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गृह मंत्रालय को साल 2010 से 2017 के बीच में गो हत्या के संदेह में मारे गए लोगों की जानकारी देने का आदेश

केंद्रीय सूचना आयोग गृह मंत्रालय को साल 2010 से 2017 के बीच में गो हत्या के संदेह में मारे गए लोगों की जानकारी देने को कहा है। सीआईसी ने यह आदेश एक आरटीआई आवेदक की याचिका पर दिया है।

मंत्रालय के जवाब नहीं देने पर आयोग के पास पहुंचा आरटीआई आवेदक। (प्रतीकात्मक फोटो)

केंद्रीय सूचना आयोग ने केंद्रीय गृह मंत्रालय को निर्देश दिया है कि वह सूचना के अधिकार (आरटीआई) अधिनियम के तहत उस आवेदक को जवाब दे जो यह जानना चाहता है कि 2010 से 2017 के बीच गो हत्या के संदेह में कितने लोगों की हत्या हुई।

समीर खान ने आरटीआई आवेदन में मंत्रालय से गो हत्या के शक में मारे गए और घायल हुए लोगों के नाम और सरकारों द्वारा उनके परिवारों को दिये गए मुआवजे का राज्यवार आंकड़ा मांगा था। मंत्रालय ने आवेदन पर जवाब नहीं दिया जिसके बाद खान ने आयोग से गुहार लगाई जो आरटीआई से जुड़े मामलों में सर्वोच्च अपीलीय प्राधिकार है।

खान ने आयोग से अनुरोध किया कि वह मंत्रालय को जानकारी उपलब्ध कराने का निर्देश दे। मुख्य सूचना आयुक्त सुधीर भार्गव ने कहा कि आवेदक द्वारा उपलब्ध कराए गए तथ्यों से यह स्पष्ट है कि उसे कोई जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई। उन्होंने कहा कि आरटीआई अधिनियम के तहत तय समयावधि में आवेदन का जवाब देना अनिवार्य है।

आयोग ने गृह मंत्रालय के केंद्रीय जन सूचना अधिकारी को निर्देश दिया कि वह आरटीआई कानून के प्रावधानों के तहत सूचना उपलब्ध कराए।

यूपी में गाय से संबंधित हिंसा के अधिक मामलेः साल 2017 में उत्तर प्रदेश में भाजपा और योगी आदित्यनाथ के सत्ता में आने के बाद से यहां गाय से संबंधित भीड़ हिंसा के मामले सामने आए हैं। फैक्टचेकर.इन के आंकड़ों के अनुसार गाय से संबंधित हिंसा के मामले में सबसे अधिक 69 फीसदी उत्तर प्रदेश से संबंधित हैं।

साल 2018 में 21 हमलों में 4 लोगों की मौत हो चुकी है। इनमें हापुड़ में 45 वर्षीय कासिम कुरैशी, बरेली में 20 साल का शाहरुख खान शामिल है। साल 2017 में गो हिंसा संबंधी मौत के मामलों में पश्चिम बंगाल शीर्ष पर था। यहां साल 2017 में गो हिंसा से संबंधित 5 लोगों की मौत हुई थी।

पिछले साल उत्तर प्रदेश में उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में पुलिस इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह की भी गो हिंसा संबंधी मामले में मौत हो गई थी।

गो हिंसा के मामले में मौत का आंकड़ा 18 फीसदी बढ़ाः फैक्टचेकर के आंकड़ों के अनुसार गोरक्षकों की तरफ से किए जाने वाले हमले अधिक घातक होते जा रहे हैं। साल 2017 के मुकाबले साल 2017 में गो हिंसा में मौत के मामलों में 18 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। साल 2018 में 21 में से 10 मामले में लोगों की मौत हो गई। वहीं 2010 में 37 मामलों में सिर्फ 11 मौत हुई थी।

(भाषा से इनपुट के साथ)

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