीजन स्टॉक और इनकी सप्लाई की योजना का ब्योरा देने के लिए भी कहा। बता दें कि कोरोना की दूसरी लहर के दौरान देशभर के अस्पतालों में ऑक्सीजन की कमी से बड़ी संख्या में लोगों की जान जाने की घटनाएं सामने आई थीं।

इससे पहले DPIIT के केंद्रीय लोक सूचना अधिकारी (CPIO) ने 11 जून को इस मामले में आरटीआई एक्ट के सेक्शन 8(1)(a) और (d) के तहत कोई भी जानकारी देने से इनकार कर दिया था। इन धाराओं के अंतर्गत अधिकारी ऐसी जानकारियों को रोकर सकते हैं, जिनसे भारत के सुरक्षा, कूटनीतिक, वैज्ञानिक और आर्थिक हित प्रभावित हो सकते हैं। इसके अलावा व्यापार से जुड़ी गुप्त सूचनाएं और बौद्धिक संपदा से जुड़ी जानकारी भी रोकी जा सकती हैं।

इसी को लेकर सीआईसी ने 22 जुलाई को सौरव दास की अपील सुनने के बाद कहा कि जो जानकारी मांगी जा रही है, उसे छिपाने की कोशिश करना पूरी तरह अनुचित है। इसी के साथ सीआईसी ने CPIO को आरटीआई ऐक्ट के तहत इस मामले में ज्यादा से ज्यादा जानकारी मुहैया कराने के लिए कहा है।

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