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गौमुख और गंगोत्री के ग्लैशियर को बचाने के लिए एकजुट हुईं केंद्र और राज्य सरकारें

गौमुख और गंगोत्री के ग्लेशियरों के अस्तित्व को बचाने के लिए केंद्र व राज्य सरकार मिल-जुलकर एक बड़ी कार्ययोजना को अमलीजामा पहनाने की तैयारी कर रहे हैं।

गौमुख और गंगोत्री के ग्लेशियरों के अस्तित्व को बचाने के लिए केंद्र व राज्य सरकार मिल-जुलकर एक बड़ी कार्ययोजना को अमलीजामा पहनाने की तैयारी कर रहे हैं। इस कार्ययोजना के तहत अब गौमुख और गंगोत्री क्षेत्र में तीर्थयात्रियों का रैला नहीं जा सकेगा। इन क्षेत्रों में अब तीर्थयात्री सीमित संख्या में जा पाएंगे। अब एक दिन में इस नई कार्ययोजना के तहत केवल डेढ़ सौ लोग ही एक दिन में गंगोत्री जा पाएंगे।
यह कार्ययोजना इसलिए बनाई गई है ताकि पर्यावरण को लेकर सबसे संवेदनशल क्षेत्र गौमुख और गंगोत्री के पर्यावरण में आ रहे परिवर्तन के दुष्प्रभावों पर काफी हद तक काबू पाया जा सके। गुरूकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय के पर्यावरण विज्ञान विभाग के प्रोफेसर डॉ दिनेश चंद्र भट्ट का कहना है कि इस कार्ययोजना के लागू होने से भागीरथी ईको-सेंसिटिव जोन के पर्यावरण में बढ़ते प्रदूषण को काफी हद तक रोकने में मदद मिलेगी।

उत्तराखंड के प्रमुख वनसंरक्षक जयराज के मुताबिक गंगोत्री क्षेत्र के पर्यावरण को दुरूस्त करने के लिए इस कार्ययोजना में पूरी व्यवस्था की गई है। साथ ही इससे जुड़े विभागों को कार्ययोजना को गंभीरता से लागू करने के निर्देश दिए गए हैं। और इस कार्ययोजना की लगातार समीक्षा की जाती रहेगी। ताकि कार्ययोजना की सफलता सुनिश्चित की जा सके।

इस समय भागीरथी इको-सेंसिटिव जोन में 22 मार्गों पर ट्रैकिंग को मान्यता दी गई है। इको-टूरिज्म की कार्ययोजना इन्हीं 22 ट्रैकिंग मार्गों पर बनेगी। केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय की केंद्रीय विशेषज्ञ ने भी इस कार्ययोजना को अपनी मंजूरी दे दी है। इस क्षेत्र में इको टूरिज्म की कार्ययोजना को अमल में तो लाया जाएगा, साथ ही इस क्षेत्र के पर्यावरण ग्लेशियर और प्राचीन धरोहरों को बचाने के मामले में कोई समझौता नहीं किया जाएगा। इस कार्ययोजना के तहत यह बंदोबस्त किए गए हैं कि इस क्षेत्र की प्राचीन धरोहरों के चारों ओर के सौ मीटर क्षेत्र में कोई विकास संबंधित गतिविधि नहीं की जाएगी।

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